Noida WTC News : नोएडा वर्ल्ड ट्रेड टावर के प्लॉट आवंटन की जांच शुरू, दिल्ली पुलिस ने प्राधिकरण से मांगे दस्तावेज, रंगदारी, धमकी और कथित फर्जी दस्तावेजों की शिकायत के बाद जांच तेज; 6 पोडियम और 22 मंजिल की इमारत, 2010 में हुआ था करीब 14 हजार वर्गमीटर भूखंड का आवंटन, आवंटन से लेकर लीज डीड तक खंगाले जा रहे रिकॉर्ड, ED और CBI की जांच का भी जिक्र
सेक्टर-16 स्थित वर्ल्ड ट्रेड टावर की मौजूदा इमारत में करीब 6 पोडियम और 22 मंजिल हैं। परिसर में विभिन्न कंपनियों के कार्यालय संचालित होते हैं। फिलहाल जांच का मुख्य केंद्र करीब 14 हजार वर्गमीटर जमीन के आवंटन, कंसोर्टियम की संरचना, उस समय जमा कराए गए दस्तावेज और वर्ष 2010 में निष्पादित लीज डीड पर है। अब दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों से यह स्पष्ट होगा कि प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई थी या इसमें किसी स्तर पर अनियमितता बरती गई थी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के सेक्टर-16 स्थित वर्ल्ड ट्रेड टावर (WTT) के प्लॉट आवंटन को लेकर जांच शुरू हो गई है। बुधवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम नोएडा प्राधिकरण पहुंची और भूखंड के आवंटन से संबंधित दस्तावेज मांगे। प्राधिकरण की ओर से जांच टीम को संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। मामला रंगदारी मांगने, धमकी देने और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्लॉट आवंटन से जुड़ी शिकायत के बाद सामने आया है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने कहा है कि प्राधिकरण जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और दिल्ली पुलिस द्वारा मांगे जा रहे दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
2010 में कंसोर्टियम के पक्ष में हुआ था आवंटन
जांच सेक्टर-16 स्थित प्लॉट नंबर W-01 से जुड़ी बताई जा रही है। करीब 14 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले इस भूखंड का आवंटन मार्च 2010 में एक कंसोर्टियम के पक्ष में किया गया था। इसके बाद अगस्त 2010 में भूखंड की लीज डीड भी निष्पादित की गई थी। अब दिल्ली पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वर्ष 2010 में भूखंड के आवंटन की प्रक्रिया क्या थी और कंसोर्टियम की ओर से प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किए गए दस्तावेज नियमों के अनुरूप थे या नहीं।
कंसोर्टियम से जुड़े व्यक्ति की शिकायत के बाद जांच
बताया गया है कि भूखंड पाने वाले कंसोर्टियम से जुड़े एक व्यक्ति की ओर से दिल्ली पुलिस की संबंधित शाखा में शिकायत की गई थी। शिकायत में रंगदारी मांगने, धमकी देने तथा प्लॉट आवंटन के दौरान कथित रूप से फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इसी शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है। जांच के तहत पुलिस टीम ने नोएडा प्राधिकरण से भूखंड आवंटन की पूरी प्रक्रिया और उससे संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।
आवंटन से लेकर लीज डीड तक खंगाले जा रहे रिकॉर्ड
जांच में दिल्ली पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्लॉट आवंटन के समय कंसोर्टियम में कौन-कौन लोग शामिल थे और प्राधिकरण के समक्ष कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। इसके अलावा आवंटन पत्र, कंसोर्टियम से संबंधित रिकॉर्ड, लीज डीड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। नोएडा प्राधिकरण की ओर से पुलिस को उपलब्ध कराए जा रहे रिकॉर्ड के आधार पर आगे की जांच की जाएगी।
ईडी और सीबीआई की जांच का भी जिक्र
वर्ल्ड ट्रेड टावर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों को लेकर ईडी और सीबीआई की जांच का भी जिक्र सामने आता रहा है। ऐसे में अब दिल्ली पुलिस की ओर से प्लॉट आवंटन और कथित फर्जी दस्तावेजों से संबंधित शिकायत की जांच शुरू होने से मामले की गंभीरता बढ़ गई है। हालांकि, कथित आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल दिल्ली पुलिस दस्तावेजों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।
नोएडा प्राधिकरण भी रिकॉर्ड की पड़ताल करेगा
नोएडा प्राधिकरण की ओर से जांच में सहयोग किए जाने की बात कही गई है। संबंधित अधिकारियों द्वारा पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दस्तावेजों की जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के आधार पर आगे की कार्रवाई हो सकती है।
6 पोडियम और 22 मंजिल की इमारत
सेक्टर-16 स्थित वर्ल्ड ट्रेड टावर की मौजूदा इमारत में करीब 6 पोडियम और 22 मंजिल हैं। परिसर में विभिन्न कंपनियों के कार्यालय संचालित होते हैं। फिलहाल जांच का मुख्य केंद्र करीब 14 हजार वर्गमीटर जमीन के आवंटन, कंसोर्टियम की संरचना, उस समय जमा कराए गए दस्तावेज और वर्ष 2010 में निष्पादित लीज डीड पर है। अब दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों से यह स्पष्ट होगा कि प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई थी या इसमें किसी स्तर पर अनियमितता बरती गई थी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



