Greater Noida Pitbull Attack : ग्रेटर नोएडा में पिटबुल का खौफ, महिला पर जानलेवा हमला… 15 मिनट तक जबड़े में फंसा रहा हाथ, पार्क में कुत्तों की एंट्री पर लगी रोक, इलाके में दहशत, पार्क में आने से डर रहे लोग, पार्क में कुत्तों की एंट्री पर रोक, उल्लंघन पर लगेगा जुर्माना, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रेटर नोएडा के डेल्टा-1 स्थित बी-ब्लॉक पार्क में रविवार सुबह पिटबुल कुत्ते के हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया। मॉर्निंग वॉक और अपने पालतू कुत्ते को टहला रही एक महिला पर अचानक दूसरे व्यक्ति के पिटबुल ने हमला कर दिया। देखते ही देखते पिटबुल ने महिला के बाएं हाथ को अपने जबड़ों में जकड़ लिया और करीब 10 से 15 मिनट तक नहीं छोड़ा। महिला दर्द से चीखती रही, जबकि मौके पर मौजूद लोग उसे बचाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के डेल्टा-1 स्थित बी-ब्लॉक पार्क में रविवार सुबह पिटबुल कुत्ते के हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया। मॉर्निंग वॉक और अपने पालतू कुत्ते को टहला रही एक महिला पर अचानक दूसरे व्यक्ति के पिटबुल ने हमला कर दिया। देखते ही देखते पिटबुल ने महिला के बाएं हाथ को अपने जबड़ों में जकड़ लिया और करीब 10 से 15 मिनट तक नहीं छोड़ा। महिला दर्द से चीखती रही, जबकि मौके पर मौजूद लोग उसे बचाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। काफी मशक्कत के बाद लोगों ने किसी तरह महिला को पिटबुल के चंगुल से छुड़ाया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने महिला के हाथ में करीब 12 टांके लगाए। इस घटना के बाद पूरे सेक्टर में दहशत का माहौल है और पार्कों में पालतू कुत्तों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
15 मिनट तक चलता रहा संघर्ष, लोगों ने बड़ी मुश्किल से बचाई जान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार सुबह पार्क में सामान्य दिनों की तरह लोग टहल रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति अपने पिटबुल को लेकर पार्क में पहुंचा। अचानक पिटबुल ने पास से गुजर रही महिला पर हमला कर दिया और उसके बाएं हाथ को मजबूती से पकड़ लिया। महिला लगातार मदद के लिए चिल्लाती रही, लेकिन पिटबुल का जबड़ा इतना मजबूत था कि वह किसी भी कीमत पर हाथ छोड़ने को तैयार नहीं था। आसपास मौजूद लोगों ने डंडों और अन्य तरीकों से कुत्ते को हटाने की कोशिश की। लगभग 15 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद महिला को पिटबुल के कब्जे से छुड़ाया जा सका। घायल महिला को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद हाथ में करीब 12 टांके लगाए। चिकित्सकों के अनुसार महिला खतरे से बाहर है, लेकिन उसके हाथ में गंभीर चोटें आई हैं और पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा।
इलाके में दहशत, पार्क में आने से डर रहे लोग
घटना के बाद डेल्टा-1 सेक्टर के लोगों में भय का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पार्क में रोजाना बड़ी संख्या में छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सुबह-शाम टहलने आते हैं। यदि खतरनाक नस्ल के कुत्तों को बिना पर्याप्त सुरक्षा के सार्वजनिक पार्कों में घुमाया जाएगा तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सार्वजनिक स्थानों पर पालतू कुत्तों के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं और खतरनाक नस्ल के कुत्तों को बिना मजबूत पट्टे और सुरक्षा उपायों के पार्कों में लाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
पार्क में कुत्तों की एंट्री पर रोक, उल्लंघन पर लगेगा जुर्माना
घटना के बाद रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और स्थानीय प्रबंधन ने पार्क में पालतू कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। पार्क के प्रवेश द्वार पर चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही पार्कों में निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
खतरनाक नस्लों को लेकर फिर उठे सवाल
देश के कई शहरों में पहले भी पिटबुल, रॉटवीलर और अन्य आक्रामक नस्ल के कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कई राज्यों और स्थानीय निकायों ने ऐसी नस्लों के पंजीकरण और पालन-पोषण को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी लगातार देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पालतू पशु मालिकों की जिम्मेदारी तय करना, नियमित प्रशिक्षण, मजबूत नियंत्रण और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराना भी उतना ही आवश्यक है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि सार्वजनिक पार्कों में खतरनाक नस्ल के कुत्तों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए। साथ ही ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने वाले पालतू कुत्तों के मालिकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी मासूम, महिला या बुजुर्ग को इस तरह के जानलेवा हमले का सामना न करना पड़े।
यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी है कि यदि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया तो ऐसे हादसे भविष्य में और भी गंभीर रूप ले सकते हैं। नागरिकों का कहना है कि पार्क मनोरंजन और स्वास्थ्य के लिए होते हैं, न कि डर और असुरक्षा का कारण बनने के लिए।



