Breaking News : युवराज की मौत सिर्फ हादसा या भूजल माफिया की साज़िश?, सेक्टर-150 में दो–तीन साल से हो रहा भूजल दोहन बना मौत की वजह?, करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने मुख्यमंत्री से की SIT जांच की मांग, “यह बारिश का पानी नहीं, भूजल माफिया का पाप है”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत को लेकर अब मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल अब ज़ोर पकड़ रहा है कि क्या युवराज की मौत की असली वजह बिल्डरों द्वारा वर्षों से किया जा रहा अवैध भूजल दोहन है?
क्या यह हादसा नहीं, बल्कि एक सिस्टम फेल्योर और भूजल माफिया की लापरवाही से उपजा अपराध है?
बेसमेंट खुदाई के बाद छोड़ दिया गया मौत का जाल
बताया जा रहा है कि सेक्टर-150 में जिस अधूरे शॉपिंग मॉल के बेसमेंट में युवराज की जान गई, वहां बिल्डर ने खुदाई के बाद सुरक्षा इंतज़ाम किए बिना जगह को यूं ही छोड़ दिया।
लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि—
यह जलभराव सिर्फ एक बेसमेंट तक सीमित नहीं
करीब 1 से 2 किलोमीटर के इलाके में हमेशा पानी भरा रहता है। यह स्थिति बारिश या बाढ़ के समय नहीं, बल्कि सालों से लगातार बनी हुई है
सवाल बड़ा है: इतना पानी आया कहां से?
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का सवाल सीधा है—
जब इलाके में इतनी बारिश नहीं हुई, न कोई बाढ़ आई, तो फिर इतना विशाल जलभराव आखिर आया कहां से?
इसी सवाल को लेकर करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने अब प्रशासन और सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
मुख्यमंत्री को ज्ञापन, SIT जांच की मांग
इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान आकृष्ट करने के लिए करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासनिक अधिकारी अनुराग सारस्वत को सौंपा।
संगठन का दावा:
सेक्टर 150, 151, 149, 153 और 163 में
कुछ बड़े बिल्डर पिछले 2–3 वर्षों से सैकड़ों बोरवेल के ज़रिए लगातार भूजल दोहन कर रहे हैं
इसका मकसद है निर्माण के दौरान जमीनी जलस्तर को जबरन नीचे रखना
“यह बारिश का पानी नहीं, भूजल माफिया का पाप है”
करप्शन फ्री इंडिया संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय ने तीखे शब्दों में कहा—
“यह घटना साफ दिखाती है कि सिस्टम की लापरवाही, संसाधनों की कमी और जिम्मेदार एजेंसियों की सुस्ती ने मिलकर युवराज मेहता की जान ली।
यह पानी बरसात का नहीं, बल्कि बिल्डरों द्वारा किए जा रहे अनियंत्रित भूजल दोहन का नतीजा है।”
बिल्डरों पर हत्या का मुकदमा?
संगठन के संस्थापक सदस्य आलोक नागर ने और भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—“SIT की जांच केवल कागज़ी न बने। इन बिल्डरों के खिलाफ युवराज मेहता की मौत के लिए आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए।
प्राकृतिक संसाधनों और राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए राष्ट्रद्रोह तक की धाराएं लगनी चाहिएं।”
ग्रीन बेल्ट में तबाही, हजारों पेड़ मरे
भूजल दोहन का असर सिर्फ इंसानी जान तक सीमित नहीं रहा। सेक्टर-150 के गोल चक्कर से मोमनाथल गांव मार्ग, मोहियापुर गांव तक—एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड
ग्रीन बेल्ट क्षेत्र
यहां लगातार जलभराव के कारण हजारों पेड़ सूखकर मर चुके हैं।
यह पर्यावरणीय अपराध खुलेआम जारी है, लेकिन कार्रवाई नदारद।
प्रशासन–भूजल विभाग की मिलीभगत?
करप्शन फ्री इंडिया संगठन का आरोप है कि—
भूजल विभाग
जिला प्रशासन
इनकी मिलीभगत के कारण अवैध भूजल दोहन वर्षों से जारी है। हालांकि जिलाधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में जांच टीम बनाई थी, लेकिन—
“आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”
प्रदर्शन में ये लोग रहे मौजूद
इस दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें— आलोक नागर, बलराज हूण, जिलाध्यक्ष प्रेम प्रधान, रिंकू बैसला, ज्ञानवीर पहलवान, तेजवीर चौहान, धर्मेंद्र भाटी, मोहित कपासिया, भीष्म कुमार, पवन सिंह, अजीत नागर, रिंकू भाटी, कृष्ण कुमार सहित अन्य शामिल रहे।
हादसा नहीं, सिस्टम की हत्या
युवराज मेहता की मौत अब केवल एक दुर्घटना नहीं रही।
यह भूजल माफिया, लापरवाह प्रशासन और आंख मूंदे सिस्टम की संयुक्त विफलता का परिणाम बनती जा रही है।
अब सवाल सिर्फ इतना है—
क्या SIT जांच सच तक पहुंचेगी या युवराज की मौत भी फाइलों में दबा दी जाएगी?



