Greater Noida News : “साकीपुर की चौपाल से उठी हुंकार, शिक्षा, संगठन और सत्ता की भागीदारी—गुर्जर महासभा ने दिया ‘नया विज़न 2026’!”, “शिक्षित बनो, संगठित रहो, शासक बनो—नई विचारधारा का उद्घोष”, “बदलाव की दस्तक, नई रणनीति की शुरुआत”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे । ग्रेटर नोएडा के साकीपुर गांव की ऐतिहासिक चौपाल पर आयोजित अखिल भारतीय गुर्जर महासभा का स्वागत समारोह एक साधारण आयोजन नहीं, बल्कि समाज के भविष्य की दिशा तय करने वाला निर्णायक मंच बनकर उभरा।इस कार्यक्रम ने साफ संकेत दिया कि अब गुर्जर समाज केवल सामाजिक पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, संगठन और राजनीतिक भागीदारी के मजबूत त्रिस्तरीय एजेंडे के साथ आगे बढ़ने की रणनीति तैयार कर चुका है।
“शिक्षित बनो, संगठित रहो, शासक बनो—नई विचारधारा का उद्घोष”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री चौधरी हरिश्चंद्र भाटी ने अपने प्रभावशाली संबोधन में स्पष्ट कहा कि आने वाला समय शिक्षा और नेतृत्व का है।उन्होंने “शिक्षित बनो, संगठित रहो और शासक बनो” का संदेश देते हुए कहा कि बिना शिक्षा के न तो समाज मजबूत हो सकता है और न ही उसकी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित हो सकती है।उन्होंने यह भी बताया कि महासभा अब गांव-गांव जाकर शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने और समाज को संगठित करने का अभियान तेज कर रही है।
“संगठन की ताकत पर जोर—नेताओं ने दिखाई एकजुटता”कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता एवं शिक्षाविद् बृजपाल भाटी ने समाज को एकजुट करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इस अवसर पर कई प्रमुख पदाधिकारियों और नेताओं ने अपने विचार रखे, जिनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश विकल, सविंद्र भाटी, राष्ट्रीय महासचिव रामकेश चपराना, उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष मनवीर नागर, योगाचार्य प्रेम सिंह योगी और वरिष्ठ भाजपा नेता बिजेंद्र भाटी शामिल रहे।सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान समय में समाज के भीतर एकता और जागरूकता सबसे बड़ी जरूरत है।
“आने वाले कार्यक्रमों की बड़ी घोषणा—राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति तैयार”
अपने संबोधन में चौधरी हरिश्चंद्र भाटी ने आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की—9-10 मई: नोएडा में दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठकमई के अंतिम सप्ताह: लखनऊ में विशाल स्वाभिमान रैली31 अक्टूबर 2026: रामलीला मैदान में महा-सम्मेलनउन्होंने बताया कि रामलीला मैदान में प्रस्तावित इस कार्यक्रम में लगभग एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जहां सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।

“राजनीतिक विकल्प की भी चर्चा—बढ़ेगा प्रतिनिधित्व?”कार्यक्रम में यह भी संकेत दिया गया कि भविष्य में समाज की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए नए विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रणनीति प्रभावी रूप से लागू होती है, तो आने वाले समय में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीति में गुर्जर समाज की भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
“चौपाल से राष्ट्रीय मंच तक—बदलाव की शुरुआत”
साकीपुर की चौपाल से उठी यह आवाज अब केवल एक गांव या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का संकेत दे रही है।कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनेश गुर्जर ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र चौधरी ने किया।इस मौके पर श्यामवीर भाटी, दीपक भाटी (चीरसी) सहित कई गणमान्य लोगों ने महासभा की भूमिका और उसके बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला।
“बदलाव की दस्तक, नई रणनीति की शुरुआत”साकीपुर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सभा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है—समाज अब अपने अधिकार, पहचान और हिस्सेदारी के लिए संगठित होकर आगे बढ़ने को तैयार है।शिक्षा, संगठन और राजनीतिक भागीदारी के इस त्रिस्तरीय एजेंडे के साथ गुर्जर समाज अब नई दिशा और नई ताकत के साथ राष्ट्रीय परिदृश्य पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की ओर अग्रसर है।



