शिक्षाग्रेटर नोएडा

Sharda University News : "शारदा विश्वविद्यालय में विधि शिक्षा का अंतरराष्ट्रीय संगम, 9वीं आनंद स्वरूप गुप्ता मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ, देशभर से 100+ प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा"

ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।
शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में विधि शिक्षा की प्रतिष्ठित परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 9वीं आनंद स्वरूप गुप्ता मेमोरियल अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। यह प्रतियोगिता विधि छात्रों के लिए एक ऐसा मंच प्रदान करती है, जहां वे न्यायिक प्रक्रिया की बारीकियों को व्यावहारिक रूप में समझ सकते हैं और अपने कानूनी कौशल को निखार सकते हैं।


देशभर से 32 टीमों की भागीदारी, 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल
इस वर्ष प्रतियोगिता में भारत के कोने-कोने से 32 विधि संस्थानों की टीमें भाग ले रही हैं, जिनमें 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हैं। यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों को न केवल मूट कोर्ट जैसे वास्तविक न्यायालय के अनुभव का अवसर देती है, बल्कि उनके तर्क, विश्लेषण, अनुसंधान एवं वाक् कौशल को भी सशक्त बनाती है।


चार चरणों में होगी प्रतियोगिता, 16 कोर्ट रूम में प्रारंभिक दौर
प्रतियोगिता को चार चरणों में विभाजित किया गया है — प्रारंभिक दौर, क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल। प्रारंभिक दौर के लिए विश्वविद्यालय परिसर में 16 कोर्ट रूम तैयार किए गए हैं, जहां छात्र न्यायाधीशों की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के समक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत कर रहे हैं।


मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति से सजी उद्घाटन समारोह
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में न्याय और विधि जगत के प्रतिष्ठित नामों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक गौरवमयी बना दिया। सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन, राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अमर पाल सिंह, पूर्व विधि सचिव पी.के. मल्होत्रा, पूर्व जिला न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह और शारदा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सिबाराम खारा मंच पर उपस्थित रहे।

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शारदा विश्वविद्यालय में विधि शिक्षा का अंतरराष्ट्रीय संगम

डॉ. ललित भसीन ने कहा – “न्याय हमेशा विधि से बड़ा है”
अपने प्रेरणादायक संबोधन में डॉ. ललित भसीन ने कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिता छात्रों को कानून के गहरे आयामों को समझने का बेहतरीन मंच देती है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “न्याय हमेशा विधि से बड़ा होता है। हमारा संविधान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय को प्राथमिकता देता है।” उनके विचारों ने छात्रों को न्याय की अवधारणा को गहराई से समझने की प्रेरणा दी।


पी.के. मल्होत्रा – “यह मंच भविष्य के विधिवेत्ताओं को दिशा देता है”
पूर्व विधि सचिव पी.के. मल्होत्रा ने कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिता केवल एक शैक्षणिक अभ्यास नहीं, बल्कि भविष्य के विधिवेत्ताओं के लिए एक अभ्यासशाला है, जहां वे संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के गूढ़ पहलुओं को सीखते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं छात्रों को न्यायिक प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव देती हैं।


डॉ. अमर पाल सिंह – “यह प्रतियोगिता शोध और तर्कशक्ति का मंच है”
राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अमर पाल सिंह ने कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिता कानून छात्रों के लिए शोध, विश्लेषण और तर्कशक्ति के व्यावहारिक प्रयोग का आदर्श मंच है। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को विधि शिक्षा में अनिवार्य बताया।

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शारदा विश्वविद्यालय में विधि शिक्षा का अंतरराष्ट्रीय संगम

डॉ. सिबाराम खारा – “कानून ही है सामाजिक परिवर्तन की धुरी”
शारदा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सिबाराम खारा ने कहा कि कानून न केवल समाज का संरक्षक है, बल्कि सामाजिक, व्यावहारिक और तकनीकी परिवर्तनों का भी आधार है। उन्होंने छात्रों को तकनीक और विधि के समन्वय से भविष्य की न्याय व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया।


स्वागत भाषण में डॉ. ऋषिकेश दवे ने कहा – “छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है शारदा”
शारदा स्कूल ऑफ लॉ के डीन प्रोफेसर डॉ. ऋषिकेश दवे ने कहा, “हम गर्वित हैं कि हम इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की मूट कोर्ट प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहे हैं। यह छात्रों के व्यक्तित्व विकास और पेशेवर कौशल निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी।” उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं और आयोजक टीम के प्रयासों की सराहना की।


अन्य गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी से बढ़ा कार्यक्रम का गौरव
कार्यक्रम में प्रोफेसर तारकेश मोलिया, डॉ. अक्सा फातिमा, डॉ. रजिया चौहान सहित विभिन्न विभागों के डीन और एचओडी भी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक प्रतिष्ठित और प्रेरणादायक बना दिया।


निष्कर्ष
यह प्रतियोगिता शारदा विश्वविद्यालय की विधि शिक्षा में उत्कृष्टता की दिशा में एक और मजबूत कदम है। न केवल यह आयोजन छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनाता है, बल्कि उनके अंदर न्याय के प्रति संवेदनशीलता और गहरी समझ भी विकसित करता है।


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