ACE Group News : कमर्शियल मार्केट की चमक के लिए पेड़ों की बलि!, ऐस ग्रुप पर वन विभाग ने ठोका ₹30,000 का जुर्माना, पेड़ों की गहरी छंटाई या जानबूझकर कटाई? वन विभाग ने सौंपी रिपोर्ट
चौधरी प्रवीण भारती ने कहा, "ऐस ग्रुप की यह पहली हरकत नहीं है। पहले भी यह ग्रुप पर्यावरण से छेड़छाड़ करता आया है। अगर ऐसी गतिविधियां नहीं रुकीं तो बड़े आंदोलन की तैयारी की जाएगी।"

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
नोएडा के सेक्टर 151 में स्थित ऐस ग्रुप पर एक बार फिर पर्यावरण से छेड़छाड़ का आरोप लगा है। अपनी कमर्शियल मार्केट की विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए बिल्डर ने सर्विस रोड किनारे लगे तीन अर्जुन के पेड़ों की गहरी छंटाई करवा दी, जिससे उनका अधिकतर हिस्सा कट गया। यह मामला सामने आते ही पर्यावरण प्रेमी प्रवीन भारती ने वन विभाग में इसकी शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर जांच की। जांच में बिल्डर दोषी पाया गया, जिसके बाद ऐस ग्रुप पर ₹30,000 का जुर्माना लगाया गया।
पेड़ों की गहरी छंटाई या जानबूझकर कटाई? वन विभाग ने सौंपी रिपोर्ट
नोएडा में तेजी से हो रहे कंक्रीट के जंगलों के बीच ग्रीन बेल्ट को बचाने की कवायद लगातार चल रही है। लेकिन, ऐस ग्रुप की इस हरकत ने पर्यावरण प्रेमियों को नाराज कर दिया।
✅ पेड़ों की गहरी छंटाई के नाम पर काटा गया बड़ा हिस्सा
✅ वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर की जांच
✅ पुलिस के साथ मिलकर बिल्डर को भेजा गया नोटिस
✅ ₹30,000 का जुर्माना लगाकर दी गई सख्त चेतावनी
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला सिर्फ छंटाई तक सीमित नहीं था, बल्कि पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी चाल थी। इससे उनकी वृद्धि प्रभावित हो सकती है और पेड़ सूख भी सकते हैं।
करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने उठाई आवाज, डीएम को सौंपा ज्ञापन
इस मामले पर करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने भी कड़ी आपत्ति जताई। संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारती ने बताया कि दो महीने पहले ही बिल्डर ने ग्रीन बेल्ट में लगे अर्जुन के पेड़ों की गहरी कटाई करवा दी थी।
पर्यावरण प्रेमियों ने जब इसका विरोध किया, तो संगठन ने जिलाधिकारी मनीष वर्मा को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। डीएम के निर्देश पर वन विभाग ने मौके पर निरीक्षण कर बिल्डर को दोषी पाया और ₹30,000 का जुर्माना ठोक दिया।
चौधरी प्रवीण भारती ने कहा,
“ऐस ग्रुप की यह पहली हरकत नहीं है। पहले भी यह ग्रुप पर्यावरण से छेड़छाड़ करता आया है। अगर ऐसी गतिविधियां नहीं रुकीं तो बड़े आंदोलन की तैयारी की जाएगी।”
पहले भी की जा चुकी है पर्यावरण से छेड़छाड़! ऐस ग्रुप पर पहले भी लगा था जुर्माना
ऐस ग्रुप का यह कोई पहला मामला नहीं है जब उस पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा हो।
⛔ नोएडा और जेवर में अपने प्रोजेक्ट्स के लिए भूजल दोहन का आरोप
⛔ लाखों लीटर पानी निकालकर नाले में बहाने की शिकायत
⛔ भूगर्भ जल विभाग ने की थी जांच, पहले भी लगाया था जुर्माना
वन विभाग के मुताबिक, अगर बिल्डर दोबारा इस तरह की गलती करता है तो भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है नियम? क्यों है यह हरकत गैर-कानूनी?
✔️ पेड़ की कटाई या गहरी छंटाई बिना अनुमति अवैध
✔️ ग्रीन बेल्ट में लगे पेड़ों की सुरक्षा का दायित्व बिल्डर और स्थानीय प्रशासन का
✔️ वन विभाग की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की छंटाई पर सख्त पाबंदी
✔️ पर्यावरण संरक्षण कानून 1986 के तहत दोषियों पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई
वन विभाग का कहना है कि इस जुर्माने के बावजूद अगर बिल्डर फिर से ऐसी हरकत करता है तो उसे क्लीन एनवायरनमेंट एक्ट के तहत और भी सख्त सजा दी जा सकती है।
पेड़ काटने वालों पर होनी चाहिए कड़ी कार्रवाई – पर्यावरण प्रेमी
पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि ₹30,000 का जुर्माना बहुत कम है, इससे कोई सख्त संदेश नहीं जाता। अगर जुर्माना लाखों में होता और कानूनी कार्रवाई होती, तो बिल्डर इस तरह की हरकत करने से डरते।
आप क्या सोचते हैं? क्या ऐसे मामलों में और कड़ी सजा होनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं।
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