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Pfi Challenges Money Laundering Case Against Its Members – पीएफआई ने अपने सदस्यों पर धन शोधन मामले को दी चुनौती

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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा है। याचिका में एजेंसी द्वारा 2018 में दर्ज धन शोधन मामले और उसके बाद की कार्यवाही को चुनौती दी गई है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई मामले की सुनवाई चार फरवरी तय की है।
न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने केंद्रीय एजेंसी को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। पीएफआई के वकील अदित पुजारी ने दावा किया कि ईडी से इस मामले में देश भर से उसके कई सदस्यों को 150 से अधिक समन प्राप्त हुए हैं। अदालत ने कहा, उन्हें उम्मीद है कि बयान दर्ज करते समय ईडी के सीसीटीवी कैमरे चालू रहेंगे।
अधिवक्ता पुजारी ने कहा कि ईडी की वर्तमान जांच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक मामले से शुरू हुई है, जो केरल में युवाओं को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कथित प्रशिक्षण से संबंधित है। एनआईए का मामला है कि अप्रैल 2013 में इस तरह के ट्रेनिंग के दौरान बम, लाठी, ईंट आदि पाए गए थे।
पुजारी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने कुछ व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता, यूएपीए और विस्फोटक अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया, मगर संबंधित उच्च न्यायालय ने अपील में याचिकाकर्ता सहित आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ यूएपीए की धाराओं को हटा दिया।
उन्होंने तर्क दिया कि जब उच्च न्यायालय ने यूएपीए के तहत अपराधों के आरोपियों को बरी कर दिया और यह निष्कर्ष दिया कि कोई राष्ट्र विरोधी गतिविधियां नहीं थीं, तो ईडी के पास याचिकाकर्ता के खिलाफ आगे बढ़ने का कोई कारण नहीं है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईडी पूछताछ के स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं कर रही है। ईडी की ओर से पेश वकील अमित महाजन ने कहा कि एजेंसी शीर्ष अदालत के निर्देशों का अक्षरश: पालन कर रही है।

नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा है। याचिका में एजेंसी द्वारा 2018 में दर्ज धन शोधन मामले और उसके बाद की कार्यवाही को चुनौती दी गई है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई मामले की सुनवाई चार फरवरी तय की है।

न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने केंद्रीय एजेंसी को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। पीएफआई के वकील अदित पुजारी ने दावा किया कि ईडी से इस मामले में देश भर से उसके कई सदस्यों को 150 से अधिक समन प्राप्त हुए हैं। अदालत ने कहा, उन्हें उम्मीद है कि बयान दर्ज करते समय ईडी के सीसीटीवी कैमरे चालू रहेंगे।

अधिवक्ता पुजारी ने कहा कि ईडी की वर्तमान जांच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक मामले से शुरू हुई है, जो केरल में युवाओं को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कथित प्रशिक्षण से संबंधित है। एनआईए का मामला है कि अप्रैल 2013 में इस तरह के ट्रेनिंग के दौरान बम, लाठी, ईंट आदि पाए गए थे।

पुजारी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने कुछ व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता, यूएपीए और विस्फोटक अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया, मगर संबंधित उच्च न्यायालय ने अपील में याचिकाकर्ता सहित आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ यूएपीए की धाराओं को हटा दिया।

उन्होंने तर्क दिया कि जब उच्च न्यायालय ने यूएपीए के तहत अपराधों के आरोपियों को बरी कर दिया और यह निष्कर्ष दिया कि कोई राष्ट्र विरोधी गतिविधियां नहीं थीं, तो ईडी के पास याचिकाकर्ता के खिलाफ आगे बढ़ने का कोई कारण नहीं है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ईडी पूछताछ के स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं कर रही है। ईडी की ओर से पेश वकील अमित महाजन ने कहा कि एजेंसी शीर्ष अदालत के निर्देशों का अक्षरश: पालन कर रही है।

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