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Ghaziabad News : 25 साल बाद फिर सजी यादों की महफ़िल, IET कानपुर के पहले बैच के इंजीनियर्स ने ग़ाज़ियाबाद में मनाया "सिल्वर जुबली" रीयूनियन, दुनिया के कोने-कोने से लौटे सुनहरे दिनों की यादों में, जब दुनियाभर से लौटे ‘IETians’ अमेरिका से लेकर न्यूज़ीलैंड तक की गूँज

ग़ाज़ियाबाद, ग्रेटर नोएडा — रफ़्तार टुडे।
इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) कानपुर के 1996 बैच के छात्र, जो इस संस्थान के पहले ऐतिहासिक बैच से थे, उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी होने के 25 वर्ष पूरे होने पर बीते सप्ताहांत ग़ाज़ियाबाद के इंदिरापुरम हैबिटेट सेंटर में एक भव्य ऐलुमिनी मीट का आयोजन किया। इस सुनहरी शाम में 60 से अधिक पूर्व छात्र-छात्राएं शामिल हुए — कुछ सीधे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो कई ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

जब दुनियाभर से लौटे ‘IETians’: अमेरिका से लेकर न्यूज़ीलैंड तक की गूँज

यह मिलन केवल स्थानीय स्तर का नहीं बल्कि वैश्विक स्वरूप लिए था। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, कनाडा, स्विट्ज़रलैंड, न्यूज़ीलैंड और थाईलैंड से पूर्व छात्र अपनी पुरानी यादों को फिर से जीने पहुंचे। वहीं भारत के बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, कानपुर, लखनऊ, जयपुर, गुरुग्राम, नोएडा और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से भी कई इंजीनियर्स और टेक्नोक्रेट्स ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कॉलेज की पुरानी तस्वीरों और यादगार पलों को देखकर सभी के चेहरे भावनाओं से भर उठे — मानो वक़्त एक बार फिर वही 1996 का दौर बन गया हो।

25 साल की यात्रा: छात्र बने उद्योगपति, वैज्ञानिक और वैश्विक लीडर

बीते 25 वर्षों में इस पहले बैच के छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। कई पूर्व छात्र अब आईटी, सेल्स, शिक्षा, टेलीकॉम, टेक्नोलॉजी, रक्षा, विज्ञान और सरकारी उपक्रमों में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत हैं।
कुछ पूर्व छात्र स्टार्टअप्स और बिज़नेस की दुनिया में अपनी नई पहचान बना चुके हैं।
उनमें से कई ने कार्यक्रम के दौरान साझा किया कि IET कानपुर ने उन्हें न केवल तकनीकी शिक्षा दी, बल्कि जीवन के मूल्यों और नेतृत्व का भी पाठ सिखाया।

एक पूर्व छात्र ने कहा “हमारे लिए यह सिर्फ़ एक कॉलेज नहीं था, बल्कि एक परिवार था जिसने हमें सपने देखने और उन्हें साकार करने की ताकत दी।”

अनुभव, हंसी और पुरानी यादें – हर शब्द में nostalgia

कार्यक्रम के दौरान पूर्व छात्रों ने अपने कॉलेज के दिनों के किस्से साझा किए।
कैंपस की चाय की दुकान, हॉस्टल की शरारतें, इम्तिहान की रातों की पढ़ाई, और प्रोफेसरों के साथ की मज़ेदार नोकझोंक — सब कुछ एक बार फिर मंच पर जिंदा हो उठा।
वहीं, कई साथियों ने भावनाओं से भरी आंखों के साथ अपने शिक्षकों और मित्रों को याद किया, जिन्होंने इस यात्रा को अर्थपूर्ण बनाया।

कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के पुराने गीतों की धुनों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
कुछ पूर्व छात्रों ने “सिल्वर जुबली” की याद में केक काटकर इस विशेष दिन का जश्न मनाया।

ऐलुमिनी नेटवर्क से मजबूत हुआ IET परिवार

मीट के दौरान ऐलुमिनी एसोसिएशन के भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई।
सभी पूर्व छात्रों ने कॉलेज और उसके नए छात्रों के लिए योगदान देने की साझा प्रतिबद्धता जताई।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में “IET ऐलुमिनी नेटवर्क” को शिक्षा, करियर गाइडेंस और इनोवेशन प्रोजेक्ट्स से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।

कार्यक्रम संयोजक दीपक ध्यानी ने कहा “हमारा उद्देश्य सिर्फ़ पुरानी यादों को ताज़ा करना नहीं, बल्कि इस जुड़ाव को समाज और शिक्षा के विकास से जोड़ना है।”

उन्होंने आगे बताया कि आने वाले वर्षों में हर बैच की ऐलुमिनी मीट को एक नियमित परंपरा के रूप में मनाने की योजना है, जिससे IET का परिवार और भी सशक्त बनेगा।

“25 साल बाद, वही दोस्त, वही मुस्कान — बस बालों में सफेदी और दिल में वही जवानी!”

कार्यक्रम में हंसी, भावनाओं और अपनत्व की गर्माहट के बीच सबने महसूस किया कि वक्त चाहे कितना भी बदल जाए, दोस्ती और जुड़ाव का ये रिश्ता कभी पुराना नहीं होता।
कई पूर्व छात्र परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंचे और अपने बच्चों को यह बताते नज़र आए कि कैसे IET ने उनके जीवन को दिशा दी।

बी. प्रसाद, सह-संयोजक ने बताया कि इस आयोजन को सफल बनाने में पूरे देश और विदेश से जुड़े साथियों का योगदान सराहनीय रहा।
उन्होंने कहा “यह सिर्फ़ एक रीयूनियन नहीं था, बल्कि दिलों का पुनर्मिलन था — जहां यादें, हंसी और गर्व, सब एक मंच पर थे।”

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25 साल बाद फिर सजी यादों की महफ़िल, IET कानपुर के पहले बैच के इंजीनियर्स ने ग़ाज़ियाबाद में मनाया “सिल्वर जुबली” रीयूनियन, दुनिया के कोने-कोने से लौटे सुनहरे दिनों की यादों में

एक नई शुरुआत की गूंज

इस सिल्वर जुबली ऐलुमिनी मीट ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि जीवनभर साथ निभाने वाले रिश्तों की आधारशिला भी हैं। IET कानपुर के इस पहले बैच ने दिखा दिया कि चाहे कोई अमेरिका में हो या लखनऊ में — दिल अब भी वहीं धड़कता है जहां उनकी इंजीनियरिंग की पहली क्लास लगी थी।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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