Breaking News : “आसमान छूती इमारतें, पर सुरक्षा ज़मीन पर क्यों?”, ग्रेटर नोएडा में हाई-राइज फायर सेफ्टी पर बड़ा सवाल, ड्रोन रेस्क्यू से हाई-टेक समाधान तक उठी आवाज़, 25 से 40 मंज़िल तक पहुंचने की क्षमता नहीं—सबसे बड़ा खतरा, फायर NOC कागज़ों में पास, जमीनी हकीकत में फेल!, RWA और बिल्डर्स की जिम्मेदारी भी तय करने की मांग

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतम बुद्ध नगर जिले में तेजी से खड़ी हो रही ऊंची-ऊंची इमारतें जहां आधुनिक शहरी विकास की पहचान बन रही हैं, वहीं दूसरी ओर इन हाई-राइज सोसाइटियों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था अब एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। हालिया आगजनी की घटनाओं और लगातार बढ़ते शहरी विस्तार के बीच, सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी पृष्ठभूमि में गौतम बुद्ध नगर विकास समिति ने एक अहम पहल करते हुए अग्निशमन विभाग और जनप्रतिनिधियों के समक्ष ठोस सुझावों और मांगों के साथ विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
सांसद कार्यालय तक पहुंची चिंता, समाधान की उम्मीद
समिति के सदस्यों ने स्थानीय सांसद महेश शर्मा के कार्यालय में पहुंचकर उनके प्रतिनिधि संजय बाली के माध्यम से यह ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में हाई-राइज इमारतों में फायर सेफ्टी के नाम पर हो रही लापरवाही और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर किया गया। सांसद कार्यालय से आश्वासन दिया गया कि इस गंभीर मुद्दे को संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और कमिश्नर के समक्ष प्राथमिकता से उठाया जाएगा।
फायर NOC कागज़ों में पास, जमीनी हकीकत में फेल!
ज्ञापन में सबसे अहम मुद्दा फायर NOC (No Objection Certificate) और उसके वास्तविक अनुपालन के बीच के अंतर को बताया गया। समिति के अनुसार, कई सोसाइटियों में कागजों पर सभी मानक पूरे दिखाए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता में— स्प्रिंकलर सिस्टम काम नहीं करते
फायर अलार्म सिस्टम खराब पड़े हैं
हाइड्रेंट में पानी का दबाव पर्याप्त नहीं
आपातकालीन रास्तों पर अतिक्रमण
यह स्थिति किसी भी बड़े हादसे की आशंका को बढ़ा देती है।
25 से 40 मंज़िल तक पहुंचने की क्षमता नहीं—सबसे बड़ा खतरा
ग्रेटर नोएडा वेस्ट और अन्य क्षेत्रों में 25 से 40 मंजिल तक की इमारतों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन मौजूदा फायर फाइटिंग सिस्टम और उपकरण इतने ऊंचे स्तर तक प्रभावी रूप से काम करने में सक्षम नहीं हैं।
समिति ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि ऊपरी मंजिलों में आग लगती है, तो मौजूदा संसाधनों से लोगों को सुरक्षित निकालना बेहद कठिन हो सकता है।
ड्रोन रेस्क्यू और हाई-टेक समाधान की मांग
परंपरागत फायर सिस्टम की सीमाओं को देखते हुए समिति ने आधुनिक तकनीकों को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है।
ज्ञापन में सुझाव दिया गया कि—
ड्रोन आधारित रेस्क्यू और सर्विलांस सिस्टम लागू किया जाए
आग लगने की स्थिति में ड्रोन के जरिए तत्काल स्थिति का आकलन किया जाए
ऊंची मंजिलों तक राहत पहुंचाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया जाए
यह प्रस्ताव शहर को स्मार्ट सेफ्टी मॉडल की दिशा में ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।
समिति की प्रमुख मांगें—सिस्टम में बड़ा बदलाव जरूरी
समिति ने प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं—
सभी हाई-राइज सोसाइटियों का सरप्राइज निरीक्षण
फायर NOC की पारदर्शी समीक्षा रिपोर्ट
नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई और NOC रद्द
थर्ड-पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में नया फायर स्टेशन
30+ मंजिल तक पहुंचने वाले हाई-रीच उपकरण
ड्रोन आधारित पायलट प्रोजेक्ट
नागरिकों के लिए शिकायत और जागरूकता प्लेटफॉर्म
इन मांगों का उद्देश्य केवल समस्या उठाना नहीं, बल्कि व्यवस्थित समाधान की दिशा में ठोस कदम बढ़ाना है।
RWA और बिल्डर्स की जिम्मेदारी भी तय करने की मांग
समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि सोसाइटियों के RWA और बिल्डर्स की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
इसके लिए सुझाव दिए गए—
हर महीने फायर ड्रिल अनिवार्य हो
उपकरणों का नियमित मेंटेनेंस
फायर एंट्री मार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए
प्रशिक्षित फायर सेफ्टी अधिकारी नियुक्त किए जाएं
“हादसों से पहले चेतना जरूरी”—समिति का स्पष्ट संदेश
समिति की अध्यक्ष रश्मि पाण्डेय ने कहा कि—“यदि हाई-राइज इमारतों के साथ अग्नि सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो भविष्य में बड़े हादसों से इंकार नहीं किया जा सकता।” वहीं सचिव अनूप कुमार सोनी ने जोर देते हुए कहा कि— “सिर्फ कागजी NOC से हजारों परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती, जमीनी स्तर पर सिस्टम का काम करना जरूरी है।”
तेजी से बढ़ते शहर में सुरक्षा भी उतनी ही तेज होनी चाहिए
गौतम बुद्ध नगर आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में शामिल है। लेकिन विकास की इस रफ्तार के साथ सुरक्षा इंतजामों का अपडेट होना भी उतना ही जरूरी है। हाई-राइज बिल्डिंग्स में रहने वाले हजारों परिवारों की सुरक्षा अब केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक प्राथमिकता बन चुकी है।



