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GNIOT College News : इंजीनियर्स डे 2025 जी.एन.आई.ओ.टी. इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में हुआ ज्ञान, तकनीक और रचनात्मकता का संगम, प्रतियोगिताओं, प्रेरणादायक संबोधनों और जोश से भरा रहा भव्य आयोजन

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
हर साल की तरह इस वर्ष भी ग्रेटर नोएडा का प्रतिष्ठित जी.एन.आई.ओ.टी. इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट (GNIOT) नवाचार और तकनीकी उत्साह से सराबोर रहा, जब संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने इंजीनियर्स डे 2025 का भव्य आयोजन किया। यह दिन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि विद्यार्थियों की रचनात्मकता, तकनीकी क्षमता और भविष्य के अभियंत्रण दृष्टिकोण को उजागर करने का मंच साबित हुआ।
इंजीनियर्स डे 2025 का यह आयोजन विद्यार्थियों की प्रतिभा और परिश्रम का प्रमाण है। इसने न सिर्फ युवाओं को प्रेरित किया बल्कि उन्हें यह भी अहसास कराया कि इंजीनियरिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम भी है।

सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस शुभ क्षण ने पूरे हॉल को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। जैसे ही दीपक की ज्योति प्रज्वलित हुई, विद्यार्थियों के चेहरे पर उत्साह और आत्मविश्वास की चमक दिखाई दी।

संस्थान प्रबंधन और मार्गदर्शन

इस अवसर पर संस्थान प्रबंधन—डॉ. राजेश कुमार गुप्ता (चेयरमैन) और श्री गौरव गुप्ता (वाइस चेयरमैन)—के सहयोग और आशीर्वाद के लिए विभाग ने आभार व्यक्त किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. धीरज गुप्ता ने आयोजन को सफल बनाने के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान की।

इंजीनियर्स डे का महत्व

सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए इंजीनियर्स डे का महत्व समझाया और भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया के अद्वितीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “इंजीनियर केवल इमारतें नहीं बनाते, बल्कि समाज की प्रगति की मजबूत नींव रखते हैं।”

प्रबंधन का सहयोग और निदेशक का मार्गदर्शन

सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने आयोजन की सफलता के लिए संस्थान प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। चेयरमैन डॉ. राजेश कुमार गुप्ता और वाइस चेयरमैन श्री गौरव गुप्ता ने इस कार्यक्रम के लिए प्रेरणादायी सहयोग दिया। वहीं, संस्थान निदेशक डॉ. धीरज गुप्ता ने अपने मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का संदेश दिया।

सर एम. विश्वेश्वरैया को किया नम

इस अवसर पर सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया के योगदानों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे विश्वेश्वरैया ने अपने अभियंत्रण कौशल से न केवल आधुनिक भारत की नींव रखी बल्कि समाज के लिए आदर्श प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा – “इंजीनियर सिर्फ पुल और इमारतें नहीं बनाते, वे समाज की प्रगति की मजबूत नींव रखते हैं।”

प्रतियोगिताओं में दिखी रचनात्मकता और नवाचार

इस आयोजन का सबसे आकर्षक पहलू रहा चार प्रमुख तकनीकी और रचनात्मक प्रतियोगिताएं, जिनमें विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

ब्रिज कृ‍ति (Bridge Kriti) – इस प्रतियोगिता में छात्रों ने अद्भुत और रचनात्मक पुल मॉडल प्रस्तुत किए।
टेक्निकल क्विज – Engineer’s IQ Challenge – विद्यार्थियों के तकनीकी ज्ञान और सोचने की क्षमता की परीक्षा ली गई।
टेक्नो रंगोली (Tech Rangoli) – तकनीक और कला का संगम, जहाँ रंगों से इंजीनियरिंग की झलक दिखी।
इंजीनियर्स कैनवास (Paper Painting) – कागज़ पर छात्रों ने अभियंत्रण और समाज का अनोखा रिश्ता उकेरा।

ग्रेटर नोएडा और आसपास के कॉलेजों से आए 50 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विजेताओं का गौरव

ब्रिज कृ‍ति (Bridge Kriti)

प्रथम स्थान – सोनू कुमार, करन कुकरेती, होइबेम (सिविल)

द्वितीय स्थान – सर्जन, मोहम्मद तालिब, अविनाश कुमार (सिविल)

इंजीनियर्स IQ चैलेंज (Technical Quiz)

प्रथम स्थान – सिद्धांत गुप्ता (सिविल)

द्वितीय स्थान – पियूष कुमार (इलेक्ट्रिकल)

इंजीनियर्स कैनवास (Paper Painting)

प्रथम स्थान – पियूष कुमार (इलेक्ट्रिकल)

द्वितीय स्थान – खूफगौलेन (सिविल)

टेक्नो रंगोली (Tech Rangoli)

प्रथम स्थान – आशीष, प्रियंशु, विशाल (मैकेनिकल)

द्वितीय स्थान – मनीष, सत्यम (इलेक्ट्रिकल)

सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

फैकल्टी और छात्र समन्वयकों का विशेष योगदान

कार्यक्रम को सफल बनाने में फैकल्टी सदस्यों—सुश्री तरनप्रीत कौर, सुश्री संधाती मुत्सुद्दी, श्री मुकुल अत्रि, श्री विशाल सिंह, श्री सुषांत कमल और श्री दिव्यांशु देव—का योगदान सराहनीय रहा।

वहीं, छात्र समन्वयकों—पृथ्वी, दिव्यांश, अभिषेक, साबे, आदित्य राज, बिनेश, राजन, रिज़वान और अभिनव—ने पूरी जिम्मेदारी और उत्साह के साथ आयोजन का संचालन किया।

आयोजन का महत्व

यह आयोजन सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि विद्यार्थियों के लिए नवाचार, टीम भावना और तकनीकी प्रतिस्पर्धा का संगम था।
जी.एन.आई.ओ.टी. इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट ने इस कार्यक्रम के जरिए यह साबित कर दिया कि इंजीनियरिंग सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि समाज की प्रगति और भविष्य गढ़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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Raftar Today
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