IEA News : “ई-नीलामी नहीं, समान अवसर चाहिए”, औद्योगिक भूखंड नीति के खिलाफ IEA की हुंकार, होली न मनाने का ऐलान, मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन, ड्रॉ प्रणाली लागू करने की मांग, “ई-नीलामी से छोटे उद्योग हाशिए पर” — संजीव शर्मा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे | 23 फरवरी 2026।
औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में लागू ई-नीलामी (E-Auction) नीति के विरोध में इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA) ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित कर प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां और मांगें रखीं। IEA ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान ई-नीलामी व्यवस्था वास्तविक लघु एवं मध्यम उद्योग संचालकों के हितों के विपरीत है और इससे औद्योगिक विकास प्रभावित हो रहा है।
“ई-नीलामी से छोटे उद्योग हाशिए पर” — संजीव शर्मा
IEA के अध्यक्ष Sanjeev Sharma ने कहा कि ई-नीलामी प्रणाली के कारण वास्तविक उद्योग संचालकों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है। उनका तर्क है कि नीलामी प्रक्रिया में उच्च बोली लगाने वाले निवेशक भूखंड खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें महंगे दामों पर बेचते या किराए पर दे देते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इतने ऊंचे दाम पर भूखंड खरीदकर उद्योग स्थापित करना छोटे उद्यमियों के लिए लगभग असंभव होता जा रहा है। बैंक बिना पर्याप्त कोलेट्रल के ऋण देने से हिचकते हैं, जिससे नए उद्योग शुरू करना और उन्हें टिकाऊ बनाना कठिन हो जाता है।
संजीव शर्मा ने यह भी कहा कि यदि उद्यमी के पास अपनी जमीन होती है तो विपरीत परिस्थितियों में भी वह किराए के बोझ से मुक्त रहकर संघर्ष कर सकता है। लेकिन मौजूदा हालात में भारी किराया और बढ़ती लागत छोटे उद्योगों को बंद होने की कगार पर पहुंचा रही है।
ड्रॉ प्रणाली लागू करने की मांग
IEA ने मांग की कि 2000 वर्गमीटर तक के औद्योगिक भूखंडों का आवंटन ड्रॉ (लॉटरी) प्रणाली के माध्यम से किया जाए, ताकि सभी पात्र उद्योगों को समान अवसर मिल सके।
इसके साथ ही संस्था ने लंबे समय से किराए पर उद्योग संचालित कर रहे उद्यमियों को भूखंड आवंटन में प्राथमिकता देने की मांग रखी। उनका कहना है कि वर्षों से उत्पादन और रोजगार सृजन कर रहे उद्योगों को स्थायी आधार मिलना चाहिए।
पांच वर्षों से जारी विरोध
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि ई-नीलामी नीति लागू होने के समय से ही IEA लगातार इसका विरोध कर रही है। पिछले लगभग पांच वर्षों से विभिन्न मंचों और बैठकों में यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
IEA का कहना है कि यदि समय रहते इस नीति में संशोधन नहीं किया गया तो प्रदेश में औद्योगिक निवेश की गति प्रभावित हो सकती है।
होली नहीं मनाने का सामूहिक निर्णय
सरकार तक अपनी आवाज मजबूत तरीके से पहुंचाने के लिए IEA से जुड़े उद्योगों ने आगामी होली पर्व नहीं मनाने का सामूहिक निर्णय लिया है। संस्था का कहना है कि यह प्रतीकात्मक कदम सरकार का ध्यान उद्योगों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन
IEA प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन में ई-नीलामी नीति समाप्त कर ड्रॉ प्रणाली लागू करने तथा किराए पर संचालित उद्योगों को प्राथमिकता देने की मांग दोहराई जाएगी।
संस्था ने प्रदेश सरकार से औद्योगिक हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
“लंबी लड़ाई के लिए तैयार”
IEA ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर जल्द समाधान नहीं निकाला, तो उद्यमी संगठन के बैनर तले लंबी लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होंगे।
प्रेस वार्ता में अध्यक्ष संजीव शर्मा के साथ पूर्व अध्यक्ष पी.के. तिवारी, उपाध्यक्ष एच.एन. शुक्ला, गुरदीप सिंह तुली, पी.एस. मुखर्जी, विवेक चौहान, एम.पी. शुक्ला और सूर्यकांत तोमर सहित कई उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
औद्योगिक भूखंड आवंटन की नीति को लेकर उठी यह आवाज आने वाले समय में प्रदेश की औद्योगिक नीति पर व्यापक बहस का कारण बन सकती है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह उद्योग जगत की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।



