Trading NewsUPSIDAअथॉरिटीग्रेटर नोएडाटॉप न्यूजताजातरीन

UPSIDA News : 20 दिन में उखड़ी करोड़ों की सड़क!, यूपीसीडा साइट-4 में घटिया निर्माण पर भ्रष्टाचार के आरोप, गुणवत्ता पर उठे सवाल, उच्च स्तरीय जांच की उठी मांग, अधिकारियों को दी गई थी जानकारी, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई, CEO, RM UPSIDA के अधिकारी सौ रहे, समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पहुंचेगा मामला मुख्यमंत्री तक

शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो जनहित में इसकी शिकायत उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा अन्य सक्षम अधिकारियों से भी की जाएगी। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के यूपीसीडा (UPSIDA) साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र में हाल ही में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महज लगभग 20 दिन पहले बनी सड़क कई स्थानों से उखड़ने लगी है, जिससे निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और संभावित भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। मामले को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद से उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

20 दिन में जवाब दे गई सड़क, गुणवत्ता पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, वह निर्माण के कुछ ही दिनों बाद जगह-जगह से टूटने और उखड़ने लगी है। सड़क की ऐसी स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया होता तो इतनी कम अवधि में उसका इस तरह क्षतिग्रस्त होना संभव नहीं था।

अधिकारियों को दी गई थी जानकारी, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सड़क की खराब गुणवत्ता के संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों को मौखिक रूप से अवगत कराया गया। बताया गया कि वरिष्ठ प्रबंधक एन.के. जैन, मैनेजर तथा जूनियर इंजीनियर महेश यादव को भी इस संबंध में जानकारी दी गई थी, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोगों में विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सड़क निर्माण कार्य में बड़े स्तर पर अनियमितता बरती गई है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण सड़क बेहद कम समय में क्षतिग्रस्त हो गई। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र के विकास कार्यों में पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

शिकायतकर्त ऐक्टिव सिटीजन के हरिंद्र भाटी ने यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही सड़क निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ था या नहीं। यदि जांच में अनियमितता और भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदार, अभियंताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है ताकि औद्योगिक क्षेत्रों का बुनियादी ढांचा मजबूत हो सके। लेकिन यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया जाएगा तो सरकारी धन का सीधा नुकसान होगा और इसका खामियाजा उद्योगों तथा आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं विकास योजनाओं की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं।

समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पहुंचेगा मामला मुख्यमंत्री तक

शिकायतकर्ता ऐक्टिव सिटीजन के हरिंद्र भाटी ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो जनहित में इसकी शिकायत उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा अन्य सक्षम अधिकारियों से भी की जाएगी। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

जनता की मांग—दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई

औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सड़क का पुनर्निर्माण उच्च गुणवत्ता के साथ कराया जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि यदि दोषियों के खिलाफ समय पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी विकास कार्यों में इसी प्रकार की अनियमितताएं जारी रहेंगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यूपीसीडा जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में घटिया निर्माण कार्य प्रदेश की औद्योगिक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि इस मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए, दोषियों को दंडित किया जाए और भविष्य में सभी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

s

Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button