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Sharda University News : शारदा विश्वविद्यालय में मार्केटिंग और स्टार्टअप पर अतिथि व्याख्यान, कबीर चौधरी ने छात्रों को दिए इंडस्ट्री फोकस्ड मंत्र, बताया उपभोक्ता मानसिकता का बदलता विज्ञान, भविष्य के प्रबंधकों के लिए सीख, उपभोक्ता का मन पढ़ना ही असली मार्केटिंग


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
नोलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज़ और एलुमनाई एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को एक प्रेरक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र में इंडस्ट्री विशेषज्ञ कबीर चौधरी, जो Growth Master & FranchiseeVoice.com के संस्थापक हैं, ने छात्रों को मार्केटिंग, ब्रांडिंग और उपभोक्ता व्यवहार की बारीकियों पर व्यावहारिक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन प्रदान किया।


उद्देश्य – मार्केटिंग और स्टार्टअप रणनीतियों को वास्तविकता से जोड़ना

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों को संगठनात्मक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ और स्थिरता से जुड़े पहलुओं को समझाना था। साथ ही, मार्केटिंग और स्टार्टअप रणनीतियों को कैसे इंडस्ट्री में व्यवहारिक रूप से लागू किया जाता है, इस पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस आयोजन के ज़रिए विश्वविद्यालय का प्रयास था कि शैक्षणिक ज्ञान और इंडस्ट्री की प्रैक्टिकल जरूरतों के बीच की दूरी को कम किया जा सके।


कबीर चौधरी का मंत्र – “सोच बदलो, मार्केटिंग बदलती है”

मुख्य वक्ता कबीर चौधरी ने अपने व्याख्यान में कहा:

“आज का उपभोक्ता पहले से कहीं अधिक जागरूक है। उसे उत्पाद नहीं, अनुभव चाहिए। कंपनियों को अपने ब्रांड को उपभोक्ता की ज़रूरत और इच्छाओं के अनुसार ढालना होगा।”

उन्होंने बताया कि उपभोक्ताओं की निर्णय लेने की मानसिकता अब रैशनल से ज़्यादा इमोशनल होती जा रही है। ग्राहक केवल प्रोडक्ट नहीं खरीदते, वे कहानी, कनेक्शन और कॉन्फिडेंस खरीदते हैं।
उन्होंने छात्रों को बताया कि कैसे कंपनियां आज सार्थक जुड़ाव कार्यक्रमों के ज़रिए ग्राहकों को लंबे समय तक जोड़े रखने का प्रयास करती हैं।


व्यावहारिक उदाहरणों से सजाया सत्र

कबीर चौधरी ने मार्केटिंग के तमाम पहलुओं पर व्यावहारिक दृष्टिकोण से चर्चा की:

  • नया उत्पाद विकास कैसे होता है
  • विपणन अनुसंधान क्यों ज़रूरी है
  • प्राइसिंग और प्रमोशन में मनोविज्ञान का क्या योगदान है
  • उत्पाद जीवन चक्र (Product Life Cycle) का मार्केटिंग रणनीतियों में क्या महत्व है

उन्होंने सुपरमार्केट शेल्फ प्लेसमेंट जैसे छोटे-छोटे उदाहरणों के ज़रिए यह समझाया कि कैसे ब्रांड हमारे अवचेतन को प्रभावित करते हैं।


छात्र-सत्र – प्रश्न पूछो, अनुभव लो

सत्र के अंत में एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर दौर आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, सेल्फ ब्रांडिंग और कस्टमर साइकोलॉजी से जुड़े कई सवाल पूछे।
कबीर चौधरी ने न केवल सभी सवालों के विस्तृत उत्तर दिए बल्कि छात्रों को अपने अनुभव से जुड़े अनसुने किस्से भी साझा किए, जिससे वातावरण और भी रोमांचक हो गया।


विश्वविद्यालय के वरिष्ठों की उपस्थिति

इस आयोजन के दौरान स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज के डीन डॉ. निखिल कुलश्रेष्ठ, डॉ. शांति नारायणन, डॉ. हरिशंकर श्याम, डॉ. खगेंद्रनाथ गंगई, डॉ. जुनैद आलम समेत अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने अतिथि वक्ता के दृष्टिकोण की सराहना की और इसे छात्रों के लिए शैक्षणिक से ज्यादा व्यावसायिक रूप से उपयोगी बताया।


भविष्य के प्रबंधकों के लिए सीख – उपभोक्ता का मन पढ़ना ही असली मार्केटिंग

इस कार्यक्रम के ज़रिए छात्रों ने जाना कि किताबों से परे जाकर कैसे बाजार की नब्ज पकड़ी जा सकती है। कबीर चौधरी जैसे अनुभवी वक्ता से सीखकर छात्र न केवल करियर की तैयारी कर रहे हैं, बल्कि एक ब्रांड खुद बनना भी सीख रहे हैं।


प्रमुख बिंदु – एक नजर में

  • ✅ अतिथि वक्ता: कबीर चौधरी (Growth Master & FranchiseeVoice.com)
  • ✅ आयोजन: शारदा विश्वविद्यालय स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज़ व एलुमनाई एसोसिएशन
  • ✅ विषय: मार्केटिंग, स्टार्टअप्स, उपभोक्ता व्यवहार
  • ✅ उद्देश्य: शैक्षणिक और इंडस्ट्री के बीच की खाई को पाटना
  • ✅ तकनीकी बिंदु: मार्केटिंग रिसर्च, प्रोडक्ट लाइफ साइकल, कंज्यूमर साइकॉलॉजी

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