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Sharda University Jyoti Sucide Case : शारदा यूनिवर्सिटी सुसाइड केस में ज्योति शर्मा की आत्महत्या से हिला शिक्षा तंत्र, डीन समेत 6 प्रोफेसर निलंबित, BDS विभाग सील, छात्रों में उबाल, जांच में सुसाइड नोट बना अहम सबूत

ग्रेटर नोएडा | Raftar Today स्पेशल रिपोर्ट


21 साल की छात्रा की आत्महत्या से खड़ा हुआ ‘सिस्टम’ पर सवाल, विश्वविद्यालय में उथल-पुथल, छात्रों में आक्रोश, विरोध में उठी न्याय की मांग

ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।
शारदा विश्वविद्यालय की बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) की छात्रा ज्योति शर्मा की आत्महत्या ने पूरे विश्वविद्यालय और शिक्षा तंत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। 21 वर्षीय होनहार छात्रा ने हॉस्टल में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। लेकिन यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि शैक्षणिक तंत्र में मौजूद मानसिक प्रताड़ना और संवेदनहीनता की एक गूंज बन चुकी है।


सुसाइड नोट बना जांच की धुरी, प्रोफेसरों पर गंभीर आरोप

ज्योति द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। इस नोट में उसने स्पष्ट रूप से लिखा कि डेंटल विभाग के कुछ प्रोफेसर उस पर मानसिक दबाव बना रहे थे और उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।

परिवार का दावा है कि कई बार शिकायत के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ज्योति हताश हो गई और उसने ये कदम उठा लिया। ज्योति के पिता रमेश जांगड़ा ने नोएडा के कोतवाली थाने में डीन, एचओडी, एसोसिएट प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसरों के खिलाफ तहरीर दी थी।


डीन समेत कुल 6 प्रोफेसर निलंबित, दो की गिरफ्तारी

इस संवेदनशील मामले में शारदा विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा एक्शन लेते हुए सोमवार को डीन डॉ. एम. सिद्धार्थ, प्रो. डॉ. अनुराग अवस्थी, सहायक प्रो. डॉ. सुरभि, और प्रो. डॉ. आशीष चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

इससे पहले डॉ. शैरी वशिष्ठ और डॉ. महेन्द्र सिंह चौहान को नोएडा पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।


BDS विभाग सील, अकादमिक गतिविधियां स्थगित

विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से BDS विभाग को सील कर दिया है। यह निर्णय पुलिस और आंतरिक जांच समिति की सलाह पर लिया गया है। विभाग में सभी गतिविधियां बंद कर दी गई हैं, और कहा गया है कि जांच पूरी होने के बाद ही इसे दोबारा खोला जाएगा।

विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने जांच पूरी करने के लिए 5 दिन का समय मांगा था। यह अवधि बुधवार को पूरी हो रही है, और सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट तैयार हो चुकी है।


छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का उग्र विरोध प्रदर्शन

घटना के बाद केवल छात्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता, और स्थानीय लोग भी इस मुद्दे पर एकजुट हो गए हैं। सोमवार को कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया गया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

अधिवक्ता प्रमोद शर्मा ने कहा:

“ज्योति के पिता ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, माफी भी मांगी, लेकिन उत्पीड़न नहीं रुका। यह पूरी तरह से संस्थागत विफलता है।”

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जांच में निष्पक्षता नहीं दिखाई गई, तो नॉलेज गेट के बाहर बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।


23 जुलाई से दोबारा शुरू होंगी कक्षाएं और परीक्षाएं

घटना के बाद सोमवार और मंगलवार को सभी शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित कर दी गई थीं। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐलान किया है कि 23 जुलाई से कक्षाएं और परीक्षाएं दोबारा शुरू की जाएंगी। हालांकि, बीडीएस विभाग अभी बंद रहेगा।


ज्योति की आत्महत्या: क्या संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज़ किया जा रहा है?

इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा प्रणाली की उस अंधी गली को उजागर किया है, जहाँ छात्रों की मानसिक पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया जाता। ज्योति जैसी होनहार छात्रा की मौत ने सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • क्या विश्वविद्यालयों में मानसिक उत्पीड़न को गंभीरता से लिया जाता है?
  • क्या छात्रों की शिकायतों पर केवल फॉर्मेलिटी होती है?
  • मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग या सहयोग तंत्र क्यों नहीं है?

फैकल्टी कल्चर पर सवाल: छात्र क्या सिर्फ ‘मार्क्स की मशीन’ हैं?

अक्सर प्रोफेसर और डीन को अकादमिक अनुशासन के नाम पर छात्रों पर अत्यधिक दबाव डालते देखा गया है। छात्रों के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन की परवाह किए बिना दी गई टिप्पणियां, डांट-फटकार और खुलेआम अपमान कई बार घातक सिद्ध होते हैं।

ज्योति का मामला एक चेतावनी है कि संस्थानों को सिर्फ “अंक गणना” और “परफॉर्मेंस स्कोर” से ऊपर उठकर छात्रों की भावनाओं को समझना होगा।


जांच से उम्मीद, दोषियों को मिले सजा

नोएडा पुलिस, विश्वविद्यालय प्रशासन और जांच समिति के समक्ष यह एक संवेदनशील जिम्मेदारी है कि दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दिलाई जाए। जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद ज़रूरी है, ताकि भविष्य में कोई और छात्रा ज्योति की तरह खुद को अकेला और असहाय न समझे।


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🙏 ज्योति शर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर उनके परिवार को इस दुख की घड़ी में शक्ति दे।

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