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UP Panchayat Elections : यूपी पंचायत चुनाव 2026 उम्मीदवारों की जेब पर नई गाइडलाइन!, अब तय हुई नामांकन फीस, जमानत राशि और प्रचार खर्च की सीमा — आयोग ने पुराने आदेश किए निरस्त, खर्च पर नजर रखेगा आयोग, जनता के लिए भी होगी पारदर्शिता, देखिए पूरा चार्ट

ग्रेटर नोएडा/लखनऊ, रफ़्तार टुडे। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियाँ अब तेज़ रफ्तार पकड़ चुकी हैं। इसी क्रम में राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तर प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए नामांकन शुल्क, जमानत राशि और चुनाव प्रचार खर्च की अधिकतम सीमा को नया रूप दिया है। आयोग ने यह आदेश जारी करते हुए पूर्व में लागू सभी पुराने नियमों को रद्द कर दिया है, जिससे अब चुनावी प्रक्रिया में स्पष्टता और पारदर्शिता दोनों बढ़ेगी।

यह आदेश न केवल ग्राम पंचायतों तक सीमित है, बल्कि क्षेत्र पंचायत (ब्लॉक स्तर) और जिला पंचायत (डिस्ट्रिक्ट लेवल) तक के सभी प्रतिनिधि पदों पर लागू होगा। आयोग का उद्देश्य है कि प्रत्येक स्तर पर प्रत्याशी समान रूप से चुनावी प्रतिस्पर्धा कर सकें और अनावश्यक आर्थिक असमानता समाप्त की जा सके।

ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष तक — सबके लिए तय हुई नई फीस और सीमा

राज्य निर्वाचन आयोग के नए आदेश में पदवार शुल्क और व्यय सीमा अलग-अलग रखी गई है। सबसे निचले स्तर — ग्राम पंचायत सदस्य — से लेकर शीर्ष स्तर — जिला पंचायत अध्यक्ष — तक के प्रत्याशियों के लिए नामांकन शुल्क और जमानत राशि में वर्गवार अंतर रखा गया है, ताकि SC, ST, OBC और महिला उम्मीदवारों को रियायत मिल सके।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026: नई नामांकन, जमानत और व्यय सीमा सूची

पद का नाम उम्मीदवार वर्ग नामांकन शुल्क (₹) जमानत राशि (₹) अधिकतम प्रचार व्यय सीमा (₹)

सदस्य ग्राम पंचायत सामान्य 200 800 लागू नहीं
सदस्य ग्राम पंचायत SC/ST/OBC/महिला 100 400 लागू नहीं
प्रधान ग्राम पंचायत सामान्य 600 3,000 1,25,000
प्रधान ग्राम पंचायत SC/ST/OBC/महिला 300 1,500 1,25,000
सदस्य क्षेत्र पंचायत सामान्य 600 3,000 लागू नहीं
सदस्य क्षेत्र पंचायत SC/ST/OBC/महिला 300 1,500 लागू नहीं
सदस्य जिला पंचायत सामान्य 1,000 8,000 2,50,000
सदस्य जिला पंचायत SC/ST/OBC/महिला 500 4,000 2,50,000
प्रमुख क्षेत्र पंचायत सामान्य 2,000 5,000 3,50,000
प्रमुख क्षेत्र पंचायत SC/ST/OBC/महिला 1,000 2,500 3,50,000

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रफ़्तार टुडे का न्यूज़

चुनावी पारदर्शिता बढ़ाने का बड़ा कदम

आयोग ने कहा कि इस बार के पंचायत चुनावों में “ईमानदार चुनावी प्रतिस्पर्धा” सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। इसलिए चुनावी खर्च की सीमा को सख्ती से मॉनिटर किया जाएगा।
हर प्रत्याशी को अपने प्रचार खर्च का विवरण आयोग को निर्धारित समय में देना होगा। यदि कोई प्रत्याशी निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करता पाया गया, तो उसकी उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है या बाद में उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

जमानत राशि लौटाने की शर्तें भी तय

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जमानत राशि केवल उन्हीं उम्मीदवारों को वापस की जाएगी जिन्होंने न्यूनतम मत प्राप्ति की शर्त पूरी की होगी। यदि कोई प्रत्याशी निर्धारित मत प्रतिशत हासिल नहीं कर पाता, तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी। आयोग के अनुसार, “यह नियम चुनाव में गंभीरता और जिम्मेदारी लाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।”

प्रचार खर्च की सीमा: अब नहीं होगा ‘पैसे का खेल’

नए निर्देशों के तहत अब पंचायत स्तर पर चुनावी प्रचार खर्च की अधिकतम सीमा स्पष्ट रूप से तय कर दी गई है।

प्रधान ग्राम पंचायत के उम्मीदवार अब अधिकतम ₹1,25,000 तक खर्च कर सकते हैं।

क्षेत्र पंचायत प्रमुख (ब्लॉक प्रमुख) के लिए यह सीमा ₹3,50,000 तय की गई है।

जिला पंचायत सदस्य अपने प्रचार में अधिकतम ₹2,50,000 तक व्यय कर सकेंगे।

इन सीमाओं से अधिक खर्च की अनुमति नहीं होगी। आयोग ने कहा कि अब चुनावों में “बैनर-बोर्ड और शो-ऑफ” पर अनावश्यक धन खर्च करने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण रहेगा।

पुराने आदेश निरस्त, नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू

राज्य निर्वाचन आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व में जारी सभी संबंधित आदेश अब निरस्त माने जाएंगे।
अब सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को यह निर्देश भेजा गया है कि वे संबंधित ब्लॉक, तहसील और पंचायत स्तर पर इस नए आदेश का पालन सुनिश्चित करें। “सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्याशियों को नए नियमों की जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं, ताकि नामांकन प्रक्रिया में किसी भ्रम की स्थिति न रहे।”

खर्च पर नजर रखेगा आयोग, जनता के लिए भी होगी पारदर्शिता

आयोग ने कहा कि चुनाव के दौरान हर प्रत्याशी के प्रचार खर्च पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए ‘व्यय लेखा पर्यवेक्षक’ नियुक्त किए जाएंगे, जो स्थानीय स्तर पर खर्च का ऑडिट करेंगे।
इसके साथ ही प्रत्याशियों को हर 7 दिन में खर्च का ब्योरा जमा कराना होगा।

यदि कोई प्रत्याशी झूठा या अधूरा विवरण देता है, तो उसके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के तहत कार्रवाई की जाएगी।

जनता के लिए भी होगी पारदर्शिता

आयोग ने बताया कि इस बार प्रत्येक ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर पर “चुनावी सूचना बोर्ड” लगाए जाएंगे, जिन पर उम्मीदवारों की नामांकन स्थिति, जमानत राशि, और प्रचार खर्च सीमा की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। इससे ग्रामीण मतदाता भी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता देख सकेंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग का संदेश

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि “हमारा प्रयास है कि पंचायत चुनावों को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और आर्थिक दृष्टि से संतुलित बनाया जाए।
प्रत्येक वर्ग के प्रत्याशी को समान अवसर मिले, यही लोकतंत्र की असली भावना है।”

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Raftar Today
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