
नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा और सख़्त प्रशासनिक कदम उठाया है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) डॉ. लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया गया है। शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से वेटिंग लिस्ट में डालने का आदेश जारी किया है।
यह कार्रवाई उस घटना के बाद की गई है, जिसने न केवल प्रशासन बल्कि आमजन को भी झकझोर कर रख दिया थ
क्या है पूरा मामला?
दो दिन पूर्व नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एक अधूरे पड़े शॉपिंग मॉल में गंभीर लापरवाही सामने आई थी। मॉल के बेसमेंट में बारिश का पानी भर गया था, जहां युवराज मेहता नामक एक युवक (इंजीनियर) की पानी में डूबकर दर्दनाक मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि बेसमेंट पूरी तरह जलमग्न था
वहां किसी भी तरह की बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत नहीं थे
सुरक्षा मानकों की खुलकर अनदेखी की गई
इस घटना के बाद से ही नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे थे।
शासन की सख़्ती, जवाबदेही तय
घटना के बाद मीडिया, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। लगातार बढ़ते दबाव और लापरवाही के आरोपों के बीच सोमवार शाम उत्तर प्रदेश शासन ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए सीईओ लोकेश एम को पद से हटा दिया।
शासन का यह कदम साफ संकेत देता है कि—
“जनसुरक्षा से जुड़ी लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
प्राधिकरण की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि निर्माणाधीन परियोजनाओं की निगरानी कौन कर रहा है?
खुले बेसमेंट और गड्ढों की समय रहते सुरक्षा क्यों नहीं की गई? जिम्मेदार अधिकारियों ने खतरे को नजरअंदाज क्यों किया?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो एक युवा की जान बचाई जा सकती थी।
आगे क्या?
सूत्रों के मुताबिक—
शासन स्तर पर पूरे मामले की विस्तृत जांच की संभावना है
अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है
निर्माण स्थलों और बेसमेंट सुरक्षा को लेकर नई गाइडलाइंस जारी हो सकती हैं
सेक्टर-150 की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का आईना बनकर सामने आई है।
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को हटाया जाना यह दर्शाता है कि अब जवाबदेही तय होगी और चूक की कीमत चुकानी पड़ेगी।



