Noida Advertisement Hoarding News : ग्रेनो एवं नोएडा में सुरक्षा पर भारी पड़ा विज्ञापन का लालच!, सेक्टर-62 की सड़क पर ‘मौत के खंभे’, “विज्ञापन के नाम पर खतरा”, प्राधिकरण की लापरवाही बनी जनता के लिए खतरा, नागरिकों का गुस्सा – “सीईओ खुद मौके पर जाएं!”, जब ‘विकास’ बन जाए ‘विनाश, खुद रफ़्तार टुडे ने दर्जनों बार उठाया है मुद्दा

नोएडा, रफ़्तार टुडे। जहां एक ओर पूरा उत्तर प्रदेश 1 नवंबर से “सड़क सुरक्षा माह” मनाने जा रहा है, वहीं नोएडा प्राधिकरण का विज्ञापन विभाग अपनी लापरवाही से सड़क सुरक्षा की भावना को ठेंगा दिखा रहा है। नोएडा के सेक्टर-61 से 62 को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर प्राधिकरण द्वारा सड़क चौड़ीकरण का कार्य तो पूरा कर दिया गया, मगर उसी मार्ग पर लगे विज्ञापन के विशाल खंभे (Advertisement Poles) अब सड़क के बीचोंबीच खड़े होकर हादसों का आमंत्रण दे रहे हैं।
विकास की सड़क बनी “खतरे की पटरी”
प्राधिकरण ने दावा किया था कि सेक्टर 61 से 62 की ओर जाने वाली सड़क को चौड़ा कर जाम की समस्या को कम किया जाएगा। लेकिन फॉर्टिस हॉस्पिटल से पहले और आगे की ओर जो विज्ञापन पोल लगे हैं, उन्हें अब तक नहीं हटाया गया। नतीजतन, सड़क के बीच में ये लोहे के खंभे न केवल वाहनों की गति में बाधा डाल रहे हैं, बल्कि लोगों की जानलेवा जोखिम भी बन चुके हैं।
स्थानीय निवासी कहते हैं “प्राधिकरण ने सड़क तो चौड़ी कर दी, लेकिन बीच में छोड़े गए ये विज्ञापन पोल अब मौत के खंभे साबित हो रहे हैं। कोई भी वाहन जरा सी चूक करे तो बड़ा हादसा तय है।”
सड़क सुरक्षा माह की शुरुआत, लेकिन सुरक्षा ‘मज़ाक’ बन गई!
irony यह है कि यूपी सरकार ने नवंबर महीने को सड़क सुरक्षा माह घोषित किया है। प्रशासन जगह-जगह अभियान चला रहा है, लेकिन नोएडा प्राधिकरण खुद ही सुरक्षा के नियम तोड़ रहा है।
ट्रैफिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सड़क के किनारे या बीच में लगे ऐसे पोल रात के समय में कम रोशनी में अदृश्य हो जाते हैं, जिससे दोपहिया चालकों और कार ड्राइवरों को दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है। “ये विज्ञापन खंभे अब सिर्फ विज्ञापन नहीं, बल्कि संभावित मौत का कारण हैं। सड़क सुरक्षा का मतलब सिर्फ हेलमेट पहनना या बेल्ट लगाना नहीं, बल्कि सड़क पर हर अवरोध को हटाना भी है।”सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ, नोएडा।
विभागों के बीच तालमेल की कमी – जनता भुगत रही सज़ा
सूत्रों की मानें तो सिविल विभाग ने सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरा कर लिया है, जबकि विज्ञापन विभाग इन पोलों को शिफ्ट करने में पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। कई बार लिखित शिकायतें और पत्राचार करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय आरडब्ल्यूए सदस्य ने बताया “विज्ञापन विभाग शायद इन पोल्स से होने वाली आय के कारण इन्हें हटाना नहीं चाहता। लेकिन सवाल यह है कि क्या कुछ लाख रुपये की आय नागरिकों की सुरक्षा से ज्यादा कीमती है?”
पुलिस और ट्रैफिक विभाग भी बेबस
मामले की जानकारी ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन तक पहुंच चुकी है। हालांकि, अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लेफ्ट टर्न पर इन पोल्स की वजह से दृश्यता बहुत कम हो जाती है, जिससे टक्कर और एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है।
एक ट्रैफिक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा “हमने रिपोर्ट भेज दी है, लेकिन जब तक विज्ञापन विभाग खुद हटाने की कार्रवाई नहीं करेगा, स्थिति नहीं सुधरेगी। ये खंभे सड़क पर खड़े रहेंगे तो हादसे होना तय हैं।”
नागरिकों का गुस्सा – “सीईओ खुद मौके पर जाएं!”’
सेक्टर-62 के निवासियों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों और समाजसेवी संस्थाओं ने अब सीईओ नोएडा प्राधिकरण से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ये पोल सड़क के बीचोंबीच खड़े हैं और किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय निवासी अमित गुप्ता यह कहते हैं “हमने कई बार ईमेल और पत्र लिखे हैं, लेकिन आज तक न कोई जवाब आया, न कार्रवाई हुई। अगर किसी की जान जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?”
शिकायत में क्या लिखा है
निवासियों द्वारा भेजे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया “मामूरा चौक से सेक्टर-62 अंडरपास तक लेफ्ट साइड पर सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा हो चुका है। लेकिन वहीं विज्ञापन विभाग के 5-6 बड़े पोल सड़क के बीच में आ गए हैं। इतनी बार लिखने और आग्रह करने के बावजूद इन्हें अब तक नहीं हटाया गया। कृपया इन्हें तुरंत शिफ्ट किया जाए ताकि कोई हादसा न हो।”
यह पत्र सीधे सीईओ नोएडा प्राधिकरण को संबोधित किया गया है, जिसमें विज्ञापन विभाग की लापरवाही को गंभीर खतरे के रूप में दर्शाया गया है।
जब ‘विकास’ बन जाए ‘विनाश’
यह पहला मौका नहीं है जब प्राधिकरण के विभागों के बीच तालमेल की कमी उजागर हुई हो। इससे पहले भी नोएडा में कई जगह विज्ञापन बोर्डों के गिरने, खंभों के टूटने और बिजली के पोलों से दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन हर बार कार्रवाई के नाम पर सिर्फ फाइलें घूमती रहती हैं।
सवाल यह है कि क्या विकास के नाम पर ऐसे खतरों को नजरअंदाज करना सही है? जब प्रशासन और प्राधिकरण ही जनता की सुरक्षा के प्रति लापरवाह हो जाए, तो “स्मार्ट सिटी नोएडा” का क्या अर्थ रह जाता है?
आगे क्या?
अब देखना यह है कि क्या प्राधिकरण इस गंभीर मामले पर स्वप्रेरणा से कार्रवाई करता है या फिर हमेशा की तरह किसी हादसे के बाद जांच कमेटी बनाकर जिम्मेदारी टाल देता है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि इन पोल्स को तुरंत हटाया जाए और विज्ञापन विभाग पर जवाबदेही तय की जाए।
सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, ज़िम्मेदारी है!
सड़क सुरक्षा सिर्फ अभियान नहीं, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी है। अगर प्रशासन और उसके विभाग ही लापरवाह होंगे, तो आम जनता के प्रयास बेकार हो जाएंगे। नोएडा प्राधिकरण को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करे, ताकि नोएडा की सड़कों पर “विकास” नहीं, “सुरक्षा” की मिसाल कायम हो।
सड़क चौड़ी हुई… पर खतरा भी बढ़ गया!
नोएडा प्राधिकरण द्वारा सेक्टर-61 से 62 तक की सड़क का चौड़ीकरण कार्य हाल ही में लगभग पूरा कर लिया गया है। लेकिन फॉर्टिस हॉस्पिटल से ठीक पहले और उसके आगे जो बड़े-बड़े विज्ञापन के खंभे लगे हुए हैं, उन्हें हटाया नहीं गया है। परिणामस्वरूप, ये खंभे अब नई बनी सड़क के ठीक बीच में आ गए हैं।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि प्राधिकरण की यह लापरवाही सड़क चौड़ीकरण के उद्देश्य को ही बेकार कर रही है।
“सड़क तो वाइड हो गई, लेकिन बीच में लगे ये खंभे अब मौत के खंभे बन गए हैं,” – ऐसा कहना है सेक्टर 62 के एक आरडब्ल्यूए सदस्य का।
विभागों में तालमेल की कमी या जानबूझकर अनदेखी?
जानकारी के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण का सिविल विभाग सड़क का चौड़ीकरण कर चुका है, जबकि विज्ञापन विभाग इन पोल्स को शिफ्ट करने में रुचि नहीं दिखा रहा। सूत्रों का कहना है कि कई बार पत्राचार और नोटिस देने के बावजूद “कोई कार्रवाई नहीं हुई।”



