Breaking News : “मिट्टी की खुशबू, पहलवानों का जुनून और विदेशी दांव भी पड़े फीके!”, गिरधरपुर के ऐतिहासिक दंगल में भारतीय शेरों ने दिखाया दम, ईरान-रूस के पहलवान भी रह गए हैरान, गिरधरपुर गांव में लगा कुश्ती का महाकुंभ, 20 लाख की इनामी कुश्तियों ने बढ़ाया रोमांच, ढाई लाख की भिड़ंत देखने उमड़ा जनसैलाब

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के गिरधरपुर गांव की धरती रविवार को उस समय जोश, जुनून और जयघोष से गूंज उठी, जब यहां आयोजित हुआ अब तक का सबसे भव्य और ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय विशाल कुश्ती दंगल। मिट्टी के अखाड़े में देशी ताकत और विदेशी दांव-पेंच का ऐसा संग्राम देखने को मिला, जिसने हजारों दर्शकों को रोमांचित कर दिया। गांव की गलियों से लेकर अखाड़े के मैदान तक सिर्फ एक ही चर्चा थी—“आज कौन बनेगा मिट्टी का असली बादशाह?”
करीब 20 लाख रुपये की इनामी कुश्तियों वाले इस भव्य दंगल में भारत, ईरान और रूस सहित कई देशों के पहलवानों ने हिस्सा लिया। लेकिन सबसे ज्यादा तालियां उस समय गूंजीं, जब भारतीय पहलवानों ने विदेशी पहलवानों को चारों खाने चित कर अपनी ताकत और तकनीक का लोहा मनवाया। ग्रामीण परिवेश में आयोजित यह दंगल किसी बड़े स्पोर्ट्स इवेंट से कम नजर नहीं आया।
ढाई लाख की कुश्ती में भारतीय पहलवान जोंटी भाटी ने ईरानी पहलवान को चित कर लूटी वाहवाही
दंगल की सबसे चर्चित और हाई-वोल्टेज कुश्ती ढाई लाख रुपये की रही, जिसमें भारतीय पहलवान जोंटी भाटी का मुकाबला ईरान के ताकतवर पहलवान हामिद से हुआ। दोनों पहलवानों के बीच शुरू से ही जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। दर्शकों की सांसें थम गईं जब कुछ मिनटों तक दोनों एक-दूसरे को पछाड़ने की कोशिश करते रहे। आखिरकार भारतीय मिट्टी के लाल जोंटी भाटी ने ऐसा दांव लगाया कि ईरानी पहलवान सीधे अखाड़े में चित्त हो गया। जीत के साथ ही अखाड़ा “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा।
हरेंद्र पहलवान ने हरियाणा के अंकित को हराकर मचाया धमाल
ढाई लाख रुपये की दूसरी बड़ी कुश्ती में हरेंद्र पहलवान (रंजीत अखाड़ा) ने हरियाणा के चर्चित पहलवान अंकित त्रिपड़ी को शिकस्त देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। मुकाबला काफी देर तक बराबरी का चलता रहा, लेकिन हरेंद्र ने अपने अनुभव और ताकत के दम पर जीत दर्ज की।
विदेशी ताकत और देसी दम का रोमांचक संग्राम
दंगल की तीसरी ढाई लाख की कुश्ती में शेरा गुर्जर पहलवान और ईरान के मिर्ज़ा पहलवान आमने-सामने आए। दोनों पहलवानों ने शानदार दांव-पेंच दिखाए, लेकिन मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। वहीं चौथी बड़ी कुश्ती में कलवा गुर्जर पहलवान और रोहित पहलवान लडपुरा के बीच भी कांटे की टक्कर देखने को मिली और मुकाबला ड्रॉ रहा।
एक लाख रुपये की इनामी कुश्ती में अजय पहलवान (रंजीत अखाड़ा) ने रूस के पहलवान ऑस्कर को हराकर भारतीय ताकत का डंका बजा दिया। इस जीत के बाद दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।

300 मुकाबलों ने बनाया दंगल को ऐतिहासिक
दंगल आयोजक रंजीत पहलवान ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय विशाल कुश्ती दंगल में करीब 300 मुकाबले आयोजित किए गए। सुबह से शुरू हुआ यह दंगल देर शाम तक चलता रहा। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोगों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि गिरधरपुर गांव हमेशा से कुश्ती और अखाड़ा संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस बार का आयोजन अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक रहा।
ग्रामीण खेल संस्कृति को मिला नया मंच
गिरधरपुर गांव का यह दंगल केवल खेल प्रतियोगिता नहीं था, बल्कि यह भारतीय ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और खेल भावना का शानदार उत्सव बन गया। मिट्टी के अखाड़े में पहलवानों का जोश, दर्शकों का उत्साह और देशभक्ति के नारों ने माहौल को पूरी तरह ऊर्जा से भर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे आयोजनों को लगातार बढ़ावा मिले, तो गांवों से निकलने वाले पहलवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।
दंगल बना सोशल मीडिया का सुपरहिट इवेंट
दंगल के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोगों ने खासतौर पर भारतीय पहलवानों की जीत और विदेशी पहलवानों के साथ हुए मुकाबलों को खूब पसंद किया। कई लोगों ने इसे “मिट्टी का असली वर्ल्ड कप” तक बता दिया।
राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की मौजूदगी से बढ़ी शान
दंगल की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे देखने के लिए जिले और प्रदेश की कई बड़ी हस्तियां पहुंचीं। कार्यक्रम में नोएडा सांसद डॉ. महेश शर्मा, दादरी विधायक तेजपाल नागर, विधायक नंद किशोर गुर्जर, जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी, पूर्व विधायक वेदराम भाटी, शालिनी सिंह, जिला पंचायत सदस्य देवा भाटी, जिला उपाध्यक्ष सतेंद्र नागर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। नेताओं और अतिथियों ने पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि भारतीय कुश्ती केवल खेल नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। गांवों में ऐसे दंगल युवाओं को नशे और गलत रास्तों से दूर रखने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।



