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Breaking News : तालाब पर कब्जा, मलबा और मौन व्यवस्था!, दादरी के कूडीखेड़ा में लेखपाल पर संरक्षण देने का आरोप, संपूर्ण समाधान दिवस में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, अवैध कॉलोनियों का जाल, लेखपाल पर संरक्षण का आरोप, 1995 के पट्टे निरस्त, फिर भी कब्जा बरकरार

दादरी / ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। सरकारी अभिलेखों में दर्ज तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा, जल निकासी बाधित, संक्रमण का खतरा और प्रशासनिक उदासीनता—ये कोई आरोप मात्र नहीं, बल्कि ग्राम कूडीखेड़ा के ग्रामीणों की वह पीड़ा है, जिसे लेकर वे आखिरकार संपूर्ण समाधान दिवस के मंच तक पहुंचे।


तहसील दादरी अंतर्गत ग्राम कूडीखेड़ा के ग्रामीणों ने क्षेत्रीय लेखपाल तुषार शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बीते लगभग तीन वर्षों से लेखपाल की मिलीभगत से तालाब की भूमि पर अवैध अतिक्रमण कराया जा रहा है, लेकिन आज तक न तो मलबा हटवाया गया और न ही कब्जेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।

तालाब बना मलबे का ढेर, जल निकासी ठप


ग्रामीणों द्वारा दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया गया कि खसरा संख्या 299 ख, जो कि राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है, वहां पर अवैध कब्जा बना हुआ है। तालाब में मलबा डालकर उसका प्राकृतिक स्वरूप नष्ट कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब के भर जाने से बारिश का पानी गांव में भर जाता है
जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो चुकी है
मच्छरों और संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है
इसके बावजूद संबंधित लेखपाल द्वारा न तो कोई रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई और न ही कब्जा हटवाने के लिए कोई कार्रवाई की गई।


तीन साल से तैनाती, कार्रवाई शून्य


ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लेखपाल तुषार शर्मा पिछले करीब तीन वर्षों से इसी क्षेत्र में तैनात हैं, और इसी अवधि में तालाब की भूमि पर अतिक्रमण को बढ़ावा मिला। ग्रामीणों का कहना है कि— “अगर लेखपाल चाहें तो एक दिन में कब्जा हट सकता है, लेकिन मिलीभगत के चलते सबकुछ आंखों के सामने होते हुए भी अनदेखा किया जा रहा है।”
ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल की भूमिका सिर्फ चुप्पी तक सीमित नहीं, बल्कि अवैध कब्जेदारों को संरक्षण देने तक पहुंच चुकी है।

1995 के पट्टे निरस्त, फिर भी कब्जा बरकरार


शिकायत में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम कूडीखेड़ा में वर्ष 1995 में 16 व्यक्तियों को कृषि भूमि के पट्टे आवंटित किए गए थे, लेकिन बाद में इन पट्टों में भारी अनियमितताएं पाई गईं।
इस पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), गौतमबुद्ध नगर द्वारा सभी पट्टों को निरस्त कर दिया गया।
निरस्तीकरण के आदेश:
राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं
खतौनी में अंकित हैं
प्रशासनिक रिकॉर्ड में स्पष्ट हैं
इसके बावजूद आरोप है कि लेखपाल की मिलीभगत से निरस्त पट्टेदार आज भी सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

जब रिकॉर्ड बोले, लेकिन अमल न हो


ग्रामीणों का कहना है कि जब राजस्व रिकॉर्ड, खतौनी और प्रशासनिक आदेश सब कुछ साफ-साफ कह रहे हैं कि भूमि सरकारी है, तो फिर— कब्जेदारों को हटाया क्यों नहीं गया?
तालाब को मूल स्वरूप में क्यों नहीं लौटाया गया?
मलबा अब तक क्यों नहीं हटवाया गया?
ग्रामीणों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित संरक्षण करार दिया है।

अवैध कॉलोनियों का जाल, लेखपाल पर संरक्षण का आरोप


शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि ग्राम कूडीखेड़ा में अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं, जिनमें—
शासनादेशों की खुलेआम अवहेलना। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र के नियमों की अनदेखी, जिलाधिकारी के निर्देशों की अवमानना
की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि भू-माफिया और कॉलोनाइजरों को लेखपाल का संरक्षण प्राप्त है, इसी कारण अब तक न तो अवैध प्लॉटिंग रोकी गई और न ही कोई बड़ी कार्रवाई हुई।

संपूर्ण समाधान दिवस में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा


लगातार अनदेखी और कार्रवाई न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर उप जिलाधिकारी (न्यायिक) चारुल यादव के समक्ष शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
ग्रामीणों ने मांग की कि—लेखपाल तुषार शर्मा को तत्काल ग्राम कूडीखेड़ा से हटाया जाए
उन्हें अन्य तहसील में स्थानांतरित किया जाए
पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए
मलबा हटवाकर तालाब का पुनर्जीवन किया जाए

प्रशासन हरकत में, जांच के आदेश


मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी (न्यायिक) चारुल यादव ने इसे हल्के में न लेते हुए तहसीलदार दादरी को— “मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने”
के निर्देश दिए हैं।
अब यह देखना अहम होगा कि जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या फिर वास्तव में—कब्जे हटते हैं
दोषियों पर कार्रवाई होती है।
तालाब को उसका अस्तित्व वापस मिलता है।

जनहित का सवाल, प्रशासन की परीक्षा


तालाब जैसी सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि—
पर्यावरण
जनस्वास्थ्य
ग्रामीण जीवन
प्रशासनिक ईमानदारी
से जुड़ा विषय है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगे भी आंदोलन और उच्चाधिकारियों तक शिकायत करने को मजबूर होंगे।

अब निगाहें प्रशासन पर


संपूर्ण समाधान दिवस में उठी यह आवाज अब प्रशासन की नियत और कार्रवाई क्षमता की परीक्षा बन चुकी है।
क्या कूडीखेड़ा का तालाब बचेगा?
क्या लेखपाल पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

जब इस मामले में लेखपाल तुषार शर्मा का 3 baar फोन मिलाया गया तो ओर उनको तीन बार Whastsapp par Reply नहीं किया

रफ़्तार टूडे की न्यूज
Raftar Today
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