अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 13 Dec 2021 05:36 AM IST
सार
सब के राम पुस्तक विमोचन समारोह में अरुण कुमार ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन किसी प्रतिक्रिया के कारण नहीं बल्कि हिंदुओं की प्रतिबद्धता के कारण हुआ। सुरेंद्र जैन ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन से हमें धार्मिक और सांस्कृतिक आजादी मिली।
राम मंदिर का आंदोलन किसी प्रतिक्रिया के कारण नहीं हुआ बल्कि हिंदुओं की प्रतिबद्धता के कारण हुआ। हमारा सपना है समरस समाज। हमारी सहिष्णुता हमारी कायरता के कारण नहीं अपितु हमारे पुरुषार्थ, वीरता के कारण है। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार नें कहीं। मौका था दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित सब के राम पुस्तक के विमोचन का। देश व्यापी श्रीराम जन्मभूमि निधि समर्पण अभियान के अनुभव कथनों को इस पुस्तक में समाहित किया गया है।
इस मौके पर सह-सरकार्यवाह ने यह भी कहा कि निधि समर्पण का अभियान अभूतपूर्व था। देश भर के अभियान कर्ताओं के अनुभव बहुत ही प्रेरणा दायक रहा जिनका संकलन सबके राम पुस्तक है। जो लोग कहते रहे है कि हिंदुत्व का भाव खत्म हो रहा है उनके लिए निधि समर्पण का ज्वार उत्तर हैं। श्री राम जन्मभूमि का आंदोलन हिंदू समाज का आत्म साक्षात्कार है। वह अपनी ताकत जान चुका है। श्री राम जन्मभूमि मुक्ति के आंदोलनों से हिन्दू समाज जागा, न्यायालय पर हमेशा विश्वास रखने वाले हिंदू को उनके श्रद्धा केंद्र मिल गया।
पुस्तक विमोचन समारोह के मौके पर विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने कहा कि श्री राम मंदिर निर्माण प्रारंभ होते ही भारत का नवोत्थान प्रारंभ हो गया। राममंदिर से रामराज्य की यात्रा प्रारंभ हो गई। मंदिर निर्माण पूरा होते ही भारत का भाग्योदय प्रारंभ होगा। भारत विश्व गुरु बनेगा। वर्तमान सहस्राब्दी राम की सहस्राब्दी बनेगी।1947 में हमें राजनीतिक आजादी मिली थी। राममंदिर आंदोलन से हमें धार्मिक और सांस्कृतिक आजादी मिली। इस आन्दोलन में 13 करोड़ रामभक्तों की सहभागिता रही। यह आजादी के आंदोलन से भी बड़ा आंदोलन बन गया।
निधि समर्पण अभियान सम्पूर्ण भारत को जोड़ने वाला एक सेतु बन गया। इससे सिद्ध हो गया कि देश को केवल राम ही जोड़ सकते हैं। सेक्युलर राजनीति ने देश और समाज को तोड़ा है। कार्यक्रम में विहिप दिल्ली के अध्यक्ष कपिल खन्ना, राष्ट्रीय प्रवक्ता व केंद्रीय प्रचार प्रसार प्रमुख विजय शंकर तिवारी, प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता, पुस्तक के सह-लेखक राजीव गुप्ता व प्रकाशक प्रभात कुमार सहित अनेक संगठनों के पदाधिकारी व रामभक्त उपस्थित थे।
विस्तार
राम मंदिर का आंदोलन किसी प्रतिक्रिया के कारण नहीं हुआ बल्कि हिंदुओं की प्रतिबद्धता के कारण हुआ। हमारा सपना है समरस समाज। हमारी सहिष्णुता हमारी कायरता के कारण नहीं अपितु हमारे पुरुषार्थ, वीरता के कारण है। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार नें कहीं। मौका था दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित सब के राम पुस्तक के विमोचन का। देश व्यापी श्रीराम जन्मभूमि निधि समर्पण अभियान के अनुभव कथनों को इस पुस्तक में समाहित किया गया है।
इस मौके पर सह-सरकार्यवाह ने यह भी कहा कि निधि समर्पण का अभियान अभूतपूर्व था। देश भर के अभियान कर्ताओं के अनुभव बहुत ही प्रेरणा दायक रहा जिनका संकलन सबके राम पुस्तक है। जो लोग कहते रहे है कि हिंदुत्व का भाव खत्म हो रहा है उनके लिए निधि समर्पण का ज्वार उत्तर हैं। श्री राम जन्मभूमि का आंदोलन हिंदू समाज का आत्म साक्षात्कार है। वह अपनी ताकत जान चुका है। श्री राम जन्मभूमि मुक्ति के आंदोलनों से हिन्दू समाज जागा, न्यायालय पर हमेशा विश्वास रखने वाले हिंदू को उनके श्रद्धा केंद्र मिल गया।
पुस्तक विमोचन समारोह के मौके पर विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने कहा कि श्री राम मंदिर निर्माण प्रारंभ होते ही भारत का नवोत्थान प्रारंभ हो गया। राममंदिर से रामराज्य की यात्रा प्रारंभ हो गई। मंदिर निर्माण पूरा होते ही भारत का भाग्योदय प्रारंभ होगा। भारत विश्व गुरु बनेगा। वर्तमान सहस्राब्दी राम की सहस्राब्दी बनेगी।1947 में हमें राजनीतिक आजादी मिली थी। राममंदिर आंदोलन से हमें धार्मिक और सांस्कृतिक आजादी मिली। इस आन्दोलन में 13 करोड़ रामभक्तों की सहभागिता रही। यह आजादी के आंदोलन से भी बड़ा आंदोलन बन गया।
निधि समर्पण अभियान सम्पूर्ण भारत को जोड़ने वाला एक सेतु बन गया। इससे सिद्ध हो गया कि देश को केवल राम ही जोड़ सकते हैं। सेक्युलर राजनीति ने देश और समाज को तोड़ा है। कार्यक्रम में विहिप दिल्ली के अध्यक्ष कपिल खन्ना, राष्ट्रीय प्रवक्ता व केंद्रीय प्रचार प्रसार प्रमुख विजय शंकर तिवारी, प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता, पुस्तक के सह-लेखक राजीव गुप्ता व प्रकाशक प्रभात कुमार सहित अनेक संगठनों के पदाधिकारी व रामभक्त उपस्थित थे।
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