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Yatharth Hospital News : 30 की उम्र से पहले ही बढ़ रहा “साइलेंट किलर” का खतरा!, मोबाइल, तनाव और बिगड़ी लाइफस्टाइल ने युवाओं की धड़कनों पर बढ़ाया दबाव, हाई ब्लड प्रेशर बना नई हेल्थ महामारी, हर तीन में से एक भारतीय हाई बीपी का शिकार

स्क्रीन टाइम और मानसिक तनाव बना बड़ा कारण, युवा अभी नहीं संभले तो भविष्य होगा गंभीर

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। कभी बढ़ती उम्र की बीमारी माने जाने वाला हाई ब्लड प्रेशर अब युवाओं की जिंदगी में तेजी से दस्तक दे रहा है। जो बीमारी पहले 50 या 60 वर्ष की उम्र के बाद देखने को मिलती थी, वही अब 25 से 30 साल के युवाओं में आम होती जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि देर रात तक मोबाइल चलाना, घंटों लैपटॉप के सामने बैठना, फास्ट फूड, बढ़ता मानसिक तनाव और कम होती शारीरिक गतिविधियां युवाओं को धीरे-धीरे उस बीमारी की ओर धकेल रही हैं, जिसे मेडिकल भाषा में “हाइपरटेंशन” और आम भाषा में “हाई बीपी” कहा जाता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती रहती है, इसलिए इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है।

बदलती लाइफस्टाइल ने युवाओं की सेहत को डाला खतरे में
भारत में तेजी से बदलती जीवनशैली ने युवाओं की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। सुबह की सैर और खेलकूद की जगह अब मोबाइल स्क्रीन और लैपटॉप ने ले ली है। देर रात तक जागना, नींद पूरी न होना, बाहर का तला-भुना खाना और लगातार मानसिक दबाव युवाओं के शरीर पर गंभीर असर डाल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार यही कारण है कि अब 30–45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में हाई ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले जहां लोग उम्र बढ़ने पर ब्लड प्रेशर की जांच कराते थे, वहीं अब युवा वर्ग को भी नियमित जांच की आवश्यकता पड़ रही है। खासतौर पर आईटी सेक्टर, कॉर्पोरेट जॉब्स और नाइट शिफ्ट में काम करने वाले युवाओं में यह समस्या अधिक देखी जा रही है।

हर तीन में से एक भारतीय हाई बीपी का शिकार
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार भारत में पुरुषों में लगभग 24 प्रतिशत और महिलाओं में 21.3 प्रतिशत लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं। वहीं ICMR से जुड़े अध्ययनों के मुताबिक देश में हाई ब्लड प्रेशर की व्यापकता 35.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि हर तीन में से एक भारतीय इस समस्या से जूझ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया भर में लगभग 1.4 अरब लोग हाइपरटेंशन से प्रभावित हैं। भारत में स्थिति इसलिए अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों को यह तक पता नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक है। कई लोग तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है।

“साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है हाई ब्लड प्रेशर को
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के सीनियर कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कृष्ण यादव के अनुसार पिछले 5–10 वर्षों में युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि अस्पताल की कार्डियोलॉजी ओपीडी में आने वाले लगभग 30 प्रतिशत मरीज हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित पाए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या 30–45 वर्ष आयु वर्ग की है।
डॉ. यादव कहते हैं कि—“हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में मरीज को अक्सर कोई लक्षण महसूस नहीं होते। लेकिन अंदर ही अंदर यह हार्ट, किडनी और ब्रेन को नुकसान पहुंचाता रहता है।”
उन्होंने बताया कि कई मामलों में मरीजों को पहली बार तब पता चलता है जब उन्हें हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट फेलियर या किडनी फेलियर जैसी गंभीर समस्याएं हो जाती हैं।

स्क्रीन टाइम और मानसिक तनाव बना बड़ा कारण
डॉक्टरों के अनुसार आज का युवा औसतन 8 से 10 घंटे मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बिताता है। लगातार बैठे रहने की आदत शरीर की गतिविधि को कम कर देती है। इसके साथ ही सोशल मीडिया का दबाव, करियर की चिंता, प्रतियोगिता और आर्थिक तनाव भी मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम संस्कृति ने भी लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है। कई लोग देर रात तक काम करते हैं, पर्याप्त नींद नहीं लेते और फिजिकल एक्टिविटी लगभग शून्य हो गई है। यह सभी कारण हाई ब्लड प्रेशर के बड़े ट्रिगर बनकर सामने आए हैं।

युवा अभी नहीं संभले तो भविष्य होगा गंभीर
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के सीओओ डॉ. अनिल कुमार कुमाऊनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि युवा अभी से अपनी जीवनशैली नहीं बदलते, तो आने वाले वर्षों में भारत में हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के मामलों में भारी वृद्धि देखने को मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि आज का युवा फिट दिखना चाहता है, लेकिन वास्तविक फिटनेस केवल शरीर की बाहरी बनावट नहीं बल्कि अंदरूनी स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। नियमित जांच और संतुलित जीवनशैली बेहद जरूरी है।

कैसे बचें इस “साइलेंट किलर” से?
विशेषज्ञों ने युवाओं को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है— 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित ब्लड प्रेशर जांच
प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम
7–8 घंटे की पर्याप्त नींद
नमक और जंक फूड का सीमित सेवन
तनाव प्रबंधन और मेडिटेशन
स्क्रीन टाइम में कमी
धूम्रपान और शराब से दूरी डॉक्टरों का मानना है कि यदि समय रहते लोग अपनी जीवनशैली सुधार लें, तो हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है।

युवाओं के लिए चेतावनी भी, जागरूकता का मौका भी
भारत दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है, लेकिन यदि युवाओं की सेहत इसी तरह प्रभावित होती रही तो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा दबाव पड़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह नई पीढ़ी के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, संतुलित खानपान और एक्टिव लाइफस्टाइल ही इस “साइलेंट किलर” के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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