
नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा स्टेडियम में आयोजित 15वें उत्तराखंड महाकौथिग 2025 का पांचवां दिन उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक परिधानों और लोकसंगीत के रंगों से पूरी तरह सराबोर नजर आया। सुबह से लेकर देर शाम तक चले कार्यक्रमों में प्रवासी उत्तराखंडियों के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा स्टेडियम मिनी उत्तराखंड में तब्दील हो गया।
सुबह का सत्र: उत्तराखंडी परिधान युगल प्रतियोगिता बना आकर्षण
महाकौथिग के पांचवें दिन का सुबह का सत्र उत्तराखंडी परिधान युगल प्रतियोगिता के नाम रहा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों ने उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, रीति-रिवाज और क्षेत्रीय पहचान को मंच पर जीवंत कर दिया।
सुबह के सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि सतीश पाल (IAS), अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, नोएडा प्राधिकरण द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
मुख्य अतिथि सतीश पाल ने महाकौथिग के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि “महाकौथिग एक ऐसा मंच है, जहाँ उत्तराखंड के अनाज, परिधान, खानपान और संस्कृति को एक ही स्थान पर संगठित रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह न केवल प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी जड़ों से जोड़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराता है।”
प्रतियोगिता में जौनसार की जोड़ी ने मारी बाज़ी
राष्ट्रगान के बाद उत्तराखंडी परिधान युगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की जोड़ियों ने पारंपरिक परिधानों में शानदार प्रस्तुति दी।
प्रतियोगिता में जौनसार-बावर क्षेत्र की पूनम तोमर और पूजा चौहान ने प्रथम स्थान प्राप्त कर दर्शकों और निर्णायकों का दिल जीत लिया। उनकी वेशभूषा, आत्मविश्वास और प्रस्तुति ने उत्तराखंड की लोकसंस्कृति की सजीव झलक पेश की।
वहीं हेमा रावत और माहिरा रावत को दूसरा स्थान तथा सुमन देवी और भव्यांशु को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।

अनुभवी जजों ने किया मूल्यांकन
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना चौहान, उत्तराखंडी फिल्म अभिनेता राकेश गौड़ और शिक्षिका हेमा घुघतियाल शामिल रहीं। जजों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुति, परिधान की प्रामाणिकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के आधार पर परिणाम घोषित किए।
डेढ़ सौ से अधिक कलाकार कर रहे सहभागिता
सात दिवसीय उत्तराखंड महाकौथिग मेले में इस वर्ष 150 से अधिक कलाकार अपनी कला और संस्कृति का प्रदर्शन कर रहे हैं। लोकनृत्य, लोकगीत, नाटक, फैशन शो और प्रतियोगिताओं के माध्यम से महाकौथिग उत्तराखंड की सांस्कृतिक विविधता का भव्य मंच बनकर उभरा है।
शाम का सत्र: लोकगीतों पर झूम उठा जनसैलाब
महाकौथिग के पांचवें दिन का शाम का सत्र लोकसंगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के नाम रहा। शाम के सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि पटपड़गंज विधायक रवि नेगी और विशिष्ट अतिथि डीपीएमआई के अध्यक्ष विनोद बछेती द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
शाम की शुरुआत लोक गायक अजय दीवान की जोड़ी द्वारा प्रस्तुत गीत
“हम पहाड़ का पंछी छू का का उड़ू लो…”
से हुई, जिसने दर्शकों को भावनाओं से जोड़ दिया।
इसके बाद लोक गायक मंगलेश डंगवाल ने पारंपरिक जागर गीत से माहौल को भक्तिमय बनाया और फिर अपना सुपरहिट गीत “सिल्की बाँद” गाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
लोक गायिका आशा नेगी ने भी एक से बढ़कर एक सुंदर लोकगीत प्रस्तुत कर सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।

क्रिकेटर पवन सुयाल का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी पवन सुयाल का महाकौथिग के मंच पर पारंपरिक पहाड़ी उत्पाद भेंट कर स्वागत किया गया। यह क्षण दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
विशिष्ट अतिथियों की रही मौजूदगी
इस अवसर पर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी भी बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में महाकौथिग के मुख्य संयोजक राजेन्द्र चौहान, संस्थापक कल्पना चौहान, चेयरमैन आदित्य घिल्डियाल, अध्यक्ष हरीश असवाल, संयोजिका इंद्रा चौधरी, मीडिया प्रभारी रजनी ढौंडियाल जोशी, सतेंद्र नेगी, नीरज रावत सहित पूरी महाकौथिग टीम मौजूद रही।
संस्कृति और एकता का संदेश
पांचवें दिन का आयोजन यह संदेश देने में सफल रहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और लोककला न केवल जीवित है, बल्कि नई पीढ़ी के माध्यम से और अधिक सशक्त रूप में आगे बढ़ रही है। उत्तराखंड महाकौथिग 2025 प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी मिट्टी से जुड़ने का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मंच बनता जा रहा है।



