Noida FONRWA News : “नलों से निकल रहा संकट, गलियों में बह रहा खतरा” — फोनरवा का बड़ा अलार्म, दूषित पानी और जर्जर सीवर से जूझ रहा नोएडा, प्राधिकरण से त्वरित कार्रवाई की मांग

नोएडा, रफ़्तार टूडे । नोएडा शहर एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं की गंभीर चुनौतियों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (फोनरवा) ने इस बार सीधे नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कृष्णा करुणेश (IAS) को पत्र लिखकर शहर में बिगड़ती पेयजल व्यवस्था और जर्जर सीवर सिस्टम को लेकर कड़ी चिंता जताई है। फोनरवा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या स्वास्थ्य आपदा का रूप ले सकती है।
फोनरवा के अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा ने कहा कि संगठन पिछले कई वर्षों से लगातार शहरवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग करता आ रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सेक्टरों में आज भी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जो न केवल उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है बल्कि गंभीर बीमारियों को भी न्योता दे रहा है।
महासचिव के.के. जैन ने स्थिति की गंभीरता को विस्तार से बताते हुए कहा कि नोएडा के कई सेक्टरों में पानी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर पानी में बदबू, गंदलापन और अशुद्धियों की शिकायतें आम हो गई हैं। यह स्थिति विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
फोनरवा ने अपने पत्र में खासतौर पर पुराने सेक्टरों की स्थिति पर फोकस किया है। संगठन का कहना है कि इन क्षेत्रों में सीवर लाइनें वर्षों पुरानी हो चुकी हैं और कई जगहों पर वे पूरी तरह जर्जर अवस्था में हैं। लगातार हो रहे लीकेज के कारण न केवल सड़कों और गलियों में गंदा पानी फैल रहा है, बल्कि इससे पेयजल सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।
संगठन के अनुसार, कई इलाकों में सीवर का पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल जाने की आशंका बनी रहती है, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इससे डायरिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के फैलने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। फोनरवा ने इसे “धीमी गति से फैलती स्वास्थ्य आपदा” करार दिया है।
फोनरवा ने नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि जिन क्षेत्रों में बार-बार सीवर लीकेज की समस्या सामने आ रही है, वहां पुरानी लाइनों को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए। इसके साथ ही, जल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग और पानी की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को सुरक्षित पेयजल मिल सके।
संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि प्राधिकरण को एक दीर्घकालिक कार्ययोजना बनानी चाहिए, जिसमें सीवर और जल आपूर्ति नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही, शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक सक्रिय और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है, ताकि लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों में शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अभी तक नहीं हुआ है। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि हर बार अस्थायी मरम्मत कर दी जाती है, जिससे समस्या कुछ समय बाद फिर से उभर आती है।
शहर के नागरिकों ने भी अब इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि साफ पानी और बेहतर सीवर व्यवस्था कोई सुविधा नहीं, बल्कि उनका मूल अधिकार है। अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
फोनरवा की यह पहल एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि तेजी से विकसित हो रहे नोएडा में बुनियादी ढांचे की मजबूती उतनी ही जरूरी है, जितनी नई परियोजनाओं की शुरुआत। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नोएडा प्राधिकरण इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ कार्रवाई करता है।



