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Breaking News : इस सोसाइटी में AOA की तानाशाही या प्रशासन की नाकामी?, सोसायटी में महिला उत्पीड़न, पर्यावरण विरोध और ‘गुंडागर्दी’ से दहशत का माहौल, पुलिस चुप, पीड़ित चीख रहे, “मैं सिंगल मदर हूं, डरूंगी नहीं” — अलकनंदा की बहादुरी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे ब्यूरो।


Exotica Dreamville: सपनों के घर में डर की दीवारें, AOA पर गंभीर आरोपों की बौछार

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रतिष्ठित हाउसिंग सोसायटी Exotica Dreamville में हाल के महीनों में जो घटनाएं सामने आई हैं, उन्होंने न केवल सोसायटी की साख पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पूरे नोएडा वेस्ट की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर दिया है।


मई 2025 से शुरू हुआ बवाल, अब हिंसा और धमकी का बोलबाला

निवासियों के मुताबिक, विवाद की शुरुआत मई 2025 में तब हुई जब AOA (Apartment Owners Association) से जुड़े कुछ लोगों ने लगभग 200 लोगों के साथ मिलकर एक किराएदार परिवार पर हमला किया। परिवार इतना भयभीत हुआ कि उन्हें रातों-रात सोसायटी छोड़नी पड़ी। इसके बाद एक-एक कर कई किराएदार पलायन कर गए।

स्थायी निवासी जो अपनी संपत्ति छोड़ नहीं सकते, अब “खौफ के साए” में जीने को मजबूर हैं।


AOA पर आरोप: गुंडागर्दी, महिला उत्पीड़न, पर्यावरण और धार्मिक भावनाओं का अपमान

AOA के उपाध्यक्ष सुजीत सिंह और उनके साथियों अमित शर्मा, निर्भया सिंह, और राजेश सिंह पर गंभीर आरोप हैं। निवासियों का कहना है कि इन लोगों द्वारा:

  • वृक्षारोपण का विरोध किया गया
  • महिलाओं के साथ गाली-गलौज और शारीरिक हिंसा की गई
  • पूजा स्थल में अतिक्रमण कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई
  • सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर अवैध घुसपैठ की
  • जानवरों के साथ क्रूरता बरती गई

“मैं सिंगल मदर हूं, डरूंगी नहीं” — अलकनंदा की बहादुरी

टावर 15 की निवासी अलकनंदा ने खुलकर AOA की तानाशाही का विरोध किया है। उन्होंने कहा:

“मैं एक अकेली मां हूं, लेकिन उनके डर से झुकूंगी नहीं। इन लोगों ने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। ये लोग खुद को कानून से ऊपर मानते हैं और कहते हैं — ‘पुलिस भी हमारी जेब में है।’”

उनका आरोप है कि पूर्व में किर्ति नाम की एक महिला के घर का दरवाजा तोड़कर उनके साथ हिंसात्मक व्यवहार किया गया, जिसके बाद वह महिला सोसायटी छोड़ गई।


बुजुर्ग पर पत्थर, महिलाओं पर अभद्र भाषा — ‘शांति’ के नाम पर हिंसा

एक ताजा घटना 26 जुलाई को हुई जिसमें AOA से जुड़े लोगों ने एक बुजुर्ग महिला पर पत्थर फेंका। इसके साथ ही एक अन्य महिला से गंदी भाषा में बात की गई। यह व्यवहार न केवल न्याय प्रणाली, बल्कि सामाजिक मर्यादाओं के लिए भी एक खतरे की घंटी है।


वृक्षारोपण रोकना या तोड़ना – क्या ये पर्यावरण विरोध नहीं?

अलकनंदा ने बताया कि वह जब कार्यवश विदेश में थीं, तो AOA ने उस स्थान पर जबरन कब्जा किया जहां महिलाएं पूजा के लिए फूल इकट्ठा करती थीं और वृक्ष लगाए गए थे। यह हरकत:

  • पर्यावरण के खिलाफ
  • धार्मिक परंपरा के खिलाफ
  • सामुदायिक भावना के खिलाफ है

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “हरित भारत” मिशन की भी सीधी अवहेलना है।


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व्हाट्सएप चैट

“पुलिस भी हमारी जेब में है” — खुलेआम धमकियां, प्रशासन मौन

जब पीड़ितों ने थाना बिसरख और स्थानीय प्रशासन से बार-बार शिकायत की, कोई कार्यवाही नहीं हुई। अलकनंदा ने आरोप लगाया कि AOA सदस्य खुलेआम कहते हैं:

“जो करना है कर लो, पुलिस भी हमारी जेब में है।”

उनकी शिकायतों के बावजूद कोई FIR नहीं लिखी गई और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।


सोसायटी ग्रुप्स में खुले धमकी भरे मैसेज — “200 लोगों से भगाया था, अब तुझे भी…”

AOA के सदस्यों द्वारा सोसायटी के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में धमकी भरे मैसेज भेजे गए। इनमें स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि वे अलकनंदा को भी वैसे ही “शांत” करेंगे जैसे उस किराएदार परिवार को भगाया गया था।


प्रशासन और समाज — दोनों से सवाल

क्या ये मान लिया जाए कि हाईराइज सोसायटीज़ में लोकतंत्र, महिला अधिकार, धार्मिक सहिष्णुता और पर्यावरण सुरक्षा अब केवल कागज़ी बातें बन गई हैं?
क्या AOA जैसे संगठन अब लोकल गुंडों के गिरोह बनते जा रहे हैं?


पत्रकारों की कोशिश, लेकिन कोई आधिकारिक जवाब नहीं

रफ़्तार टुडे ने थाना बिसरख पुलिस और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसी प्रकार AOA के उपरोक्त सदस्यों से भी बात नहीं हो सकी।

उनका पक्ष मिलने पर खबर को निष्पक्षता से अपडेट किया जाएगा।


आखिर किस पर भरोसा करें निवासी?

जब सुरक्षा एजेंसियां खामोश हों और प्रशासन निष्क्रिय, तब पीड़ितों के पास सिर्फ़ आवाज़ उठाने का एक ही माध्यम बचता है — मीडिया। और रफ़्तार टुडे उन हर नागरिकों के साथ है जो अन्याय, उत्पीड़न और तानाशाही के खिलाफ लड़ रहे हैं।


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