Samsara School News : “क्लासरूम से संसद तक बजट की गूंज!”, समसारा विद्यालय में सजा ‘केंद्रीय बजट 2026’ का ज्ञान मंच, छात्रों ने सीखा देश की अर्थव्यवस्था का गणित, केंद्रीय बजट 2026 शिक्षा, युवा और अर्थव्यवस्था पर फोकस

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। जहां आमतौर पर केंद्रीय बजट की चर्चा संसद, टीवी डिबेट और आर्थिक विशेषज्ञों तक सीमित रहती है, वहीं ग्रेटर नोएडा स्थित समसारा विद्यालय ने इसे कक्षा IX और XI के विद्यार्थियों तक पहुंचाकर एक नई और सराहनीय पहल की। 4 फरवरी 2026 को विद्यालय परिसर में आयोजित ‘केंद्रीय बजट 2026 जागरूकता कार्यशाला’ न केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम रही, बल्कि विद्यार्थियों के लिए देश की अर्थव्यवस्था को समझने का एक जीवंत अनुभव भी बनी।
इस विशेष बजट सत्र का आयोजन विद्यार्थियों में आर्थिक समझ, वित्तीय साक्षरता और राष्ट्रीय विकास से जुड़ी सोच को विकसित करने के उद्देश्य से किया गया। कार्यशाला का संचालन विद्यालय की कार्यवाहक प्रधानाचार्या श्रीमती ज्योति बत्रा एवं टीजीटी सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका श्रीमती रमा तेवतिया द्वारा किया गया, जिन्होंने सरल भाषा, उदाहरणों और संवादात्मक शैली के माध्यम से बजट जैसे जटिल विषय को छात्रों के लिए रोचक और समझने योग्य बना दिया।
छोटी उम्र में बड़ी सोच: बजट समझना क्यों है ज़रूरी?
कार्यशाला की शुरुआत करते हुए प्रधानाचार्या श्रीमती ज्योति बत्रा ने कहा कि आज के दौर में केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को देश की आर्थिक नीतियों, योजनाओं और निर्णयों की भी समझ होनी चाहिए। उन्होंने कहा “केंद्रीय बजट केवल सरकार का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि यह देश के भविष्य की दिशा तय करता है। यदि बच्चे इसे कम उम्र में समझना शुरू करें, तो वे न केवल जिम्मेदार नागरिक बनेंगे, बल्कि आने वाले समय में बेहतर नीति निर्माता, उद्यमी और अर्थशास्त्री भी बन सकते हैं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बजट से जुड़ी जानकारी छात्रों को जीवन में वित्तीय निर्णय लेने, कर व्यवस्था समझने और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को जानने में मदद करती है।
केंद्रीय बजट 2026: शिक्षा, युवा और अर्थव्यवस्था पर फोकस
टीजीटी सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका श्रीमती रमा तेवतिया ने केंद्रीय बजट 2026 की मुख्य विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को बताया कि इस वर्ष के बजट में शिक्षा, युवाओं के कौशल विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने समझाया कि शिक्षा क्षेत्र में बढ़ा हुआ निवेश किस तरह स्कूलों, कॉलेजों और डिजिटल लर्निंग को मजबूत करेगा।
युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट योजनाएं कैसे रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी।
अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार किस तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर ध्यान दे रही है। बजट के इन पहलुओं को दैनिक जीवन से जोड़ते हुए उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि बजट का असर आम नागरिक, छात्र और परिवार पर कैसे पड़ता है।
संवादात्मक सत्र ने बढ़ाया छात्रों का उत्साह
यह बजट कार्यशाला केवल एकतरफा भाषण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे पूरी तरह संवादात्मक और प्रश्नोत्तर आधारित रखा गया। विद्यार्थियों ने खुलकर सवाल पूछे—
बजट कैसे बनता है?
सरकार पैसा कहां से लाती है और कहां खर्च करती है?
शिक्षा बजट बढ़ने से उन्हें क्या लाभ होगा?
शिक्षिकाओं ने सभी प्रश्नों का सहज और उदाहरणों के साथ उत्तर दिया, जिससे छात्रों की जिज्ञासा और समझ दोनों बढ़ी।
भविष्य के जिम्मेदार नागरिकों की तैयारी
कार्यशाला के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि छात्र केवल श्रोता नहीं थे, बल्कि सक्रिय भागीदार बने हुए थे। कई विद्यार्थियों ने बजट से जुड़े तथ्यों पर अपने विचार भी साझा किए। इस तरह का माहौल यह दर्शाता है कि विद्यालय शिक्षा को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर जीवनोपयोगी ज्ञान की ओर भी ले जा रहा है।
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों में आर्थिक जागरूकता, आलोचनात्मक सोच और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करती हैं।
शिक्षा के साथ जागरूकता का अनूठा संगम
समसारा विद्यालय द्वारा आयोजित यह बजट कार्यशाला इस बात का उदाहरण है कि यदि सही मार्गदर्शन और सोच के साथ प्रयास किए जाएं, तो छात्र कठिन से कठिन विषयों को भी रुचि और उत्साह के साथ सीख सकते हैं। यह कार्यक्रम न केवल छात्रों के ज्ञानवर्धन का माध्यम बना, बल्कि उन्हें यह समझाने में भी सफल रहा कि देश का बजट उनके भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
कार्यशाला के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस तरह के समसामयिक, ज्ञानवर्धक और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।



