Galgotia University News : “ग्रेटर नोएडा में दवा नवाचार का महामंच — ‘फार्माइनोवेट 2025’ में दुनिया भर के वैज्ञानिकों का मंथन, कैंसर थेरानोस्टिक्स से लेकर नैनोस्पोंज तक गूंजे भविष्य के स्वास्थ्य समाधान!”, ग्रेटर नोएडा बना ग्लोबल हेल्थ इनोवेशन का केंद्र — ‘फार्माइनोवेट 2025’ का शानदार समापन

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गलगोटियाज कॉलेज ऑफ फार्मेसी में आयोजित दूसरे अंतरराष्ट्रीय “फार्माइनोवेट समिट 2025” ने वैश्विक चिकित्सा जगत के शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और फार्मा विशेषज्ञों को एक ही मंच पर इकट्ठा कर दिया।
दो दिनों तक चला यह सम्मेलन आधुनिक दवा विकास के हर उस क्षेत्र को छूता रहा, जो आने वाले वर्षों में चिकित्सा परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है।
“मॉलिक्यूल टू मेडिसिन: ड्रग डेवलपमेंट, ड्रग डिलीवरी और लाइफ-सेविंग थैरेपीज़” — इस मुख्य विषय ने पूरे आयोजन को एक वैज्ञानिक, नवाचारपूर्ण और भविष्य-दृष्टि वाला स्वर प्रदान किया।
दूसरे दिन की शुरुआत — प्रोस्टेट कैंसर और ‘थेरानोस्टिक्स’ पर विश्वस्तरीय सत्र
सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत हुई स्वीडन की नामी Uppsala University की प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अन्ना ओर्लोवा के सत्र से।
क्या है थेरानोस्टिक्स?
उन्होंने बताया कि थेरानोस्टिक्स एक ऐसी उभरती तकनीक है जिसमें डायग्नोसिस (रोग पहचान) और थेरेपी (उपचार) को एक साथ जोड़ दिया जाता है। एक ही वैज्ञानिक प्लेटफॉर्म पर बीमारी को पहचानना और उसी के अनुसार सटीक दवा देना — यह भविष्य की चिकित्सा का सबसे शक्तिशाली मॉडल बनकर उभर रहा है।
रेडियोफार्मास्यूटिकल्स: कैंसर कोशिकाओं का टारगेटेड विनाश
डॉ. ओर्लोवा ने बताया कि नए रेडियोफार्मास्यूटिकल्स इतनी सटीकता से प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं को पहचानते हैं कि दवा स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना केवल कैंसर स्थान पर काम करती है।
यह तकनीक न केवल सुरक्षित है, बल्कि व्यक्ति विशेष की जरूरतों के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट उपलब्ध कराती है।
उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित वैज्ञानिकों और छात्रों को कैंसर उपचार की बदलती दिशा का गहरा अनुभव कराया।
‘इंट्रानेजल वैक्सीन’— कोविड के बाद टीकाकरण की नई दिशा, दर्दरहित और अधिक प्रभावी सुरक्षा
इसके बाद मंच संभाला पुर्तगाल की Coimbra University की शोधकर्ता डॉ. ओल्गा बोर्गेस ने।
उनका विषय था — “नाक से प्रतिरक्षा: इंट्रानेजल कोविड-19 टीकों का भविष्य”।
म्यूकोसल इम्युनिटी — जहां हमला वहीं सुरक्षा
उन्होंने बताया कि नाक से दिए जाने वाले टीके शरीर की सांस नलिका (respiratory tract) में सीधे इम्युनिटी बनाते हैं। यही वह क्षेत्र है जहां वायरस सबसे पहले हमला करता है। इसलिए इंट्रानेजल वैक्सीन बीमारी को उसके शुरुआती बिंदु पर ही रोक देती है।
सुई-मुक्त टीकाकरण — सुरक्षित, दर्दरहित, सबके लिए आसान
उन्होंने कहा कि यह तरीका
सुई के डर को खत्म करता है
बच्चों और बुजुर्गों के लिए आदर्श है
बड़े स्तर पर आसानी से लागू किया जा सकता है यह प्रस्तुति बताती है कि भविष्य में कई वैक्सीन नाक के स्प्रे के रूप में उपलब्ध हो सकती हैं।
दुबई के वैज्ञानिक का नया दृष्टिकोण — ‘नैनोस्पोंज’ तकनीक दवाओं के ट्रांसपोर्ट में गेम-चेंजर
दुबई के कॉलेज ऑफ फार्मेसी के विशेषज्ञ डॉ. अलीअसगर साहीवाला ने दवा वितरण प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला सकने वाली तकनीक नैनोस्पोंज पर अपना शोध प्रस्तुत किया।
क्या हैं नैनोस्पोंज?
नैनोस्पोंज छोटे-छोटे छिद्रयुक्त कण होते हैं जो दवाओं को सुरक्षित तरीके से
बांध सकते हैं,
शरीर में घुलनशीलता बढ़ा सकते हैं,
और नियंत्रित तरीके से दवा को रिलीज कर सकते हैं।
यह तकनीक कैंसर, त्वचा रोग, दर्द-नियंत्रण और कई अन्य क्षेत्रों में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
डॉ. अलीअसगर ने उदाहरणों के साथ बताया कि कैसे दवाओं की बायोअवेलेबिलिटी बढ़ाकर इलाज को और ज्यादा सटीक बनाया जा सकता है।
गलगोटियाज यूनिवर्सिटी की दूरदर्शिता — CEO डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने दिया नवाचार पर जोर
सम्मेलन के मध्य सत्र में गलगोटियाज यूनिवर्सिटी के डायनामिक सीईओ डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने अपने विचार साझा किए।
उन्होंने कहा “हमारा संस्थान अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। फार्माइनोवेट 2025 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच हमारे छात्रों को वैश्विक शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों से जोड़ते हैं। यह मंच भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान खोजने का मार्ग बनता है।” उनका संबोधन छात्रों के लिए प्रेरणा और संस्थान के लिए गर्व का क्षण रहा।
जूनियर वैज्ञानिकों का कौशल प्रदर्शन — पोस्टर प्रेजेंटेशन बना सम्मेलन का आकर्षण
समेलन के दौरान रिसर्च स्कॉलर्स और फार्मेसी छात्रों के लिए पोस्टर प्रेजेंटेशन आयोजित किया गया। वैज्ञानिक समिति ने विभिन्न विषयों पर छात्रों के शोध कार्यों का मूल्यांकन किया।
कई छात्रों ने
नई दवा तकनीक,
पौधों पर आधारित दवाओं,
नैनो टेक्नोलॉजी,
और रोग निदान मॉडल्स पर आधारित रचनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं।
यह आयोजन छात्रों को वैश्विक मानकों पर शोध प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करता है और उनके वैज्ञानिक करियर को मजबूती देता है।
सम्मेलन का व्यापक प्रभाव — फार्मा सेक्टर के लिए दिशा तय करने वाला आयोजन
फार्माइनोवेट 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य का स्वास्थ्य क्षेत्र
कैंसर थेरानोस्टिक्स
सुई-मुक्त टीकाकरण
नैनो-ड्रग डिलीवरी
पर्सनलाइज्ड मेडिसिन जैसे मॉडलों पर आधारित होगा।
गलगोटियाज कॉलेज ऑफ फार्मेसी द्वारा आयोजित यह समिट भारत की बढ़ती फार्मा क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में देश की भूमिका को और मजबूती देता है।
एक मंच पर इतने विशेषज्ञों की उपस्थिति, वैज्ञानिक विचार-विमर्श और शोध प्रेरणा — यह आयोजन आने वाले वर्षों में कई शोधों और नवाचारों को जन्म देगा।
‘फार्माइनोवेट 2025’ बना नवाचार, अनुसंधान और सहयोग का अंतरराष्ट्रीय उत्सव
ग्रेटर नोएडा में आयोजित यह सम्मेलन न केवल विद्यार्थियों के लिए बल्कि वैश्विक फार्मा उद्योग के लिए भी नई दिशा लेकर आया।
यह समिट इस बात का प्रमाण है कि गलगोटियाज यूनिवर्सिटी भविष्य के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और फार्मा नवप्रवर्तकों को तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
कुल मिलाकर, FARMAINNOVATE 2025 ने दिखा दिया कि दवा अनुसंधान का भविष्य भारत की धरती पर ही आकार ले रहा है।



