Breaking Illegal Colonies News : हिंडन किनारे अवैध कॉलोनियों पर ग्रेनो प्राधिकरण का बुलडोजर चला, हैबतपुर के डूब क्षेत्र से 10,000 वर्ग मीटर जमीन मुक्त, कालोनाइजरों में मचा हड़कंप!, एसीईओ सुमित यादव की सख्त चेतावनी, हिंडन किनारे बन रही थी अवैध कॉलोनी ‘शिवम एंक्लेव’, सीईओ एन. जी. रवि कुमार के निर्देश पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बुधवार को हैबतपुर गांव स्थित हिंडन नदी के डूब क्षेत्र (Submerged Zone) में चल रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 10,000 वर्ग मीटर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया।
यह पूरी कार्रवाई एनजीटी (National Green Tribunal) के आदेश पर की गई, जिसके तहत प्राधिकरण ने शिवम एंक्लेव नामक अवैध कॉलोनी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई में लगभग 10 पक्के मकान और 15 बाउंड्री वॉल को जमींदोज़ कर दिया गया।
हिंडन किनारे बन रही थी अवैध कॉलोनी ‘शिवम एंक्लेव’
जानकारी के मुताबिक, हैबतपुर गांव के खसरा नंबर 180, 181, 184, 194, 195, 196, 198, 199, 201, 202, 206, 211 और 212 की जमीन हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में आती है।
फिर भी, कुछ कालोनाइजरों ने इस जमीन पर प्लॉटिंग कर अवैध रूप से मकान और बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी थीं।
इन प्लॉटों को दूर-दराज से आए लोगों को बेचकर उन्हें स्थायी घर का सपना दिखाया गया।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पहले भी कई बार नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
अंततः सीईओ एन. जी. रवि कुमार के निर्देश पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया और एनजीटी के आदेश का पालन करते हुए बुलडोजर चलाया गया।
सुबह 7 बजे शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
बुधवार सुबह करीब 7 बजे से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, सिंचाई विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।
कार्रवाई के दौरान चार जेसीबी मशीनें और तीन डंपर लगाए गए।
करीब दो घंटे तक लगातार बुलडोजर की गड़गड़ाहट से अवैध ढांचे धराशायी होते गए। इस अभियान में प्राधिकरण के महाप्रबंधक ए.के. सिंह, ओएसडी रामनयन सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक प्रभात शंकर, सीवर विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक विनोद शर्मा, राजेश कुमार निम, अभिषेक सिंह, रतिक, नितीश कुमार, बिजेंद्र कुशवाहा, और सहायक प्रबंधक राजीव मोटला, राम किशन व भूपेंद्र त्यागी उपस्थित रहे।
पुलिस की ओर से पुलिस अधिकारी दीक्षा सिंह के नेतृत्व में बल तैनात किया गया ताकि किसी प्रकार का विरोध न हो।
एनजीटी के आदेश पर हुई कार्रवाई
दरअसल, डूब क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ एक याचिका एनजीटी में दायर की गई थी।
एनजीटी ने इस पर सुनवाई करते हुए सिंचाई विभाग और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से रिपोर्ट तलब की थी।
जांच में पाया गया कि हैबतपुर के डूब क्षेत्र में अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है।
इसके बाद एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि ऐसे सभी अतिक्रमणों को तुरंत हटाया जाए और रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
इसी आदेश के अनुपालन में बुधवार को यह कार्रवाई की गई।
एसीईओ सुमित यादव की सख्त चेतावनी
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने कहा कि डूब क्षेत्र या प्राधिकरण की अधिसूचित सीमा में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने बिना नक्शा पास कराए या बिना अनुमति के निर्माण किए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि “किसी भी प्रकार की जमीन खरीदने या निर्माण शुरू करने से पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से अनुमति अवश्य लें।
किसी अवैध कॉलोनी में अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई न फंसाएं।”
डूब क्षेत्र में निर्माण का खतरा: न सिर्फ अवैध बल्कि जानलेवा भी
विशेषज्ञों का कहना है कि हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बने घर न सिर्फ गैरकानूनी हैं बल्कि बेहद खतरनाक भी हैं।
बरसात के मौसम में नदी के जलस्तर में वृद्धि से इन इलाकों में कभी भी बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
साल 2023 में भी इसी इलाके में पानी भरने से कई मकानों को नुकसान पहुंचा था।
इसलिए प्राधिकरण अब ऐसे निर्माणों पर कड़ी निगरानी रखेगा और जरूरत पड़ने पर दोबारा कार्रवाई करेगा।
प्रशासन और पुलिस की संयुक्त मौजूदगी से रहा माहौल शांत
कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए थे। स्थानीय पुलिस बल की भारी मौजूदगी से किसी भी अप्रिय घटना को रोक लिया गया।
कुछ लोगों ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत कराया।
कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।
ग्रेटर नोएडा को अवैध निर्माणों से मुक्त कराने का अभियान जारी
यह कार्रवाई प्राधिकरण की क्लीन सिटी और एनवायरनमेंट सेफ्टी मिशन का हिस्सा है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आने वाले महीनों में डूब क्षेत्र, हरित पट्टी और मास्टर प्लान रोड्स के किनारे बने अवैध निर्माणों पर और सख्त कार्रवाई करेगा।
इससे शहर का विकास अधिक नियोजित और पर्यावरण संतुलित दिशा में आगे बढ़ेगा।
प्राधिकरण का संदेश: “कानून तोड़ने वालों के लिए नहीं, कानून मानने वालों के लिए है ग्रेटर नोएडा”
ग्रेटर नोएडा अब नियोजित शहर (Planned City) की पहचान को और मजबूत कर रहा है।
प्राधिकरण लगातार चेतावनी दे रहा है कि किसी भी तरह की अवैध कॉलोनी या निर्माण में पैसा लगाना कानूनी और आर्थिक दोनों रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है।
साफ है कि अब ग्रेटर नोएडा में अवैध निर्माण करने वालों की खैर नहीं।



