शिक्षागौतमबुद्ध नगरग्रेटर नोएडा

ITS College News : 390 टीमों की तकनीकी जंग, आइडियाज़ की आंधी और इनोवेशन का महासंग्राम, आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज में Mini Hackathon 1.0 ने रचा नए कीर्तिमान—स्टूडेंट्स की प्रतिभा देख दंग रह गए जज

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा का आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज सोमवार को किसी इनोवेशन फेस्टिवल, किसी टेक्नोलॉजी मेले या किसी भविष्य के साइंस-लैब से कम नहीं लग रहा था। हर तरफ जज़्बा, जिज्ञासा, प्रतिस्पर्धा और क्रिएटिविटी का धुआँ उड़ रहा था। मौका था—Mini Hackathon 1.0 का, जो कॉलेज के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग तथा संबद्ध शाखाओं द्वारा आयोजित किया गया।

इस एक ही दिन में ऐसा माहौल बना, मानो 390 टीमों ने पूरा कैंपस ही नए विचारों से रोशन कर दिया हो। कुल 390 टीमों में से 187 टीमों को फाइनल मूल्यांकन के लिए चुना जाना अपने आप में रिकॉर्ड जैसा रहा।

नवाचार का महाकुंभ—जहाँ हर टीम बनना चाहती थी विजेता

Mini Hackathon 1.0 की खासियत यह रही कि यहां छात्रों ने सिर्फ कोड नहीं लिखा,
बल्कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया।
यह इवेंट छात्रों की समस्या-समाधान क्षमता*, प्रोजेक्ट डेवलपमेंट स्किल,
प्रजेंटेशन, और तकनीकी समझ की कसौटी परखने का एक बड़ा मंच साबित हुआ।

कैंपस के हर कोने में स्टूडेंट्स अपनी लैपटॉप स्क्रीन पर झुके हुए, कोडिंग के जंगल में रास्ता खोजते, एल्गोरिद्म के पहाड़ों पर चढ़ते, और डीबगिंग की खाइयों को पार करते दिखाई दे रहे थे।

कई टीमें हार्डवेयर–सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन का शानदार प्रदर्शन कर रही थीं, तो कई टीमों ने ऐसे ऐप बनाए, जो समस्या देखकर खुद समाधान की तरफ भागने लगें।

कार्यक्रम का शुभारंभ—ऊर्जा, उत्साह और प्रेरणा का संगम

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. (डॉ.) मयंक गर्ग, निदेशक, ITS इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा किया गया। उनके प्रेरणादायी संबोधन ने कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों का मनोबल कई गुना बढ़ा दिया।

उनके साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं शिक्षाविद भी उपस्थित रहे—

प्रो. (डॉ.) विष्णु शर्मा, डीन अकादमिक एवं संयोजक

प्रो. (डॉ.) संजय यादव, डीन स्टूडेंट वेलफेयर

प्रो. (डॉ.) जया सिन्हा, विभागाध्यक्ष CSE-AIML एवं CSE-DS

डॉ. संध्या उमराव और डॉ. हरिओम त्यागी, इवेंट कोऑर्डिनेटर

इन सभी ने छात्रों के कार्यों की प्रशंसा की और उन्हें बताया कि भविष्य की तकनीकी दुनिया में हैकाथॉन जैसे आयोजन बेहद महत्वपूर्ण हैं।

390 टीमों में छिपे 390 सपने—हर प्रोजेक्ट था अनोखा

Mini Hackathon 1.0 की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसमें शामिल हर टीम ने
एक अलग सोच, अलग दिशा, और अलग तकनीक का प्रयोग किया।

कुछ टीमों ने—

AI आधारित सॉल्यूशंस,

IoT प्रोजेक्ट,

मोबाइल एप्लिकेशन,

बिग डेटा ऐनालिटिक्स,

स्मार्ट हेल्थकेयर सिस्टम,

होम ऑटोमेशन,

साइबर सिक्योरिटी टूल्स,

मशीन लर्निंग मॉडल, और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसी अवधारणाओं पर काम किया। कई प्रोजेक्ट इतने बेहतरीन थे कि देखने वालों को लगा
“यह तो किसी स्टार्टअप का प्रोडक्ट हो सकता है!”

दिन भर का माहौल—कैंपस में तकनीक का तूफ़ान

कैंपस में सुबह से ही उत्साह का उच्चस्तरीय माहौल था।
स्टूडेंट्स की टीमें समूह में चर्चा करती, वाइटबोर्ड पर योजनाएँ बनाती, लैपटॉप पर टाइपिंग की आवाजें उत्पन्न करती, और कभी-कभी परेशान होकर ‘वो कोड क्यों नहीं चल रहा’ वाली चीखें लगाती दिखाई दीं।

इवेंट में मेंटर्स भी लगातार विजिट करते रहे और टीमों को
प्रॉब्लम स्टेटमेंट को परिष्कृत,
डेटा स्ट्रक्चर सही चुनने,
यूआई को आसान बनाने,
और प्रोजेक्ट प्रस्तुतिकरण को मज़बूत करने के लिए मार्गदर्शन देते रहे।

187 टीमों का फाइनल राउंड—कड़ी चुनौती, कड़ा मूल्यांकन

390 टीमों में से 187 टीमें फाइनल राउंड में पहुँचीं।
फाइनल राउंड में:

प्रोजेक्ट की उपयोगिता

तकनीकी कठोरता

रचनात्मकता

प्रेजेंटेशन

वास्तविक उपयोग की संभावना

टीमवर्क

जैसे मानकों पर मूल्यांकन किया गया।

जजों ने साफ कहा कि कई प्रोजेक्ट इतने क्रांतिकारी थे कि वे सीधे इंडस्ट्री लेवल पर ले जाए जा सकते हैं।

विजेता कौन बने—प्रतिभा का शानदार सम्मान

Mini Hackathon 1.0 का सबसे रोमांचक हिस्सा विजेताओं की घोषणा रहा।

प्रथम पुरस्कार: CSE तृतीय वर्ष की टीम

द्वितीय पुरस्कार: CSE द्वितीय वर्ष की टीम

तृतीय पुरस्कार: CSE द्वितीय वर्ष की टीम

विजेताओं को ₹5,000 से अधिक की पुरस्कार राशि और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
वहीं कई टीमों को विशेष सराहना भी मिली।

आयोजन के उद्देश्य—किताबों से बाहर निकलकर सीखने का अवसर

हैकाथॉन का उद्देश्य सिर्फ तकनीकी प्रतियोगिता करवाना नहीं था, बल्कि छात्रों को वास्तविक दुनिया की समस्याओं से जोड़ना भी था।

इस इवेंट ने छात्रों को टीमवर्क सिखाया

कार्य के दबाव में भी शांत रहने का गुण विकसित किया

प्रेजेंटेशन स्किल बेहतर की

हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का समन्वय सिखाया

रिसर्च और डिज़ाइन थिंकिंग को समझाया

यह आयोजन ‘क्लासरूम बाउंड एजुकेशन’ से आगे बढ़कर
‘प्रैक्टिकल टेक्निकल एक्सपीरियंस’ पर केंद्रित रहा।

छात्रों का उत्साह—“यह सिर्फ हैकाथॉन नहीं, सीखने की प्रयोगशाला है”

कई छात्रों ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें यह अनुभव होता है कि तकनीक की दुनिया कितनी बड़ी है और किस तरह चुनौतियाँ हमारी सोच को तेज बनाती हैं।

एक छात्र ने कहा—
“हमने 8 घंटे इतने तेज़ी से काम किया कि लगा समय उड़ गया। आज हमने खुद को एक इंजीनियर की तरह महसूस किया।”

कॉलेज प्रशासन का संदेश—“हम भविष्य के टेक-लीडर्स तैयार कर रहे हैं”

कॉलेज प्रशासन ने कहा कि Mini Hackathon 1.0 जैसे आयोजन आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज की नवाचार और शोध केंद्रित शिक्षा-पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

प्रो. (डॉ.) मयंक गर्ग ने कहा—
“हमारा उद्देश्य छात्रों को ऐसे मंच देना है जहाँ वे अपनी क्षमता को पहचान सकें,
उसे निखार सकें और कल के लीडर्स बन सकें।”

इवेंट का निष्कर्ष—नवाचार का नया अध्याय

Mini Hackathon 1.0 ने कॉलेज में तकनीकी उत्कृष्टता का एक नया अध्याय शुरू कर दिया। यह आयोजन न सिर्फ सफल रहा बल्कि छात्रों में भविष्य के लिए अत्यधिक प्रेरणा, उत्साह और सीख छोड़ गया।

कई छात्रों ने कहा कि वे अगले बड़े हैकाथॉन में
AI, Robotics, Cybersecurity, और Blockchain पर और भी बड़े प्रोजेक्ट लेकर आएँगे।

कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम कॉलेज की नवाचार-परक सोच,
स्टूडेंट-फर्स्ट एप्रोच और तकनीकी भविष्य को मजबूती से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज
Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Back to top button