GL Bajaj College News : जब संवेदना ने थामा सफलता का हाथ, जीएल बजाज में “इमोशनल वेलबीइंग” पर प्रेरणादायक कार्यशाला का भव्य आयोजन, छात्रों के अनुभव, “हम अब सिर्फ अच्छे मार्क्स नहीं, अच्छा मन भी चाहते हैं

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।।
जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (GLBIMR) का परिसर सोमवार को एक अलग ही ऊर्जा, भावना और चेतना से भर उठा, जब विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच “इमोशनल वेल बीइंग” विषय पर केंद्रित एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। आधुनिक जीवन की आपाधापी और प्रतिस्पर्धा भरी दुनिया में जहां तकनीकी ज्ञान तो हर कोई अर्जित कर लेता है, वहीं भावनात्मक बुद्धिमत्ता और आंतरिक संतुलन की समझ कम ही लोगों में विकसित हो पाती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने यह अभिनव पहल की।
दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक भारतीय परंपरा के अनुसार दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। जैसे ही ज्ञान का प्रतीक दीप जला, पूरा सभागार सकारात्मकता, आत्मिक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण से भर गया। छात्रों, शिक्षकों और अतिथियों के चेहरों पर उत्सुकता और आत्ममंथन का भाव स्पष्ट दिख रहा था।
“ग्रीन ग्रीटिंग” : जब पौधे बने स्मृति और सम्मान का प्रतीक
संस्थान की एक खूबसूरत पहल के तहत, दोनों मुख्य वक्ताओं को “ग्रीन ग्रीटिंग” स्वरूप पौधे भेंट किए गए।
इस पर्यावरणीय और भावनात्मक संदेश से भरे इस सम्मान को प्रदान किया:
- डॉ. आनंद राय (प्रोग्राम चेयरपर्सन)
- डॉ. अरविंद कुमार भट्ट (प्रोफेसर)
इन पौधों ने न केवल विकास, उपचार और हरियाली का प्रतीक बनकर भावनात्मक वेल बीइंग के महत्व को दर्शाया, बल्कि यह भी बताया कि हर अच्छी सोच एक बीज है, जिसे प्रेम और संवेदना से सींचा जाए तो वह वटवृक्ष बनती है।
दिव्या शाह का ऊर्जा से भरपूर संवाद: “हम सबका एक ‘इनर चाइल्ड’ होता है!”
कार्यक्रम की पहली मुख्य वक्ता रहीं सुश्री दिव्या शाह, जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित पत्रकार रही हैं और अब “हैप्पीफाई” की सह-संस्थापक व इमोशनल वेल बीइंग प्रेरक हैं। उन्होंने छात्रों को न केवल इमोशनल हाइजीन, इनर चाइल्ड, सहानुभूति और दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता जैसे जटिल विषयों पर बेहद सरल, संवादात्मक और गतिविधियों से भरपूर शैली में प्रशिक्षित किया, बल्कि उन्हें अपने भीतर झाँकने का भी अवसर दिया।
उनके प्रमुख बिंदु रहे:
- इमोशनल हाइजीन भी उतनी ही जरूरी है जितनी पर्सनल हाइजीन
- इनर चाइल्ड को समझो, डर से नहीं, दया और अपनत्व से
- Empathy is not weakness, it is your deepest strength
- Feel it, name it, tame it – यही है भावनाओं का संतुलन
छात्रों ने प्रश्न पूछे, अनुभव साझा किए और ‘फीलिंग चार्ट’ जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेकर खुद को बेहतर समझने की ओर कदम बढ़ाया।
श्वेता ग्रोवर की अंतर्दृष्टि : “सफलता वहीं जाती है, जहां संतुलन होता है”
कार्यक्रम की दूसरी मुख्य वक्ता सुश्री श्वेता ग्रोवर रहीं, जो एक प्रमाणित NLP प्रैक्टिशनर और परामर्श मनोवैज्ञानिक हैं। उन्होंने छात्रों को आत्मचिंतन और आत्मस्वीकृति की यात्रा पर ले जाते हुए Anxiety, Body Image Issues, Gender Sensitivity, Life Skills जैसे विषयों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
उनकी बातें दिल को छूने वाली थीं:
- “तुम्हारे शरीर का आकार तुम्हारी काबिलियत नहीं, तुम्हारी समझ है।”
- “लाइफ स्किल्स कोई ऑप्शनल टूल नहीं, ज़िंदगी की ज़रूरत है।”
- “मौन में जो भाव छुपे होते हैं, उन्हें समझना ही सच्ची संवेदनशीलता है।”
उन्होंने छात्रों से Mirror Talk और Self-Acceptance Affirmations करवाए, जिससे कई छात्रों ने इमोशनल रिलीज अनुभव किया।

GLBIMR की प्रतिबद्धता : शिक्षा नहीं, संपूर्ण विकास की ओर
कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा और समन्वय में डॉ. पूजा सिंह व प्रोफेसर अमृता जैन का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सत्र केवल जानकारी न हो बल्कि अंतरात्मा की आवाज़ तक पहुंचे।
संस्थान के दृष्टिकोण की सराहना की गई कि वह अपने छात्रों को केवल शैक्षणिक दक्षता नहीं, बल्कि इमोशनल रेजिलिएंस और लाइफ रेडीनेस की ओर भी प्रशिक्षित कर रहा है।
छात्रों के अनुभव: “हम अब सिर्फ अच्छे मार्क्स नहीं, अच्छा मन भी चाहते हैं”
सत्र के अंत में छात्रों ने खुलकर अपनी भावनाएं साझा कीं:
“मैंने पहली बार जाना कि Anxiety भी कोई नाम रखने लायक चीज है, जिसे हम बोल सकते हैं।” — अनुष्का, PGDM प्रथम वर्ष
“आज जो Mirror Affirmation किया, वह मेरी लाइफ की पहली बार था जब मैंने खुद से इतना पॉजिटिव बात की।” — मयंक, सेकंड ईयर
“अब समझ में आया कि ग्रुप प्रोजेक्ट में सिर्फ डेडलाइन की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि साथी की मानसिक स्थिति भी मायने रखती है।” — ऋचा, HRM स्टूडेंट
🕊️ समापन : आभार और आत्मसाक्षात्कार के साथ
कार्यक्रम का समापन सभी शिक्षकों, वक्ताओं और छात्रों के प्रति आभार के साथ हुआ। अंत में जब सभी एक साथ बोले —
“I am enough. I am aware. I am balanced.”
तो यह केवल शब्द नहीं थे, बल्कि एक नए बदलाव की शुरुआत थी।
📢 प्रमुख संदेश
- इमोशनल वेलबीइंग कोई विलासिता नहीं, बल्कि आज के दौर की आवश्यकता है।
- आत्मचिंतन, सहानुभूति और इमोशनल हाइजीन जैसे विषय शिक्षा का अभिन्न अंग होने चाहिए।
- GLBIMR जैसे संस्थानों की यह पहल युवाओं को केवल नौकरी नहीं, जीवन जीने की समझ भी दे रही है।
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