शिक्षाग्रेटर नोएडा

GD Goenka School News : जब नन्हें सितारों ने रिमझिम बारिश संग बिखेरी रचनात्मकता की चमक, जी. डी. गोयंका स्कूल में “बूंदाबांदी-मानसून उन्माद” प्रतियोगिता ने जीता दिल, शिक्षा का नया आयाम, किताबों से परे, जीवन की सीख

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
बरसात की हल्की-हल्की बूंदों संग जब बच्चों की मासूम हंसी और उत्साह ने एक साथ दस्तक दी, तो नजारा किसी उत्सव से कम नहीं रहा। स्वर्ण नगरी स्थित जी. डी. गोयंका पब्लिक स्कूल में आयोजित हुआ एक ऐसा कार्यक्रम, जिसने बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों सभी को अविस्मरणीय यादें दीं। इस प्रतियोगिता का नाम रखा गया था—“बूंदाबांदी: मानसून उन्माद प्रतियोगिता।”

यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बच्चों की कल्पनाओं और प्रतिभा का ऐसा महापर्व साबित हुआ, जिसमें 18 विद्यालयों के नौनिहालों ने भाग लिया और 8 अलग-अलग प्रतियोगिताओं में अपनी कला का प्रदर्शन किया।

बच्चों की मासूम प्रतिभा संग मानसून की रंगीन छटा

मानसून का मौसम अपने आप में रोमांच और उमंग लेकर आता है। ऐसे में जब बच्चे इस मौसम को अपनी कला के रंगों में ढालते हैं, तो उसका आनंद दोगुना हो जाता है। प्रतियोगिता में प्री-नर्सरी से कक्षा 5वीं तक के बच्चों ने हिस्सा लिया।

किसी ने कविता सुनाकर बरसात की सुंदरता को शब्दों में पिरोया।किसी ने गीत गाकर वातावरण को संगीतमय बना दिया।छोटे-छोटे कदमों से मंच पर उतरते बच्चों ने नृत्य की ऐसी प्रस्तुतियां दीं, जिन पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।

वेशभूषा प्रतियोगिता में बच्चे कभी बादल बने, कभी इंद्रधनुष, तो कभी पेड़-पौधों का रूप धरकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते दिखे।

यह सब देख वहां मौजूद हर किसी की आंखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान आ गई।

18 विद्यालय, 8 प्रतियोगिताएं और असीम उमंग

इस प्रतियोगिता में आसपास के 18 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

कुल 8 प्रतियोगिताओं में बच्चों ने अपने हुनर का जादू बिखेरा। चित्रकला से लेकर कहानी सुनाने तक हर मंच बच्चों की कल्पना शक्ति का गवाह बना।

स्कूल का हर कोना बच्चों की हंसी, तालियों और उत्साह से गूंजता रहा। शिक्षकों और अभिभावकों ने माना कि इस तरह के आयोजन बच्चों की रचनात्मकता को पंख देने का काम करते हैं और उन्हें आत्मविश्वास से भरते हैं।

पदकों की झड़ी: हर बच्चा विजेता

प्रतियोगिता के समापन पर बच्चों को उनकी प्रतिभा का सम्मान मिला। कुल 40 स्वर्ण पदक, 40 रजत पदक और 40 कांस्य पदक वितरित किए गए। हर पदक पाकर बच्चों के चेहरे पर जो खुशी आई, वह इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी।

असल मायनों में यहां हार-जीत से ऊपर उठकर हर बच्चा विजेता था, जिसने मंच पर अपने आत्मविश्वास और कला का प्रदर्शन किया।

प्राचार्या डॉ. रेणु सहगल का प्रेरक संबोधन

विद्यालय की प्राचार्या डॉ. रेणु सहगल ने कार्यक्रम के अंत में कहा:
“हमारा उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं था, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, सौहार्द और टीम स्पिरिट का भाव जगाना था। जी. डी. गोयंका पब्लिक स्कूल हमेशा ऐसे प्रयास करता रहेगा, जिससे शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न रहे बल्कि बच्चों का समग्र विकास हो।”

उन्होंने सभी विद्यालयों की सहभागिता के लिए धन्यवाद दिया और नन्हें प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

बरसात और बच्चों का संगम: भावनात्मक पल

बारिश की हल्की फुहारें और बच्चों की उमंग भरी आवाज़ें मिलकर वातावरण को और भी खूबसूरत बना रही थीं। प्रतियोगिता का हर पल ऐसा लग रहा था, मानो मानसून खुद बच्चों की रचनात्मकता का साक्षी बन गया हो।

कहीं गीत, कहीं नृत्य, कहीं कविता और कहीं रंगों की बौछार—पूरा आयोजन किसी इंद्रधनुषी उत्सव जैसा था, जिसमें बच्चों की प्रतिभा ने सभी को चकित कर दिया।

शिक्षा का नया आयाम: किताबों से परे, जीवन की सीख

यह प्रतियोगिता इस बात का प्रमाण थी कि शिक्षा केवल किताबों में कैद नहीं है। असली शिक्षा वह है, जो बच्चों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील और सामाजिक बनाती है।

“बूंदाबांदी: मानसून उन्माद प्रतियोगिता” के जरिए बच्चों ने सीखा कि—
मिलकर काम करने से टीम स्पिरिट विकसित होती है।
कला और रचनात्मकता जीवन को खुशहाल बनाती है।
हार-जीत से ऊपर उठकर प्रयास ही असली जीत है।

नन्हें सितारों ने रचा इतिहास

इस आयोजन ने साफ कर दिया कि नन्हें-मुन्नों की प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। उनका आत्मविश्वास, उनकी ऊर्जा और उनकी रचनात्मकता आने वाले समय में समाज और देश के लिए एक नई रोशनी बनकर उभरेगी।

“बूंदाबांदी: मानसून उन्माद प्रतियोगिता” सिर्फ एक स्कूल प्रोग्राम नहीं था, बल्कि यह बच्चों के सपनों को उड़ान देने वाला उत्सव था, जो लंबे समय तक याद किया जाएगा ।

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Raftar Today
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