Breaking News : क्या 31 अक्टूबर की 'गुर्जर स्वाभिमान रैली' बदलेगी राष्ट्रीय राजनीति का समीकरण?, रामलीला मैदान से कैबिनेट में हिस्सेदारी की हुंकार, देशभर से लाखों लोगों के जुटने का दावा, राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र भाटी बोले राष्ट्रीय राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व की मांग हुई तेज

नोएडा, रफ़्तार टूडे। राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भागीदारी और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व को लेकर गुर्जर समाज ने अब संगठित रूप से अपनी आवाज बुलंद करने का फैसला किया है। इसी उद्देश्य से नोएडा के सेक्टर-61 में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा द्वारा “राष्ट्रीय राजनीति और गुर्जर समाज का समावेश” विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी एवं पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व, शिक्षा, सामाजिक सशक्तिकरण और युवाओं की भागीदारी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण आगामी 31 अक्टूबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में प्रस्तावित “गुर्जर समाज स्वाभिमान रैली” की घोषणा रही। महासभा के पदाधिकारियों ने दावा किया कि यह रैली केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं होगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गुर्जर समाज की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और राजनीतिक भागीदारी का बड़ा मंच बनेगी।
राष्ट्रीय राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व की मांग हुई तेज
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र भाटी ने कहा कि गुर्जर समाज ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश की सुरक्षा, कृषि, सेना, खेल, सामाजिक विकास और राष्ट्र निर्माण तक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके बावजूद राष्ट्रीय राजनीति में समाज को उसके योगदान के अनुरूप प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय विभिन्न राजनीतिक दल समाज से समर्थन तो मांगते हैं, लेकिन सत्ता और नीति निर्माण में उचित भागीदारी देने के समय समाज की अनदेखी कर दी जाती है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में गुर्जर समाज को कैबिनेट मंत्री स्तर का प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।
रामलीला मैदान से पूरे देश को जाएगा लोकतांत्रिक संदेश
हरिश्चंद्र भाटी ने कहा कि 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली “गुर्जर समाज स्वाभिमान रैली” समाज की लोकतांत्रिक चेतना और एकजुटता का प्रतीक बनेगी। उन्होंने दावा किया कि इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी गुर्जर समाज के लोग शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यह रैली किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर समाज की सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।
‘अब केवल आश्वासन नहीं, भागीदारी चाहिए’
महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सविंदर भाटी ने कहा कि अब समाज केवल चुनावी वादों और आश्वासनों से संतुष्ट नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक दल संगठन और सरकार में गुर्जर समाज को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देगा, समाज भविष्य में उसी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर विचार करेगा।
उन्होंने बताया कि महासभा देशभर में जनजागरण अभियान चलाएगी, ताकि समाज के लोग लोकतांत्रिक अधिकारों, मतदान और राजनीतिक भागीदारी के प्रति अधिक जागरूक हो सकें।
राजनीति के साथ शिक्षा और युवाओं पर भी विशेष फोकस
उत्तर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुनील भाटी ने कहा कि कार्यक्रम केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा। वक्ताओं ने शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक संगठन की मजबूती पर भी विस्तार से अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक ताकत उसकी शिक्षित और जागरूक युवा पीढ़ी होती है। इसलिए युवाओं को आधुनिक शिक्षा, तकनीकी कौशल, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। महिला सशक्तिकरण को भी समाज की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
समावेशी लोकतंत्र पर दिया गया जोर
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक समाज को समान अवसर और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उनका मत था कि जब सभी वर्ग नीति निर्माण प्रक्रिया में सहभागी बनेंगे, तभी लोकतंत्र और अधिक मजबूत तथा समावेशी बनेगा।
वक्ताओं ने सामाजिक एकता, संविधान में विश्वास और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कई पदाधिकारी और समाज के प्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय सचिव अरुण भाटी, राष्ट्रीय सचिव धीरेंद्र वर्मा, उत्तर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुनील भाटी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने समाज से शिक्षा, संगठन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
अब 31 अक्टूबर पर टिकी राजनीतिक नजरें
नोएडा में आयोजित इस विचार गोष्ठी के बाद अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजरें 31 अक्टूबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित “गुर्जर समाज स्वाभिमान रैली” पर टिक गई हैं। यदि इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी होती है, तो यह गुर्जर समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा दे सकता है। फिलहाल महासभा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले समय में वह अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और संगठित तरीके से आगे बढ़ाती रहेगी।



