NPCL On Greater Noida West Society : ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मचा अंधेरा-अलार्म!, 37 लाख के बकाया पर एनपीसीएल ने काट दी इस सोसायटी की बिजली, दिनभर की जद्दोजहद—लिफ्ट बंद, वॉटर पंप बंद, जनरेटर पर खतरा, तनाव बरकरार, रातभर हंगामा, लोग बोले—“हम क्यों भुगतें प्रबंधन की लापरवाही?”,

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की चर्चित हाईराइज़ सोसायटी हिमालया प्राइड में सोमवार का दिन किसी फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं रहा। सुबह तक सबकुछ सामान्य था, लेकिन अचानक पूरी सोसायटी में अंधेरा छा गया। पहले लोगों ने सोचा कि यह कोई आम बिजली कटौती है, जो कुछ ही देर में बहाल हो जाएगी। लेकिन थोड़ी ही देर में खबर सामने आई कि एनपीसीएल (नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड) ने सोसायटी की बिजली सप्लाई काट दी है—और कारण था 37 लाख 36 हजार 231 रुपए का बकाया।
जैसे ही यह सूचना व्हाट्सऐप ग्रुपों में फैली, सोसायटी में एक तरह की खलबली मच गई। गर्मी के मौसम में दिन में बिजली कटने से लेकर बच्चों की ऑनलाइन क्लास, बूढ़ों की जरूरतें, लिफ्ट बंद होने का खतरा—सब एक साथ लोगों के सामने खड़े हो गए। लेकिन सबसे बड़ा सवाल था—
“अगर हम लोग समय पर अपना बिल भरते हैं, तो सोसायटी प्रबंधन बकाया कैसे होने देता है?”
अंधेरा जो पूरे दिन सिर पर सवार रहा
सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे एनपीसीएल की टीम सोसायटी पहुंची और मुख्य बिजली कनेक्शन को डिस्कनेक्ट कर दिया। जिसके बाद पूरी सोसायटी में एक-एक कर सभी टावरों में बिजली गुल हो गई। कई लोगों ने शुरू में नोटिस नहीं लिया, लेकिन जैसे ही बैकअप खत्म होने लगा, इनवर्टर डाउन होने लगे, और लिफ्ट बंद होने लगीं—लोग घबरा गए।
बच्चों के स्कूल असाइनमेंट अटक गए, कई बुजुर्गों के लिए जरूरी मेडिकल इक्विपमेंट ने काम करना बंद कर दिया। सोसायटी का माहौल धीरे-धीरे गर्मी की तरह तमतमाने लगा। हर टावर में एक ही सवाल गूंज रहा था “बिजली क्यों गई?”
जब खुला सच—37 लाख का बकाया!
बाद में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने लोगों की नाराजगी को और भड़का दिया।
एनपीसीएल के अधिकारियों ने साफ कहा सोसायटी लंबे समय से बिजली के बिल का भुगतान समय पर नहीं कर रही थी।
कई बार नोटिस भेजे गए, रिमाइंडर दिया गया, लेकिन भुगतान ‘टालो और कल करो’ वाली नीति पर चलता रहा।
अधिकारीयों के अनुसार:
सोसायटी का बिजली बिल लगातार पेंडिंग चल रहा था
कई महीनों से भुगतान में देरी
बार-बार नोटिस और चेतावनी के बावजूद कोई गंभीर कदम नहीं
अंतिम चेतावनी के बाद भी बकाया न चुकाने पर कार्रवाई
सोमवार को एनपीसीएल ने आखिरकार सख्त कदम उठाते हुए सप्लाई बंद कर दी।
निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर
जैसे ही लोगों को असली कारण पता चला, सोसायटी के अंदर माहौल विस्फोटक हो गया।
निवासी बोले “हम अपना मेंटेनेंस और बिजली चार्ज समय पर देते हैं, फिर हमारी गलती क्या है?”
“प्रबंधन की लापरवाही का खामियाज़ा सोसायटी के हज़ारों लोग क्यों भुगतें?”
“क्यों नहीं पहले ही पारदर्शी तरीके से बात बताई गई?”
कई निवासियों ने सोसायटी मैनेजमेंट ऑफिस का रुख किया, जहां लोगों की लंबी भीड़ जमा हो गई।
कुछ ने सोशल मीडिया पर भी मामले को उठाया—
प्रबंधन की हालत—‘स्पष्टीकरण जारी होगा’
सोसायटी प्रबंधन ने इस मुद्दे पर खुद को घिरा पाया।
कुछ स्टाफ ने निवासियों को आश्वासन देने की कोशिश की कि “बातचीत चल रही है” लेकिन निवासियों ने साफ कहा कि:
“हमको आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए!”
“हमने जो पैसा दिया है, वो गया कहां?”
“नोटिस क्यों नहीं शेयर किए गए?”
कुछ निवासियों ने यह भी मांग उठाई कि सोसायटी मैनेजमेंट की वित्तीय पारदर्शिता की जांच कराई जाए। कई लोगों ने RWAs और अन्य समूहों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान शुरू करने का प्रस्ताव दिया।
एनपीसीएल का बयान—‘बिल जमा करो, बिजली पाओ’
एनपीसीएल अधिकारियों ने साफ कहा “हम किसी भी सोसायटी को परेशान करने के लिए बिजली नहीं काटते।
लेकिन अगर लाखों का बकाया महीनों तक जमा नहीं होता,
तो कार्रवाई करनी पड़ती है।”
उनका कहना था कि जैसे ही सोसायटी प्रबंधन बकाया जमा करेगा, बिजली तुरंत बहाल कर दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि हिमालया प्राइड की यह पहली बार नहीं है सोसायटी हमेशा बिजली बिल जमा करने में ढिलाई दिखाती रही है।
दिनभर की जद्दोजहद—लिफ्ट बंद, वॉटर पंप बंद, जनरेटर पर खतरा
बिजली कटने का असर सोसायटी के हर हिस्से में दिखाई दिया।
लिफ्टें कुछ ही देर में बंद हो गईं
वॉटर पंप काम करना बंद
बैकअप सिस्टम ओवरलोड होने लगा
कई फ्लैटों में पानी की दिक्कत
कामकाजी लोगों के वर्क-फ्रॉम-होम में दिक्कत
बच्चों की पढ़ाई बाधित
सोसायटी के ग्रुपों में हर 5 मिनट में एक ही लाइन आती रही—
“लिफ्ट बंद है क्या?”
“पानी कब आएगा?”
“कोई अपडेट है?”
शाम तक भी समाधान नहीं, तनाव बरकरार
पूरा दिन गुजर गया, लेकिन बिजली सप्लाई चालू नहीं हुई।
निवासियों का धैर्य टूटता गया।
कई टावरों में मीटिंग कर स्थितियों पर बात की गई।
सोसायटी के वरिष्ठ नागरिकों ने भी प्रबंधन को पत्र दिया कि तत्काल समाधान निकाला जाए।
क्या सोसायटी प्रबंधन पर होगी कार्रवाई?
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है क्या बड़े-बड़े बिलों के भुगतान में लापरवाही करने वाले सोसायटी मैनेजमेंट पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं?
कई लोगों ने यह भी कहा कि प्रबंधन को रियल-टाइम अपडेट निवासियों के साथ साझा करना चाहिए। कुछ ने सुझाव दिया कि सोसायटी के वित्तीय दस्तावेजों का ऑडिट करवाया जाए।
भविष्य में ऐसे संकट कैसे टलेंगे?
निवासियों की राय में बिल भुगतान की पारदर्शी प्रणाली हो
हर महीने अकाउंट स्टेटस साझा किया जाए
RWA और MC मिलकर संयुक्त निगरानी करें
एनपीसीएल नोटिस निवासियों को सीधे भी भेजे
बिजली कटौती जैसी घटनाओं से पहले अलर्ट जारी हो
लापरवाही की कीमत चुकाई पूरी सोसायटी ने
हिमालया प्राइड में हुई इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि उच्च-स्तरीय सोसायटी में रहने का मतलब सिर्फ सुविधाएँ नहीं, बल्कि जिम्मेदार प्रबंधन भी है।
जब तक प्रबंधन पारदर्शी और सक्रिय नहीं होगा,
तब तक ऐसी घटनाएं दोबारा सामने आ सकती हैं। निवासियों का कहना है कि अब वे इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी मेहनत की कमाई से जो चार्ज वे भरते हैं, उसका सही उपयोग हो।



