Sharda Universit News : शारदा यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के लिए नई दिशा की शुरुआत, "संकाय विकास कार्यक्रम" से बढ़ेगी शिक्षण और शोध की गुणवत्ता, FDP से शिक्षकों में आएगा आत्मविश्वास, छात्र भी होंगे लाभान्वित

ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।
नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में 15 दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (Faculty Development Programme – FDP) की भव्य शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को न सिर्फ शिक्षण में दक्ष बनाना है, बल्कि उन्हें शोध और लेखन कौशल में भी प्रशिक्षित करना है, ताकि वे 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रणाली को आगे ले जा सकें।
शिक्षण की परंपरा में नवाचार की दस्तक
कार्यक्रम का उद्घाटन संयोजक प्रो. (डॉ.) अनीता सिंह के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा, उद्देश्य और आगामी सत्रों की झलक प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, शिमला के पूर्व कुलपति डॉ. एस.सी. रैना ने शिरकत की, जिन्होंने अपने वक्तव्य में शोध आधारित शिक्षा प्रणाली को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा:
“आज के विधि छात्रों को सिर्फ कानून नहीं, प्रश्न पूछने और समाधान ढूंढ़ने की कला सिखानी होगी, और यह तभी संभव है जब शिक्षक खुद शोध व नवाचार की प्रक्रिया में सक्रिय हों।”
कुलपति और डीन ने साझा किया विज़न
शारदा यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सिबाराम खारा ने प्रतिभागियों को उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देने की प्रेरणा दी और शिक्षण के आधुनिक मानकों पर प्रकाश डाला।
वहीं, स्कूल ऑफ लॉ के डीन डॉ. ऋषिकेश दवे ने बताया कि यह संकाय विकास कार्यक्रम पूरी तरह ऑफलाइन आयोजित किया जा रहा है और यह दो सप्ताह तक चलेगा। यह शिक्षकों को शिक्षण, शोध, मूल्यांकन और मार्गदर्शन जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक और सैद्धांतिक दृष्टिकोणों से प्रशिक्षित करेगा।
प्रो. पूर्वी पोखरियाल ने कराया ‘समूह आधारित शिक्षण’ का अनुभव
एफडीपी के पहले सत्र का संचालन प्रोफेसर डॉ. पूर्वी पोखरियाल, निदेशक – राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (दिल्ली परिसर) ने किया। उन्होंने शिक्षा को ‘छात्र केंद्रित प्रक्रिया’ के रूप में परिभाषित किया और बताया कि कैसे समूह आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों में विचारशीलता, संवाद क्षमता और समाधान खोजने की दक्षता विकसित होती है।
रिसर्च, डेटा, विश्लेषण और संप्रेषण — एक समग्र दृष्टिकोण
कार्यक्रम में शामिल सत्रों के मुख्य विषय इस प्रकार होंगे:
- शिक्षण विधियों में नवाचार और प्रभावी कक्षा प्रबंधन
- वैज्ञानिक शोध की नींव और शोध डिज़ाइन की जटिलताएं
- डेटा संग्रह, संगठन और सांख्यिकीय विश्लेषण के व्यावहारिक आयाम
- शोध निष्कर्षों का लेखन और अकादमिक/प्रोफेशनल प्लेटफार्मों पर संप्रेषण
- सोशल इम्पैक्ट रिसर्च और पॉलिसी इनपुट्स पर केंद्रित सत्र
प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को इस बात की समझ देगा कि कैसे एक शिक्षण संस्थान केवल पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रहकर शोध और समाज निर्माण की धुरी बन सकता है।
FDP से शिक्षकों में आएगा आत्मविश्वास, छात्र भी होंगे लाभान्वित
इस तरह के कार्यक्रमों से न केवल शिक्षक अपनी शिक्षण शैली और विषय की गहराई में सुधार करते हैं, बल्कि इसका सीधा लाभ छात्रों को मिलता है। छात्र अधिक सक्रिय, संवादात्मक और व्यावहारिक शिक्षा का अनुभव करते हैं।
उद्देश्य: एकेडमिक उत्कृष्टता को बनाना आदत
शारदा विश्वविद्यालय का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि वह सिर्फ डिग्री देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो शिक्षकों और छात्रों को समाज के लिए जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करता है।
यह संकाय विकास कार्यक्रम केवल शिक्षकों की क्षमता निर्माण की कवायद नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी के शिक्षा मॉडल की नींव डालने की दिशा में बड़ा कदम है।
निष्कर्ष: संकाय विकास से शिक्षा की गुणवत्ता को मिलेगी नई दिशा
शारदा यूनिवर्सिटी के इस पहल से यह स्पष्ट है कि उच्च शिक्षा का भविष्य केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि शोध, संवाद, विश्लेषण और नवाचार के चार स्तंभों पर आधारित होगा। ऐसे आयोजन न केवल विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करते हैं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन को साकार भी करते हैं।
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