
नोएडा, रफ़्तार टुडे। नोएडा सेक्टर-145 स्थित नलगढ़ा गांव का गुरुद्वारा संगतसर आज देशभक्ति और श्रद्धा का अद्भुत केंद्र बना रहा। शहीदे-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालु जुटे और इस महान क्रांतिकारी को नमन किया। नलगढ़ा गांव का यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना। शहीदे-ए-आज़म भगत सिंह का जीवन हमें यह सिखाता है कि देश के लिए बलिदान ही सबसे बड़ा धर्म है। गुरुद्वारा संगतसर की यह श्रद्धांजलि समाज में राष्ट्रप्रेम, भाईचारे और त्याग की भावना को और प्रगाढ़ करेगी।
स्वतंत्रता संग्राम में नलगढ़ा गांव का योगदान
इतिहास की पुस्तकों में दर्ज है कि नलगढ़ा गांव स्वतंत्रता संग्राम का अहम ठिकाना रहा। यहीं पर भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने की गुप्त योजनाएं बनाई थीं।
गुरुद्वारे परिसर में आज भी वह ऐतिहासिक पत्थर मौजूद है, जिस पर बम बनाने की सामग्री तैयार की जाती थी। यह पत्थर स्वतंत्रता आंदोलन की अमर गाथा का साक्षी है और आज की पीढ़ी को बलिदान की प्रेरणा देता है।
शोभायात्रा से गूंज उठा गांव
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह गुरुद्वारा साहिब से शोभायात्रा के साथ हुई। यह शोभायात्रा पूरे गांव की गलियों से होकर गुज़री और जगह-जगह लोगों ने फूल बरसाकर क्रांतिकारियों की स्मृति को नमन किया। यात्रा का समापन पुनः गुरुद्वारे में हुआ, जहां श्रद्धालु एकत्र होकर देशभक्ति के नारों से वातावरण गुंजायमान करते रहे।
युवाओं की जोशभरी भागीदारी
इस आयोजन की सबसे खास बात रही युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी। लगभग 500 श्रद्धालु इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिनमें युवाओं की अग्रणी भूमिका थी। कार्यक्रम ने यह साबित किया कि नई पीढ़ी आज भी भगत सिंह जैसे अमर शहीदों को आदर्श मानती है और उनके बताए रास्ते पर चलने को तत्पर है।
गुरुद्वारा कमेटी और समाज का आभार
गुरुद्वारा कार्यकारिणी ने आयोजन की सफलता के लिए ग्रामवासियों, नोएडा पंजाबी समाज (पंजीकृत) और सरबत दा भला (पंजीकृत) संस्था का विशेष धन्यवाद किया। कार्यकारिणी ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल समाज में आपसी एकता और सौहार्द को मजबूत करते हैं, बल्कि यह युवा पीढ़ी के बीच देशप्रेम और बलिदान की भावना को भी जीवित रखते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए लंगर का आयोजन
कार्यक्रम के उपरांत गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था की गई। सभी श्रद्धालु एक साथ बैठकर भोजन करते हुए उस संदेश को आत्मसात कर रहे थे, जो सिख परंपरा और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत हमें सिखाती है – समानता, सेवा और समर्पण।



