Dharmik Ramlila News : ग्रेटर नोएडा की रामलीला में भक्ति, त्याग और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम, निषादराज, केवट और भरत के प्रसंगों ने दर्शकों को किया भावविभोर, मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध नगर की DM श्रीमती मेघा रूपम अपने बच्चों के साथ मौजूद रही

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। श्री धार्मिक रामलीला कमेटी, ग्रेटर नोएडा द्वारा आयोजित भगवान श्रीराम की लीला का छठा दिन आस्था, सामाजिक संदेश और भावनाओं का जीवंत संगम बन गया। परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन और कमेटी के अध्यक्ष श्री आनंद भाटी के मार्गदर्शन में मंचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
आज के मंचन में भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के वनगमन, निषादराज और केवट प्रसंग, भरत के त्याग और खड़ाऊं की महिमा तथा चित्रकूट और पंचवटी की घटनाओं का अद्भुत चित्रण किया गया। इस मौके पर गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी श्रीमती मेघा रूपम मुख्य अतिथि, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री सत्येंद्र सिसोदिया, MLC श्री श्रीचंद शर्मा और जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा मौजूद थे। राष्ट्रीयकरणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर करण सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
वनगमन और निषादराज से प्रभु की दिव्य मित्रता
मंचन की शुरुआत उस प्रसंग से हुई जब भगवान श्रीराम माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास की ओर प्रस्थान करते हैं। रास्ते में निषादराज से उनकी भेंट होती है। मंच पर जब यह दृश्य प्रस्तुत हुआ कि निषादराज प्रभु श्रीराम को गले लगाता है और उन्हें अपना मित्र मानकर हर संभव सेवा करने की इच्छा जताता है, तो दर्शक तालियों से गूंज उठे।
यह दृश्य केवल भक्ति ही नहीं बल्कि सामाजिक समानता और भाईचारे का संदेश देता है। प्रभु श्रीराम का निषादराज के साथ संवाद इस बात का प्रमाण है कि मर्यादा पुरुषोत्तम का स्नेह केवल राजघराने तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज के हर वर्ग तक था।
केवट की अनोखी भक्ति – चरणामृत का अमर प्रसंग
लीला का सबसे भावुक पल वह रहा जब केवट ने गंगा पार कराने से पहले प्रभु श्रीराम के चरण धोने की जिद की। उसने कहा –
“प्रभु! पहले मैं आपके चरण धोऊंगा, कहीं मेरी नाव स्त्री बन गई तो मेरी रोज़ी-रोटी छिन जाएगी।”
इस प्रसंग ने पूरे पंडाल को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। केवट की यह विनती और उसका प्रभु के चरणों को धोना इस बात का प्रतीक है कि भक्त और भगवान का रिश्ता केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि प्रेम और समर्पण का होता है।
भरत का त्याग और खड़ाऊं की महिमा
मंचन का चरम उस समय आया जब भरत अयोध्या की जनता के साथ प्रभु श्रीराम को वापस लाने आते हैं। लेकिन जब प्रभु वनवास का व्रत निभाने पर अडिग रहते हैं, तो भरत उनकी खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौटते हैं।
यह दृश्य इतना भावुक था कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं। भरत का यह त्याग छोटे भाई के बड़े भाई के प्रति प्रेम और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। सिंहासन पर खड़ाऊं रखकर 14 वर्षों तक राज्य संचालन करने का निर्णय भरत को न केवल धर्मनिष्ठ बल्कि भक्ति का प्रतीक बनाता है।

चित्रकूट और पंचवटी की झलकियां
रामलीला के छठे दिन दर्शकों को चित्रकूट और पंचवटी की सुंदर झलकियां भी देखने को मिलीं। मंच पर यह दर्शाया गया कि किस प्रकार प्रभु श्रीराम ऋषि-मुनियों से संवाद करते हैं और जंगल में राक्षसों का संहार करके साधारण जीवों और साधुओं को भयमुक्त जीवन प्रदान करते हैं।
यहां यह संदेश दिया गया कि सच्चा नेतृत्व केवल शासन नहीं करता बल्कि समाज के कमजोर वर्गों और पीड़ितों को भी सुरक्षा और सम्मान प्रदान करता है।
सामाजिक संदेश और सीख
आज के मंचन का प्रमुख संदेश यह रहा कि भक्ति और सामाजिक समरसता ही रामराज्य का आधार है। निषादराज और केवट का प्रसंग यह बताता है कि समाज में छोटा-बड़ा कोई नहीं होता, सभी समान हैं। वहीं भरत का त्याग यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम त्याग और मर्यादा में ही है।

गणमान्य अतिथियों और पदाधिकारियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथि और कमेटी के पदाधिकारी मौजूद रहे।
संस्थापक: परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज, एडवोकेट राजकुमार नागर
मुख्य संरक्षक: नरेश गुप्ता
संरक्षक: सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, बालकिशन सफीपुर, धीरज शर्मा
अध्यक्ष: श्री आनंद भाटी
महासचिव: ममता तिवारी
कोषाध्यक्ष: अजय नागर
वरिष्ठ उपाध्यक्ष: महेश शर्मा बदौली, सुभाष भाटी, उमेश गौतम
अन्य पदाधिकारी: योगेंद्र भाटी, मनीष डाबर, रोशनी सिंह, चैनपाल प्रधान, अतुल आनंद (मीडिया प्रभारी), सत्यवीर मुखिया, फिरे प्रधान, पी.पी. शर्मा, महेश कमांडो, ज्योति सिंह, वीरपाल मावी, जयदीप सिंह, गीता सागर, यशपाल नागर, तेजकुमार भाटी आदि। इन सभी की उपस्थिति ने आयोजन को और भी सफल व यादगार बना दिया।
आस्था और संस्कृति का जीवंत संगम
रामलीला का छठा दिन यह संदेश देकर समाप्त हुआ कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा भी है। निषादराज की मित्रता, केवट की भक्ति और भरत का त्याग आज भी समाज को समानता, समर्पण और सेवा का पाठ पढ़ाते हैं।
जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजते इस पावन आयोजन ने ग्रेटर नोएडा की सांस्कृतिक धरोहर को और भी समृद्ध कर दिया।



