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Greater Noida News : "नन्हे स्केटर रुद्रांश ने दौड़ाई सफलता की गाड़ी, श्योराण इंटरनेशनल स्कूल के सितारे ने जीता रजत, अब सीबीएसई नेशनल गेम्स में करेंगे धमाल!", स्कूल परिवार में खुशी की लहर — “हमारे नन्हे चैंपियन पर गर्व है”, “पदक जीतना नहीं, निरंतर बेहतर बनना है लक्ष्य”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। खेल भावना, मेहनत और अनुशासन जब एक साथ मिलते हैं, तो सफलता दूर नहीं रहती — इसका शानदार उदाहरण पेश किया है श्योराण इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा के चौथी कक्षा के छात्र रुद्रांश राज ने। रुद्रांश ने सीबीएसई नार्थ जोन-1 क्लस्टर XIX रोलर स्केटिंग टूर्नामेंट 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अंडर-9 ईयर्स क्वाड्स रिंग रेस (500 मीटर) में रजत पदक अपने नाम किया है।
अब वह गुरुग्राम में आयोजित होने वाले सीबीएसई नेशनल गेम्स में ग्रेटर नोएडा का प्रतिनिधित्व करेंगे — और पूरा शहर इस छोटे चैंपियन पर गर्व कर रहा है।

रोलर व्हील्स पर दौड़ता सपना” — मेहनत से रचा इतिहास

रुद्रांश राज की यह उपलब्धि किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि उनकी लगातार मेहनत, आत्मविश्वास और समर्पण की कहानी है। सिर्फ 9 साल की उम्र में उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की है, वह कई अनुभवी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

हर सुबह सूर्योदय से पहले और शाम को सूर्यास्त के बाद — रुद्रांश शहीद विजय सिंह पथिक स्टेडियम, ग्रेटर नोएडा में अपने कोच चरण सिंह के मार्गदर्शन में दो-दो घंटे अभ्यास करते हैं। स्कूल में भी वे अपने प्रशिक्षक कोच राजा से तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

यह दिनचर्या उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।
जहां दूसरे बच्चे सुबह देर तक सोते हैं, वहीं रुद्रांश स्केट्स पहनकर ट्रैक पर उतर चुके होते हैं — यही अनुशासन उनकी सफलता का मूल मंत्र है।

खेल है परिवार की परंपरा” — माता-पिता ही हैं सबसे बड़े प्रेरक

रुद्रांश का खेलों के प्रति लगाव विरासत में मिला है।
उनके पिता शिवालक राज स्वयं एक उत्कृष्ट खिलाड़ी रह चुके हैं और वर्तमान में एक प्रशिक्षक (कोच) के रूप में युवाओं को मार्गदर्शन दे रहे हैं।
वहीं उनकी माता पूजा राज भी एक कुशल स्पोर्ट्स कोच हैं।

घर में खेल को केवल शौक नहीं, बल्कि जीवन का अनुशासन माना जाता है।
ऐसे वातावरण में पले-बढ़े रुद्रांश ने बहुत छोटी उम्र में ही यह समझ लिया कि खेल सिर्फ जीतने का नाम नहीं, बल्कि सीखने, गिरने और फिर उठ खड़े होने की कला है।

रुद्रांश के पिता ने बताया “हमने कभी रुद्रांश पर दबाव नहीं डाला, बल्कि उसे प्रोत्साहित किया कि वह खेल को आनंद और जुनून के साथ खेले। आज उसकी मेहनत का फल हम सबके लिए गर्व का विषय है।”

पदक जीतना नहीं, निरंतर बेहतर बनना है लक्ष्य”

रुद्रांश ने कहा कि उनका सपना है भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना।
उनकी आंखों में ओलंपिक पदक का सपना झलकता है।
वह कहते हैं “हर बार जब मैं ट्रैक पर उतरता हूं, तो सोचता हूं कि मुझे कल से बेहतर बनना है। पदक जीतना अच्छा लगता है, लेकिन असली मजा तो अपनी सीमाओं को तोड़ने में है।”

उनकी इस सोच ने ही उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाया है।
रुद्रांश का यह आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प उन्हें न सिर्फ एक सफल खिलाड़ी बनाएगा, बल्कि आने वाले समय में भारत के खेल जगत का चमकता सितारा भी।

स्कूल परिवार में खुशी की लहर — “हमारे नन्हे चैंपियन पर गर्व है”

श्योराण इंटरनेशनल स्कूल परिवार इस उपलब्धि पर बेहद उत्साहित है।
स्कूल की प्रधानाचार्या ने कहा “रुद्रांश की सफलता हम सभी के लिए प्रेरणा है। उसने दिखा दिया कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन जुनून बड़ा होना चाहिए।”

स्कूल में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने मिलकर उनका सम्मान किया और ‘रुद्रांश – द प्राइड ऑफ ग्रेटर नोएडा’ का नारा लगाया।
कोच चरण सिंह और राजा ने भी कहा कि रुद्रांश का अनुशासन और निरंतर अभ्यास उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

ग्रेटर नोएडा के बच्चों के लिए बनी प्रेरणा

रुद्रांश राज अब सिर्फ अपने स्कूल का नहीं, बल्कि पूरे ग्रेटर नोएडा का गर्व बन चुके हैं।
उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य बच्चों को भी खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
स्पोर्ट्स प्रेमियों का कहना है कि रुद्रांश जैसे खिलाड़ी यह साबित कर रहे हैं कि यदि सही प्रशिक्षण और समर्थन मिले, तो ग्रेटर नोएडा जैसे शहर से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं।

छोटा कदम, बड़ी उड़ान

रुद्रांश की सफलता केवल एक रजत पदक की कहानी नहीं, बल्कि एक अनुशासन, परिवारिक समर्थन और आत्मविश्वास की मिसाल है। उन्होंने यह साबित किया है कि उम्र चाहे कितनी भी कम हो, यदि दिल में जुनून और दिमाग में लक्ष्य हो — तो सफलता कदम चूमती है।

अब जब वह सीबीएसई नेशनल गेम्स के लिए चयनित हो चुके हैं, पूरा ग्रेटर नोएडा उनकी अगली दौड़ का इंतजार कर रहा है जहां यह नन्हा स्केटर एक बार फिर साबित करेगा कि “विजेता वह नहीं जो हर बार जीतता है, बल्कि वह है जो कभी हार नहीं मानता।

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Raftar Today
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