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Kailash Institute News : “सिर्फ पढ़ाई नहीं, ‘हाथों की जिम्मेदारी’ भी सिखा रहा ग्रेटर नोएडा!, विश्व हाथ स्वच्छता दिवस पर कैलाश इंस्टीट्यूट में जागरूकता का अनोखा संगम, छात्रों ने नाटक-भाषण से दिया हेल्थ का बड़ा संदेश”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ते संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच एक छोटी सी आदत—हाथों की स्वच्छता—आज पूरे समाज के लिए बड़ी सुरक्षा कवच बनकर उभर रही है। इसी महत्वपूर्ण संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा स्थित कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज में विश्व हाथ स्वच्छता दिवस के अवसर पर एक प्रभावशाली और जागरूकता से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि समाज को भी एक बेहद जरूरी संदेश देने में सफल साबित हुआ।

स्वच्छ हाथ, स्वस्थ जीवन—युवाओं ने संभाली जागरूकता की कमान
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसका संचालन संस्थान के बीपीटी (बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी) के विद्यार्थियों ने पूरी जिम्मेदारी और उत्साह के साथ किया। छात्रों ने यह साबित कर दिया कि नई पीढ़ी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बखूबी समझती है। इस दौरान विद्यार्थियों ने नाटक, भाषण और प्रायोगिक प्रदर्शन के माध्यम से यह बताया कि सही तरीके से हाथ धोना केवल एक आदत नहीं, बल्कि संक्रमण से बचाव का सबसे सशक्त हथियार है।
नाटक प्रस्तुतियों में रोजमर्रा की जिंदगी के ऐसे दृश्य दिखाए गए, जहां लापरवाही से हाथ न धोने के कारण बीमारियां फैलती हैं। वहीं भाषणों के माध्यम से छात्रों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ यह समझाया कि बैक्टीरिया और वायरस किस तरह हमारे हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं।

संस्थान के शीर्ष प्रबंधन की गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में संस्थान के प्रबंध निदेशक संदीप गोयल और अकादमिक निदेशक बिंदिया गोयल की विशेष उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।
उनकी मौजूदगी ने छात्रों का मनोबल बढ़ाया और यह संदेश भी दिया कि संस्थान केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता को भी समान महत्व देता है।

“हाथों की स्वच्छता सामाजिक जिम्मेदारी”—बिंदिया गोयल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अकादमिक निदेशक बिंदिया गोयल ने कहा कि—“हाथों की स्वच्छता केवल व्यक्तिगत आदत नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी है। अगर हम अपने हाथ साफ रखते हैं, तो हम न केवल खुद को बल्कि अपने परिवार और समाज को भी कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।”
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया ने हाथों की स्वच्छता के महत्व को और अधिक गहराई से समझा है, लेकिन इस आदत को केवल संकट के समय तक सीमित न रखकर इसे जीवनशैली का स्थायी हिस्सा बनाना आवश्यक है।

वैज्ञानिक तरीके से हाथ धोने की तकनीक का प्रदर्शन
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा सही तरीके से हाथ धोने की पूरी प्रक्रिया का लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी किया गया। इसमें बताया गया कि— कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना जरूरी है
साबुन का सही उपयोग करना चाहिए
हाथों की उंगलियों के बीच, नाखूनों के नीचे और अंगूठे को भी अच्छी तरह साफ करना चाहिए
इस प्रायोगिक प्रदर्शन ने उपस्थित लोगों को व्यवहारिक ज्ञान दिया, जिसे वे अपने दैनिक जीवन में आसानी से अपना सकते हैं।

छात्रों की अपील—“छोटी आदत, बड़ा बदलाव”
बीपीटी के विद्यार्थियों ने समाज से अपील करते हुए कहा कि— “भोजन से पहले, शौचालय के उपयोग के बाद और बाहर से आने पर हाथ धोना एक अनिवार्य आदत बनानी चाहिए। यह छोटी सी आदत हमें कई बड़ी बीमारियों से बचा सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि हाथ धोना एक ऐसा उपाय है, जो सबसे सरल, सस्ता और प्रभावी है, लेकिन अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।

स्वच्छता से स्वास्थ्य, स्वास्थ्य से सशक्त समाज
इस कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। जब हर व्यक्ति अपने स्तर पर स्वच्छता को अपनाता है, तभी एक स्वस्थ और मजबूत समाज का निर्माण संभव होता है।
कैलाश इंस्टीट्यूट का यह प्रयास इस दिशा में एक सराहनीय कदम है, जो छात्रों को केवल पेशेवर ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बना रहा है।

संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित छात्रों, शिक्षकों और अतिथियों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे हाथों की स्वच्छता को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएंगे और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।
यह आयोजन न केवल एक शैक्षणिक गतिविधि रहा, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम भी बना।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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