Corruption Free India News : “धरती का जल सूखा, तो शहर की रफ्तार भी रुकेगी!”, भूजल संकट पर फूटा जनाक्रोश, 11 मई से सूरजपुर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान, बिल्डरों पर गंभीर आरोप, दो साल से शिकायत, लेकिन कार्रवाई शून्य

दनकौर/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदलते नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र अब एक नए संकट की दहलीज पर खड़े दिखाई दे रहे हैं—भूजल का तेजी से घटता स्तर। विकास की चकाचौंध के बीच जमीन के भीतर का जल भंडार लगातार खाली हो रहा है, और अब इस मुद्दे को लेकर जनआंदोलन की रूपरेखा भी तैयार हो चुकी है। करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने इस गंभीर समस्या के खिलाफ निर्णायक कदम उठाते हुए 11 मई 2026 से जिला मुख्यालय सूरजपुर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने की घोषणा की है।
बैठक में बना बड़ा फैसला, आंदोलन की ठोस रणनीति तैयार
मंगलवार को दनकौर क्षेत्र के नियाना सलेमपुर गांव में आयोजित एक अहम बैठक में संगठन के संस्थापक एवं वरिष्ठ समाजसेवी चौधरी प्रवीण भारतीय ने इस आंदोलन का औपचारिक ऐलान किया। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही, जिन्होंने एक स्वर में इस आंदोलन को समर्थन देने का भरोसा दिया।
बैठक के दौरान यह साफ किया गया कि अब केवल ज्ञापन और शिकायतों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जन दबाव के माध्यम से प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर किया जाएगा।
“विकास के नाम पर जल का दोहन”—बिल्डरों पर गंभीर आरोप
चौधरी प्रवीण भारतीय ने आरोप लगाया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हो रहे हैं, जिनमें भूजल का अनियंत्रित दोहन किया जा रहा है। उन्होंने कहा— “बिल्डर विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।”
उनका कहना है कि कई निर्माण परियोजनाओं में अनुमति के बिना या तय मानकों से अधिक भूजल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भविष्य में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है।
दो साल से शिकायत, लेकिन कार्रवाई शून्य
संगठन ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से लगातार जिलाधिकारी, भूजल विभाग और प्रदेश सरकार को शिकायतें भेज रहा है, लेकिन अभी तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
यही वजह है कि अब संगठन ने शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी विरोध के रूप में भूख हड़ताल का रास्ता चुना है।
“एक-एक बूंद के लिए तरसेगा शहर”—चेतावनी
बैठक में वक्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।
उन्होंने कहा— भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है
वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) का सही पालन नहीं हो रहा
हरित क्षेत्र घटते जा रहे हैं
इन सभी कारणों से भविष्य में पीने के पानी का संकट विकराल रूप ले सकता है, जहां लोगों को एक-एक बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
सूरजपुर बनेगा आंदोलन का केंद्र
संगठन ने स्पष्ट किया कि 11 मई से शुरू होने वाली भूख हड़ताल जिला मुख्यालय सूरजपुर में आयोजित की जाएगी, ताकि प्रशासन का ध्यान सीधे इस मुद्दे पर केंद्रित हो सके।
यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक—
भूजल दोहन पर सख्त नियंत्रण नहीं लगाया जाता
दोषी बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती
जल संरक्षण के ठोस उपाय लागू नहीं किए जाते
विकास बनाम पर्यावरण—संतुलन जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।
यदि बिना योजना के निर्माण कार्य जारी रहे और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन होता रहा, तो यह विकास लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रहेगा।
इस संदर्भ में यह आंदोलन प्रशासन और नीति-निर्माताओं के लिए एक जागरूकता का संकेत भी है।
क्या बदलेगी तस्वीर? अब सबकी नजर प्रशासन पर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस आंदोलन के बाद प्रशासन जागेगा और ठोस कदम उठाएगा, या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
फिलहाल, 11 मई से शुरू होने वाली इस भूख हड़ताल ने जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल जरूर पैदा कर दी है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का मिला समर्थन
नियाना सलेमपुर गांव में आयोजित बैठक में स्थानीय ग्रामीणों ने आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया। इस दौरान बलराज हूंण, रविंद्र बरसात, गजराज आर्य, सुरेंद्र नागर, यशराज नागर, सतपाल भाटी, डॉ. राजपाल सिंह, पुष्पेंद्र भाटी, सूबेदार ब्रह्मपाल सिंह, इंद्राज सिंह, विजेंद्र प्रधान, देवी राम नागर, सुभाष हवलदार, हेम सिंह आर्य, जोगिंदर सिंह, अनिल बैसला, देवेंद्र भाटी, हरवीर भाटी, मोहित नागर समेत कई लोग मौजूद रहे।
सभी ने एकजुट होकर कहा कि यह केवल एक संगठन का आंदोलन नहीं, बल्कि पूरे समाज की जरूरत है।



