IBA Industry News : “कर्तव्य भवन में गूंजा MSME एक्सपोर्टर्स का दर्द, डॉ. खुशबू सिंह ने मंत्रालय के सामने रखीं निर्यात जगत की बड़ी चुनौतियां, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को लेकर उठी मजबूत आवाज”, भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत
निर्यातकों की परेशानियों पर दिल्ली में मंथन, MSME मंत्रालय के साथ हाईलेवल बैठक में उठे लॉजिस्टिक्स, अनुपालन और नीति से जुड़े अहम मुद्दे

नई दिल्ली, रफ़्तार टूडे। देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जहां MSME मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और निर्यात क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच गहन चर्चा हुई। यह बैठक केवल एक औपचारिक संवाद नहीं थी, बल्कि उन हजारों छोटे और मध्यम निर्यातकों की आवाज थी, जो लंबे समय से प्रक्रियात्मक जटिलताओं, बढ़ती लागत, लॉजिस्टिक्स समस्याओं और अनुपालन संबंधी कठिनाइयों से जूझ रहे हैं।
8 मई 2026 को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में आर्या फैशन्स की संस्थापक एवं सीईओ तथा आईबीए की उपाध्यक्षा डॉ. खुशबू सिंह ने प्रमुख रूप से भाग लिया। उन्होंने MSME निर्यातकों की जमीनी समस्याओं को मंत्रालय के समक्ष मजबूती से रखा और कई व्यावहारिक सुझाव भी दिए। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि यदि भारत को वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा में और आगे बढ़ाना है तो MSME सेक्टर को नीति और प्रक्रियाओं के स्तर पर और अधिक मजबूत बनाना होगा।
MSME सेक्टर: भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़
बैठक के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि भारत की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। देश के लाखों छोटे उद्योग, स्टार्टअप और निर्यातक न केवल करोड़ों लोगों को रोजगार दे रहे हैं बल्कि भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का काम भी कर रहे हैं।
हालांकि, निर्यात से जुड़े कई MSME उद्यमी अभी भी जटिल नियमों, भारी डॉक्यूमेंटेशन, परिवहन लागत, पोर्ट प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय अनुपालन मानकों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यही वजह रही कि इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि इसमें मंत्रालय और उद्योग जगत के बीच सीधे संवाद का अवसर मिला।
डॉ. खुशबू सिंह ने मंत्रालय के सामने रखीं जमीनी समस्याएं
बैठक में डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि MSME निर्यातकों को अक्सर छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। उन्होंने निर्यात संचालन के दौरान आने वाली कई व्यावहारिक दिक्कतों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इन समस्याओं को सरल बनाया जाए तो भारत का MSME सेक्टर और तेजी से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि कई छोटे निर्यातकों के पास बड़ी कंपनियों जैसी संसाधन क्षमता नहीं होती, इसलिए उन्हें सरकारी प्रक्रियाओं में अतिरिक्त सहयोग और सरलता की आवश्यकता होती है। लॉजिस्टिक्स लागत में लगातार वृद्धि, अंतरराष्ट्रीय बाजार के बदलते नियम, दस्तावेजी औपचारिकताएं और निर्यात मंजूरी की लंबी प्रक्रिया छोटे उद्यमियों के लिए चुनौती बनती जा रही है। डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि मंत्रालय द्वारा उद्योग प्रतिनिधियों को सीधे संवाद के लिए बुलाना एक सकारात्मक कदम है। इससे जमीनी स्तर की वास्तविक समस्याएं सरकार तक पहुंचती हैं और नीति निर्माण अधिक प्रभावी बनता है।
मंत्रालय ने दिया सकारात्मक आश्वासन
बैठक के दौरान MSME मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्यातकों द्वारा रखे गए सुझावों और समस्याओं को गंभीरता से सुना। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि मंत्रालय MSME निर्यात क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है और बैठक में उठाए गए बिंदुओं की गहन समीक्षा की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर सुधार कर रही है। विशेष रूप से MSME निर्यातकों के लिए प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और सरल बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि आने वाले समय में निर्यात प्रक्रिया को तेज करने, लागत कम करने और छोटे उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नई योजनाएं और नीतिगत बदलाव किए जा सकते हैं।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की नियमित संवाद बैठकें सरकार और उद्योग जगत के बीच विश्वास को मजबूत करती हैं। MSME क्षेत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता यही है कि नीतियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ वास्तविक उद्यमियों तक आसानी से पहुंचे।
निर्यातकों का कहना है कि यदि प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाए, डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत किया जाए और छोटे उद्यमियों को प्रशिक्षण व तकनीकी सहायता मिले, तो भारत का निर्यात क्षेत्र आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत
कर्तव्य भवन में आयोजित यह बैठक इस बात का संकेत मानी जा रही है कि केंद्र सरकार MSME निर्यातकों की समस्याओं को गंभीरता से सुन रही है और समाधान की दिशा में सक्रिय है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि इस प्रकार की रचनात्मक बैठकों से भारत के निर्यात सेक्टर को नई गति मिलेगी और छोटे उद्योगों के लिए वैश्विक बाजार में अवसर और बढ़ेंगे।
बैठक के अंत में डॉ. खुशबू सिंह ने मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार और उद्योग जगत के बीच लगातार संवाद ही भारत को वैश्विक व्यापार में और अधिक सशक्त बना सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि MSME मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयास भविष्य में निर्यातकों के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।
MSME सेक्टर को लेकर बढ़ी उम्मीदें
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकार और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच इसी तरह तालमेल बना रहा तो भारत का MSME निर्यात क्षेत्र आने वाले समय में विश्व स्तर पर और मजबूत पहचान बना सकता है। इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग में भी इजाफा होगा।



