Kailash Institute News : “माँ सिर्फ रिश्ता नहीं, पूरी दुनिया होती है…” कैलाश इंस्टीट्यूट में मदर्स डे बना भावनाओं का महापर्व, छात्रों की आंखें हुईं नम और तालियों से गूंज उठा पूरा सभागार, “माँ परिवार की नहीं, राष्ट्र निर्माण की पहली गुरु” — संतोष गोयल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। जहां एक ओर आधुनिक जीवन की भागदौड़ इंसान को रिश्तों से दूर करती जा रही है, वहीं ग्रेटर नोएडा स्थित कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज में आयोजित “मदर्स डे समारोह” ने एक बार फिर यह एहसास करा दिया कि दुनिया का सबसे अनमोल रिश्ता मां का होता है। मातृत्व, प्रेम, त्याग, संस्कार और समर्पण को समर्पित इस विशेष आयोजन ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह मां के प्रति सम्मान, संवेदना और कृतज्ञता का जीवंत उत्सव बन गया।
10 मई 2026 को आयोजित इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की सामूहिक प्रार्थना के साथ हुई। जैसे ही सभागार में “वंदे मातरम्” और मातृत्व को समर्पित गीतों की स्वर लहरियां गूंजीं, पूरा वातावरण आध्यात्मिक और भावनात्मक ऊर्जा से भर उठा। छात्रों, शिक्षकों और संस्थान परिवार ने एक स्वर में मां के योगदान को नमन किया।
“माँ परिवार की नहीं, राष्ट्र निर्माण की पहली गुरु” — संतोष गोयल
कार्यक्रम में संस्थान की अध्यक्षा संतोष गोयल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि मां केवल एक परिवार को संभालने वाली महिला नहीं होती, बल्कि वह समाज और राष्ट्र निर्माण की पहली शिक्षक होती है। उन्होंने कहा—
“माँ अपने बच्चों को केवल जन्म नहीं देती, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन, त्याग और जीवन जीने की दिशा भी देती है। जिस घर में मां का सम्मान होता है, वहां हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।”
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने जीवन में चाहे जितनी ऊंचाइयों तक पहुंच जाएं, लेकिन अपनी मां के संघर्ष और त्याग को कभी न भूलें। उनके संबोधन के दौरान कई छात्र-छात्राएं भावुक दिखाई दिए।
“माँ के आशीर्वाद से ही सफलता का रास्ता खुलता है” — संदीप गोयल
संस्थान के प्रबंध निदेशक संदीप गोयल ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीक और करियर की दौड़ में कहीं न कहीं पारिवारिक मूल्यों से दूर होती जा रही है। ऐसे समय में मदर्स डे जैसे आयोजन युवाओं को अपने परिवार और विशेषकर माता-पिता के महत्व को समझाने का माध्यम बनते हैं।
उन्होंने कहा—“जीवन में कितनी भी बड़ी सफलता मिल जाए, लेकिन मां के आशीर्वाद के बिना वह अधूरी रहती है। हमें अपनी व्यस्त दिनचर्या में भी माता-पिता की सेवा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि संस्कारित परिवार ही एक मजबूत और सशक्त समाज की नींव रखते हैं। यदि युवा पीढ़ी अपने माता-पिता के प्रति संवेदनशील रहेगी, तो समाज में नैतिकता और मानवीय मूल्यों की मजबूती बनी रहेगी।
भावुक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, छात्रों ने मां को किया समर्पित
समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने मां को समर्पित गीत, कविता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। कुछ छात्रों ने अपनी मां के संघर्ष और प्रेरणा से जुड़े व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जिन्हें सुनकर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
एक छात्रा ने मंच से कहा—“जब पूरी दुनिया साथ छोड़ देती है, तब भी मां अपने बच्चे का हाथ नहीं छोड़ती।”
इस भावुक प्रस्तुति के बाद कई शिक्षकों और छात्रों की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने वाला संदेश था।
नर्सिंग छात्रों को दिया सेवा और संवेदना का संदेश
क्योंकि यह संस्थान नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा से जुड़ा है, इसलिए कार्यक्रम में छात्रों को यह भी समझाया गया कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले विद्यार्थियों के लिए संवेदनशीलता और करुणा सबसे बड़ा गुण है।
संस्थान प्रबंधन ने कहा कि जिस तरह एक मां अपने बच्चे की बिना स्वार्थ सेवा करती है, उसी भावना को नर्सिंग पेशे में भी अपनाना आवश्यक है।
छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा गया कि एक अच्छा स्वास्थ्यकर्मी वही होता है, जिसमें सेवा, धैर्य और मानवीय संवेदना हो। मदर्स डे का यह संदेश उनके पेशेवर जीवन में भी उपयोगी साबित होगा।
माताओं के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना
कार्यक्रम के अंत में संस्थान परिवार द्वारा सभी माताओं के उत्तम स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना की गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में माता-पिता के सम्मान और सेवा को प्राथमिकता देंगे।
पूरे कार्यक्रम के दौरान सभागार में सकारात्मक ऊर्जा और भावनात्मक जुड़ाव का माहौल बना रहा। छात्रों ने अपनी माताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें विशेष धन्यवाद संदेश भी समर्पित किए।
मदर्स डे बना संस्कार और संवेदनाओं का उत्सव
आज के समय में जब पारिवारिक रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, ऐसे आयोजन समाज को यह याद दिलाते हैं कि मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति होती है। कैलाश इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित यह समारोह शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों को भी बढ़ावा देने वाला एक प्रेरणादायी आयोजन साबित हुआ।



