Greater Noida Authority News : "हरियाली पर नहीं चलेगा हथौड़ा!", जैतपुर-वैशपुर की ग्रीन बेल्ट से हटाया अतिक्रमण, प्राधिकरण की सख्ती से हड़कंप, अवैध निर्माण चंद मिनटों में जमींदोज, सीईओ NG रवि कुमार का साफ संदेश

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
हरियाली बचाओ, अतिक्रमण हटाओ – इस नारे को अब प्रशासन ने ज़मीन पर उतार दिया है।
सीईओ एन. जी. रवि कुमार की अगुवाई में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ग्रीन बेल्ट में अतिक्रमण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
शनिवार को जैतपुर-वैशपुर क्षेत्र की ग्रीन बेल्ट में बनाए गए अवैध निर्माणों को उद्यान विभाग की टीम ने ध्वस्त कर दिया।
हरियाली की जमीन पर कब्ज़ा नहीं चलेगा: सीईओ NG रवि कुमार का साफ संदेश
प्राधिकरण के सीईओ एन. जी. रवि कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि हरियाली के नाम पर कब्जा या निर्माण बर्दाश्त नहीं होगा।
उन्होंने ओएसडी गुंजा सिंह को ग्रीन बेल्ट की निगरानी और अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
सीईओ ने चेतावनी दी:
“अगर कोई दोबारा ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण करता पाया गया, तो न सिर्फ कब्जा हटेगा बल्कि संबंधित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी पर भी कार्रवाई होगी।”
जैतपुर-वैशपुर में चला बुलडोजर, अवैध निर्माण चंद मिनटों में जमींदोज
शनिवार सुबह जब उद्यान विभाग की टीम जेसीबी लेकर जैतपुर और वैशपुर की ग्रीन बेल्ट में पहुंची, तो वहां कुछ अस्थायी निर्माण दिखाई दिए।
सूचना मिलते ही अतिक्रमण हटाओ टीम ने बिना देर किए मौके पर कार्रवाई की और कुछ ही मिनटों में अवैध झोपड़ियाँ, दीवारें और शेड गिरा दिए गए।
स्थानीय लोग पहले तो अवाक रह गए, लेकिन फिर उन्होंने प्राधिकरण के कदम की सराहना की।
क्या है ग्रीन बेल्ट और क्यों है जरूरी?
ग्रीन बेल्ट यानी शहर की हरियाली की सांसें।
यह वह हिस्सा होता है जिसे विकास योजना में विशेष रूप से हरियाली, पौधारोपण, वायुमंडलीय शुद्धता और जैव विविधता के लिए संरक्षित किया गया होता है।
लेकिन हाल के वर्षों में ग्रीन बेल्ट की ज़मीन पर अवैध निर्माण, टपरी, अस्थायी दुकानों, शेड और गोदामों के रूप में कब्ज़ा तेजी से बढ़ा है।
क्यों बढ़ रहा है अतिक्रमण?
- आबादी बढ़ने से जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं।
- कई स्थानीय लोग ग्रीन बेल्ट को “खाली जमीन” समझकर कब्जा कर लेते हैं।
- प्रशासनिक लापरवाही और मॉनिटरिंग की कमी से यह अतिक्रमण वर्षों तक बना रहता है।
- कई बार राजनीतिक संरक्षण के कारण प्राधिकरण की टीमें कार्रवाई से कतराती थीं।
लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
अब जीरो टॉलरेंस नीति: ‘अब ग्रीन बेल्ट नहीं बचेगा किसी भी अतिक्रमणकारी के कब्जे में’
ओएसडी गुंजा सिंह ने उद्यान विभाग को निर्देशित किया है कि:
- शहर के सभी सेक्टरों में ग्रीन बेल्ट का भौतिक निरीक्षण हो।
- ड्रोन से भी निगरानी की जाए।
- अतिक्रमण की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया:
“अगर भविष्य में कोई नया निर्माण होता पाया गया, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।”
कई जगहों पर तैयार हो रही है कार्ययोजना
सूत्रों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों जैसे बीटा-2, सेक्टर पी-3, सेक्टर ओमेगा, टेकज़ोन और डेल्टा में भी ग्रीन बेल्ट पर कब्जे की शिकायतें मिल रही हैं।
प्राधिकरण अब जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से एक समन्वित योजना बना रहा है ताकि अतिक्रमण को स्थायी रूप से हटाया जा सके।
हरियाली की हत्या नहीं होने देंगे: स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों की प्रतिक्रिया
ग्रेटर नोएडा के पर्यावरण कार्यकर्ता और RWA प्रतिनिधि योगेंद्र शर्मा ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा:
“ग्रीन बेल्ट न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि यह हमारे बच्चों का भविष्य भी है। इस पर कब्जा मतलब हरियाली की हत्या है।”
उन्होंने बताया कि कई सोसायटीज और RWA अब ‘गोद लो ग्रीन बेल्ट’ अभियान शुरू करने की योजना बना रही हैं, जिससे आम जनता सीधे इसमें शामिल हो।
कैसे करें शिकायत? – प्राधिकरण ने जारी किया पोर्टल और हेल्पलाइन
अब अगर किसी नागरिक को कहीं भी ग्रीन बेल्ट में निर्माण होता दिखे, तो वे निम्न माध्यमों से सूचना दे सकते हैं:
- 📞 प्राधिकरण हेल्पलाइन: 1800-180-3030
- 🌐 ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की वेबसाइट पर फोटो अपलोड करें।
- 📲 My GrNoida ऐप के जरिए GPS लोकेशन के साथ शिकायत दर्ज करें।
प्राधिकरण ने कहा कि “गोपनीयता बनाए रखी जाएगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
ग्रीन बेल्ट की निगरानी के लिए तकनीक का सहारा
प्राधिकरण अब सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन कैमरा सर्वे, और GPS मैपिंग से यह सुनिश्चित करने जा रहा है कि भविष्य में कहीं भी ग्रीन बेल्ट की भूमि पर कब्जा न हो सके।
इसके अलावा हरियाली बढ़ाने के लिए ‘मिनी फॉरेस्ट’, योग पार्क, और औषधीय पौधों की नर्सरी विकसित करने की भी योजना है।
अभियान को मिले जनसमर्थन तो बढ़ेगी सफलता
प्राधिकरण का कहना है कि यह सिर्फ सरकारी कार्रवाई नहीं, जनसहभागिता वाला जनांदोलन बनना चाहिए।
जब आम नागरिक अपनी हरियाली को बचाने के लिए सजग होंगे, तभी यह अभियान टिकाऊ बनेगा।
📢 निष्कर्ष: अब अतिक्रमण नहीं, हरियाली ही होगी ग्रेटर नोएडा की पहचान!
ग्रीन बेल्ट पर कब्जा हटाना केवल निर्माण गिराने भर की कार्रवाई नहीं है,
बल्कि यह शहर के भविष्य, वायु गुणवत्ता, और संतुलित जीवन शैली के लिए उठाया गया आवश्यक कदम है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की इस सख्ती से एक बात तो साफ है –
अब कोई भी ग्रीन ज़ोन को ग्रे नहीं बना पाएगा!
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