Kaveri Builder News : दीवारें तोड़ीं, बाउंसर बुलाए… अब सेक्टरवासी चुप नहीं बैठेंगे!", "जब दीवारें भी चुप न रहीं, तो डेल्टा-1 ने उठाई आवाज़!", ग्रेटर नोएडा में बिल्डर की मनमानी पर भड़के लोग, सांसद तक पहुंचा मामला, आंदोलन की चेतावनी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।।
उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर ग्रेटर नोएडा के डेल्टा-1 सेक्टर में इन दिनों नागरिक बनाम बिल्डर की जबरदस्त टकराहट चल रही है। यहां कावेरी बिल्डर द्वारा नियमों को दरकिनार करते हुए प्राधिकरण की दीवार तोड़ने और बाउंसर बुलाकर लोगों को धमकाने की घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।
नतीजा—अब सेक्टरवासी चुप नहीं बैठेंगे। सांसद से मिलकर शिकायत की गई है, और चेतावनी दी गई है कि अगर समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन तय है।
“दीवार क्या टूटी, भरोसा भी दरक गया!” — प्राधिकरण की दीवार को तोड़ बिल्डर ने बढ़ाई हलचल
डेल्टा-1 सेक्टर में रहने वाले लोग उस समय चौंक गए जब उन्होंने देखा कि उनके सेक्टर और कावेरी बिल्डर के प्रोजेक्ट के बीच की सीमांकन दीवार को जेसीबी मशीन से गिरा दिया गया।
लोगों का आरोप है कि बिल्डर रास्ता निकालने के लिए दीवार गिरा रहा है, ताकि अपनी सुविधा के लिए अवैध एंट्री प्वाइंट बना सके।
यह दीवार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसे तोड़ना सीधे-सीधे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना है।
“बिल्डर की गुंडागर्दी नहीं चलेगी!” — सेक्टरवासियों को धमकाने के लिए बुलाए गए बाउंसर
दीवार टूटने की सूचना मिलते ही सेक्टरवासी मौके पर पहुंचे और बिल्डर से विरोध जताया, लेकिन बिल्डर ने बातचीत के बजाय बाहर से बाउंसर बुलाकर सेक्टरवासियों को धमकाना शुरू कर दिया।
इस पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।
स्थानीय निवासी गुस्से में भरे थे और असुरक्षित महसूस कर रहे थे।
उन्होंने तुरंत आरडब्ल्यूए की आपात बैठक बुलाई और सांसद डॉ. महेश शर्मा से मिलकर शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया।
सांसद डॉ. महेश शर्मा से मिलकर मांगा न्याय, अधिकारियों से की तत्काल कार्रवाई की मांग
डेल्टा-1 के दर्जनों निवासी, वरिष्ठ नागरिक, समाजसेवी और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधि सांसद डॉ. महेश शर्मा के कार्यालय पहुंचे और उन्हें पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कैसे एक बिल्डर ने प्राधिकरण की दीवार को तोड़कर गैरकानूनी निर्माण करने की कोशिश की और जब इसका विरोध हुआ, तो बाउंसरों के जरिए लोगों को डराने की कोशिश की गई।
सांसद डॉ. महेश शर्मा ने इस घटना को गंभीरता से लिया और कहा कि कोई भी व्यक्ति या बिल्डर कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्राधिकरण और पुलिस से बात कर त्वरित कार्रवाई करवाई जाएगी।
प्राधिकरण, विधायक और पुलिस को दी गई लिखित शिकायतें, कार्रवाई की मांग
सिर्फ सांसद ही नहीं, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ, विधायक और पुलिस कमिश्नरेट को भी सेक्टरवासियों द्वारा ज्ञापन सौंपा गया है।
शिकायत में मांग की गई है कि:
- दीवार को तत्काल पुनर्निर्मित किया जाए
- बिल्डर पर कानूनी कार्रवाई हो
- बाउंसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो
- क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाई जाए
- बिल्डर की अनुमति पर पुनः जांच हो

“अबकी बार कानून की मांग!” — आंदोलन की चेतावनी, करप्शन फ्री इंडिया संगठन भी उतरा साथ
करप्शन फ्री इंडिया संगठन के कोर कमेटी सदस्य मास्टर दिनेश नागर और संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय ने साफ कहा कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन जनआंदोलन शुरू करेगा।
उन्होंने कहा कि बिल्डर ने जो किया है, वो केवल दीवार नहीं तोड़ना था, बल्कि प्रशासन पर भरोसे को तोड़ना था।
इन नागरिकों ने दी आवाज़ को मजबूती, एकता का प्रदर्शन
इस मौके पर डेल्टा-1 के जिन प्रमुख नागरिकों ने मोर्चा संभाला, उनमें शामिल हैं:
- मुकेश दीक्षित
- जितेंद्र भाटी
- ऋषिपाल
- विनोद नगर
- कमल सिंह
- सरदार सरबजीत
- धीरज मीणा
- मुकेश शर्मा
- श्यामवीर भाटी
- आशीष चौहान
- नवीन शर्मा
- रिषेनर यादव
- गजेंद्र सिंह
इन सबने मिलकर स्पष्ट कर दिया कि “अबकी बार दबंगई नहीं चलेगी”।
कानून भी कहता है: सार्वजनिक संपत्ति से छेड़छाड़ = अपराध
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की नीति के अनुसार:
- किसी भी सार्वजनिक ढांचे को तोड़ना अपराध की श्रेणी में आता है
- बिना पूर्व अनुमति कोई बिल्डर अवैध रास्ता या संशोधन नहीं कर सकता
- आम नागरिकों को धमकाना, डराना या बाउंसर भेजना गंभीर आपराधिक कृत्य है
यदि यह सब साबित होता है तो बिल्डर के खिलाफ भारी जुर्माना, एनओसी रद्दीकरण और निर्माण कार्य रोकने के आदेश तक जारी हो सकते हैं।
अब सवाल प्राधिकरण पर – कार्रवाई कब होगी?
सेक्टरवासी पूछ रहे हैं कि:
- दीवार टूटने के बाद प्राधिकरण चुप क्यों है?
- क्या बिल्डर प्राधिकरण से भी बड़ा हो गया है?
- कब तक आम नागरिकों की आवाज़ को नजरअंदाज़ किया जाएगा?
लोगों की मांग है कि 7 दिन के भीतर ठोस कार्रवाई हो, नहीं तो सड़क पर उतरने में देर नहीं लगेगी।
“सिर्फ शिकायत नहीं, अब समाधान चाहिए” — नागरिकों की चेतावनी
- दीवार की मरम्मत की मांग
- बिल्डर को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए
- बाउंसरों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
- संपत्ति सुरक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हो
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