Yatharth Hospital News : इलाज के नाम पर धोखा, ऑपरेशन में लापरवाही और स्टोन 'गायब'!, ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल पर लगा गंभीर आरोप, बार के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व सचिव बार की ने की अस्पताल सील करने की मांग, मरीज की जिंदगी से हुआ खिलवाड़ या इलाज की आड़ में व्यापार?, ग्रेटर नोएडा के बड़े अस्पताल की ‘यथार्थ’ सच्चाई!

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़े नाम के रूप में पहचाने जाने वाले यथार्थ हॉस्पिटल को लेकर अब गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूर्व ग्राम प्रधान उमेश भाटी (देवटा) और धीरेन्द्र भाटी (साकीपुर) ने मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. नरेंद्र कुमार से मुलाकात कर अस्पताल को सील करने की मांग की। उनकी शिकायत के अनुसार अस्पताल ने न केवल मरीज की हालत के साथ खिलवाड़ किया, बल्कि इलाज के नाम पर परिजनों को गुमराह भी किया।
मामला क्या है? — एक पीड़ित की जुबानी, दर्द की असल दास्तान
पीड़ित श्री राज सिंह, जो आम्रपाली ग्रैंड, जीटा-1, ग्रेटर नोएडा के निवासी हैं, अपनी पत्नी राखी के इलाज के लिए 30 मई को यथार्थ हॉस्पिटल पहुंचे। उनकी पत्नी को पेट में तेज़ दर्द था। पहले सी.आर.एच सेंटर में अल्ट्रासाउंड जांच कराई गई थी, जिसमें गॉलब्लैडर (पित्ताशय) में दो पथरियां होने की पुष्टि हुई थी।
डॉक्टर ने कहा — “तुरंत ऑपरेशन कराना जरूरी है!”
डॉ. हमीदी, जो यथार्थ अस्पताल के जनरल सर्जन हैं, ने मरीज का अल्ट्रासाउंड देखकर बताया कि तुरंत लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी (Gallbladder Removal Surgery) करना होगा। डॉक्टर ने यह कहते हुए दबाव बनाया कि देरी से मरीज की हालत और बिगड़ सकती है।
शाम को ही राखी को भर्ती किया गया और अगले दिन ऑपरेशन कर दिया गया।
ऑपरेशन हुआ, पर रहस्यमयी अंदाज़ में ‘एक स्टोन’ गायब!
ऑपरेशन के बाद डॉ. हमीदी ने बताया कि सर्जरी सफल रही। एक प्लास्टिक डिब्बे में पथरी और पित्ताशय की थैली परिजनों को दिखाई गई। लेकिन जब दूसरे स्टोन के बारे में पूछा गया तो स्टाफ ने जवाब दिया कि “वो लैब में जांच के लिए भेज दिया गया है।”
अब तक उस स्टोन की कोई रिपोर्ट नहीं दी गई। राज सिंह ने अस्पताल से रिपोर्ट की मांग की तो टालमटोल किया गया।
मरीज को हुआ असहनीय दर्द, डॉक्टर बोले — “नॉर्मल है”
ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद राखी को जब होश आया तो उसने पेट और कंधे में तेज दर्द की शिकायत की। एडवोकेट धीरेंद्र भाटी ने डॉक्टर को यह बात बताई, तो उन्हें आश्वासन मिला —
🗣️ “इतना दर्द तो हर ऑपरेशन के बाद होता है।”
लेकिन दर्द का स्तर इतना अधिक था कि मरीज बैठने और चलने में भी असहज थी। नर्सिंग स्टाफ ने भी कोई अतिरिक्त देखभाल नहीं की। क्लीनिकल निगरानी की कमी और रिपोर्टिंग की अस्पष्टता ने मामले को और भी संदिग्ध बना दिया।
पूर्व बार सचिव एडवोकेट धीरेंद्र भाटी ने किया CMO से शिकायत, अस्पताल सील करने की मांग
पूर्व अध्यक्ष बार एडवोकेट उमेश भाटी और एडवोकेट धीरेन्द्र भाटी ने इस पूरे प्रकरण को मानवाधिकार और मेडिकल एथिक्स का हनन बताते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जांच की मांग की।
CMO डॉ. नरेंद्र कुमार ने तत्काल एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है, जो इस मामले की रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपेगी।
“मरीजों की आस्था का मज़ाक बना दिया है” — बार एसोसिएशन के एडवोकेट का आक्रोश
पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट उमेश भाटी का कहना है —
“हॉस्पिटल प्रशासन को चाहिए था कि हर स्टेप पर मरीज के परिवार को पूरी जानकारी दे, लेकिन यहां मरीज के दर्द को नज़रअंदाज़ किया गया और ऑपरेशन की पारदर्शिता नहीं रखी गई।”
पूर्व सचिव एडवोकेट धीरेन्द्र भाटी ने चेतावनी दी —
“अगर जांच के बाद दोष सिद्ध होता है और कार्यवाही नहीं होती, तो पूरे सेक्टर में हम आंदोलन करेंगे।”
स्वास्थ्य तंत्र पर उठते हैं सवाल…
- मरीज को जल्दी ऑपरेशन के लिए दबाव क्यों बनाया गया?
- दूसरा स्टोन कहाँ गया?
- क्या ऑपरेशन के बाद की देखभाल मानकों के अनुरूप थी?
- क्या अस्पताल के पास सारे मेडिकल रिकॉर्ड्स हैं?
“ये सिर्फ एक केस नहीं, एक सिस्टम की बुनियादी विफलता है”
स्वास्थ्य सेवाओं का व्यवसायीकरण इस हद तक पहुँच चुका है कि अब आम नागरिक अपनी जान बचाने के लिए भी संदेह की निगाहों से डॉक्टरों को देखने को मजबूर हो गया है।
सोशल मीडिया पर उठी मांग — “Seal Yatharth Hospital”
जैसे ही यह मामला सामने आया, #SealYatharthHospital ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा।
लोगों ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि इस प्रकार की लापरवाह चिकित्सा व्यवस्था के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।
रफ़्तार टुडे की विशेष अपील — चुप न रहें, सवाल ज़रूर उठाएं!
📢 अगर आपके साथ या आपके परिवार के किसी सदस्य के साथ मेडिकल लापरवाही हुई है, तो हमें जरूर लिखें।
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