Breaking News : “बिजली के नाम पर अंधेरा, दावों की जगह पसीना!”, गर्मी की पहली दस्तक में ही फेल हुई एनपीसीएल, ग्रेटर नोएडा के सेक्टरों में 16 से 18 घंटे ब्लैकआउट से मचा हाहाकार, लोग बोले– ‘अब बिल नहीं, जवाब दो’, भीषण गर्मी, बंद पंखे-कूलर और अंधेरे में तड़पते लोग… डेल्टा-2, बीटा-2 और म्यू-2 में बिजली संकट ने खोली सिस्टम की पोल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गर्मी ने अभी पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी और ग्रेटर नोएडा की बिजली व्यवस्था ने जवाब देना शुरू कर दिया। हर साल की तरह इस बार भी बिजली कंपनी एनपीसीएल (नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड) ने गर्मियों से पहले बड़े-बड़े दावे किए थे कि शहरवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए व्यापक तैयारियां कर ली गई हैं, लेकिन जैसे ही तापमान बढ़ा, ये दावे हवा साबित हो गए। ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में लोगों को घंटों नहीं, बल्कि 16 से 18 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। सबसे खराब स्थिति डेल्टा-2 सेक्टर में देखने को मिली, जहां लोग पूरी रात और दिन बिजली संकट से जूझते रहे। हालात ऐसे हो गए कि घरों में पंखे बंद, कूलर ठप और पानी की सप्लाई तक प्रभावित हो गई। भीषण गर्मी के बीच बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा परेशान नजर आए।
“स्मार्ट सिटी” में गांवों से बदतर हालात!
ग्रेटर नोएडा को आधुनिक और सुनियोजित शहर के रूप में विकसित किया गया था, लेकिन बिजली संकट ने इस दावे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सेक्टरवासियों का कहना है कि अब गांवों में भी इतनी लंबी बिजली कटौती नहीं होती, जितनी शहर के पॉश सेक्टरों में हो रही है। डेल्टा-2 के निवासियों ने आरोप लगाया कि बिजली कटौती के दौरान न तो एनपीसीएल की ओर से कोई स्पष्ट सूचना दी गई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। लोग घंटों तक हेल्पलाइन नंबरों पर फोन मिलाते रहे, लेकिन अधिकांश कॉल या तो व्यस्त मिले या किसी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
18 घंटे तक कर्मचारी नहीं ढूंढ पाए फॉल्ट!
डेल्टा-2 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष बॉबी भाटी ने बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि शिकायत करने के काफी देर बाद एनपीसीएल की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कर्मचारी लगभग 18 घंटे तक फॉल्ट की सही लोकेशन तक नहीं खोज पाए। उन्होंने कहा कि कंपनी ने पहले दावा किया था कि किसी भी आपात स्थिति में बिजली सप्लाई बाधित न हो, इसके लिए सेक्टर में वैकल्पिक केबल लाइन डाली गई है। लेकिन जब जरूरत पड़ी तो कर्मचारियों को यह तक जानकारी नहीं थी कि दूसरी लाइन आखिर कहां से गुजर रही है। बॉबी भाटी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा—“एनपीसीएल हर साल बिजली दरें बढ़ाने की तैयारी में रहती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर सेक्टरवासियों को सिर्फ परेशानी मिल रही है। इतनी लंबी कटौती किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती।”
बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किलें
लगातार बिजली कटौती से घरों का माहौल बेहद खराब हो गया। रातभर बिजली न होने से लोग सो नहीं सके। छोटे बच्चे गर्मी से रोते रहे, जबकि बुजुर्गों और मरीजों की हालत ज्यादा खराब रही। कई घरों में इन्वर्टर भी जवाब दे गए, जिससे लोगों को अंधेरे और उमस में रात गुजारनी पड़ी।
कई परिवारों ने बताया कि बिजली न होने से पानी की मोटरें बंद रहीं, जिससे पानी का संकट भी पैदा हो गया। लोगों को पीने के पानी तक के लिए परेशान होना पड़ा। कामकाजी लोगों और छात्रों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि इंटरनेट और ऑनलाइन कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए।
बीटा-2 और म्यू-2 में भी हालात खराब
सिर्फ डेल्टा-2 ही नहीं, बल्कि बीटा-2 और म्यू-2 सेक्टर के लोग भी बिजली संकट से परेशान रहे। कई इलाकों में बार-बार ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या बनी रही। लोगों का कहना है कि गर्मियों की शुरुआत में ही यदि यह स्थिति है, तो मई-जून की भीषण गर्मी में हालात कितने भयावह होंगे, इसका अंदाजा अभी से लगाया जा सकता है।
सेक्टरवासियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
एनपीसीएल की कार्यशैली से नाराज लोगों ने अब खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। सेक्टरवासियों का कहना है कि यदि भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति बनी, तो वे एनपीसीएल कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करेंगे। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि—बिजली व्यवस्था की तत्काल समीक्षा हो
फॉल्ट रिस्पॉन्स सिस्टम मजबूत किया जाए
हर साल वही दावे, हर साल वही परेशानी
ग्रेटर नोएडा के लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हर साल गर्मियों से पहले तैयारियों के दावे क्यों किए जाते हैं, जब जमीनी स्तर पर व्यवस्था इतनी कमजोर है? करोड़ों रुपये के बिजली बिल वसूलने वाली कंपनी आखिर नागरिकों को बुनियादी सुविधा तक क्यों नहीं दे पा रही?
लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर, बढ़े हुए टैरिफ और नई योजनाओं की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन जब आम जनता को राहत देने की बात आती है, तो पूरा सिस्टम फेल नजर आता है।
अब लोगों की मांग — “घोषणाएं नहीं, ग्राउंड पर सुधार चाहिए”
ग्रेटर नोएडा के सेक्टरवासियों का कहना है कि अब उन्हें सिर्फ प्रेस रिलीज और दावे नहीं चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर मजबूत बिजली व्यवस्था चाहिए। शहर तेजी से बढ़ रहा है, आबादी बढ़ रही है और हाईराइज सोसाइटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर उसी गति से मजबूत नहीं हो पा रहा।



