Breaking News : “ग्रेटर नोएडा में धूल का धुआं हुआ महंगा!”, अवैध आरएमसी प्लांटों पर SDM की बड़ी कार्रवाई, सीलिंग की सिफारिश, प्रशासन सख्त रुख मे, प्रशासनिक टीम ने किया औचक निरीक्षण, सब निकले बिना अनुमति के संचालित, SDM दादरी अनुज नेहरा ने कहा — “सभी अवैध संयंत्रों को किया जाएगा सील”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा में लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर अब प्रशासन सख्त हो गया है। दादरी क्षेत्र में संचालित रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट्स पर उपजिलाधिकारी (SDM) दादरी के नेतृत्व में बड़ी कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई उस समय की गई जब स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बाद प्रशासन तक पहुंची। खबर का असर इतना तेज़ रहा कि प्रशासन ने मौके पर जाकर पूरे क्षेत्र में बने आरएमसी संयंत्रों का औचक निरीक्षण किया।
औचक निरीक्षण में खुला बड़ा खेल – सभी संयंत्र अवैध
जिलाधिकारी के आदेश पर उपजिलाधिकारी दादरी के नेतृत्व में गठित एक संयुक्त टीम बनाई गई जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खनन विभाग, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी शामिल थे।
जब टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो पाया गया कि अधिकांश आरएमसी प्लांट बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं।
कई जगहों पर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी कोई व्यवस्था नहीं थी। हवा में उड़ती धूल, खुले में पड़े सीमेंट और पानी के छिड़काव की कमी ने टीम को चौंका दिया।
SDM अनुज नेहरा ने कहा — “सभी अवैध संयंत्रों को किया जाएगा सील”
निरीक्षण के बाद उपजिलाधिकारी दादरी ने कहा कि “यह सभी संयंत्र पूरी तरह अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। इनके पास न तो प्रदूषण बोर्ड की अनुमति है और न ही कोई लाइसेंस। ऐसे में इन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कराने की कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर को एक विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है, जिसमें इन संयंत्रों को सील करने और कानूनी कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की गई है।
अनुपालन दस्तावेज़ों की जांच में आई सच्चाई सामने
टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि किसी भी संयंत्र के पास अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Documents), पर्यावरणीय स्वीकृति पत्र, या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी नहीं है।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह संयंत्र न केवल पर्यावरण अधिनियम 1986 का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि खुला प्रदूषण फैलाने में भी योगदान दे रहे हैं।
नागरिकों की बड़ी भूमिका — एक्टिव पीपल अलायंस का संघर्ष रंग लाया
इस पूरी कार्रवाई में नागरिकों की भूमिका अहम रही।
एक्टिव पीपल अलायंस – GNW के सदस्य और क्षेत्र की कई आवासीय सोसाइटियों के निवासी लंबे समय से इन आरएमसी प्लांटों से फैलते प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
धूल और धुएं से परेशान लोगों ने कई बार प्रशासन को शिकायतें भेजीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
आखिरकार, जब मीडिया ने मुद्दा उठाया, तो प्रशासन हरकत में आया और स्थल पर जाकर सख्त कदम उठाया गया।
प्रदूषण से परेशान ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी
ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दादरी क्षेत्र के निवासी लंबे समय से इन प्लांटों के कारण धूल प्रदूषण से जूझ रहे हैं। सुबह-शाम हवा में तैरती धूल से बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी बीमारियाँ बढ़ी हैं। लोगों ने बताया कि “यह प्लांट बिना रोकटोक रात-दिन चलते हैं, जिससे सड़कों पर दृश्यता कम हो जाती है और जीवन असुरक्षित महसूस होता है।”
प्रशासन ने बनाई कार्रवाई की रूपरेखा
निरीक्षण के तुरंत बाद SDM दादरी ने निर्देश दिए कि प्रदूषण फैलाने वाले सभी आरएमसी संयंत्रों को सील किया जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे जल्द से जल्द संबंधित मालिकों को नोटिस भेजें और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करें।
खनन विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि किसी भी अवैध सामग्री का उपयोग या भंडारण न हो।
जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट
SDM ने अपने पत्र में यह स्पष्ट लिखा है कि “सभी संयंत्र अवैध हैं और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसलिए इन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए।”
इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि यदि आगे किसी भी विभाग की लापरवाही पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
नागरिकों ने कहा — “अब मिली राहत की उम्मीद”
एक्टिव पीपल अलायंस के प्रतिनिधि ने कहा “हम पिछले कई महीनों से इन आरएमसी प्लांटों से होने वाले प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। आज प्रशासन ने हमारी शिकायत को गंभीरता से लिया और कार्रवाई शुरू की, यह राहत की बात है।”
निवासियों ने भी बताया कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में धूल-मिट्टी का कहर कम होगा और बच्चों को खुली हवा में सांस लेने का मौका मिलेगा।
अब नहीं चलेगा प्रदूषण का धंधा
प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि आगे कोई भी अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई न केवल प्रदूषण रोकने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं — चाहे वह उद्योगपति ही क्यों न हो।
ग्रेटर नोएडा में उपजिलाधिकारी की यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही और जनदबाव की जीत है। यह साबित करता है कि जब नागरिक, मीडिया और प्रशासन मिलकर काम करें, तो बदलाव संभव है। अब उम्मीद है कि इस कार्रवाई से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में प्रदूषण पर लगाम लगेगी और शहर फिर से स्वच्छ हवा की ओर लौटेगा।



