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Greater Noida West News : "प्लास्टर का डर, हर पल खतरे का घर!", ग्रेटर नोएडा वेस्ट की इस सोसायटी में होम्स में लगातार गिर रहे प्लास्टर से दहशत में हजारों निवासी, एक हफ्ते में 7 प्लास्टर गिरे, मेंटिनेंस के नाम पर सिर्फ लूट?

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे।
भले ही करोड़ों रुपए मेंटिनेंस चार्ज वसूले जा रहे हों, लेकिन ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हकीकत बेहद भयावह होती जा रही है। यहां की बहुचर्चित ग्रुप हाउसिंग सोसायटी अजनारा होम्स में हर बीतते दिन के साथ प्लास्टर गिरने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिससे न सिर्फ लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, बल्कि जिंदगी भी दांव पर लगती दिखाई दे रही है।


G और ओ टावर में शुक्रवार को दोहरी घटना, बाल-बाल बचे लोग

बीते शुक्रवार को सोसायटी के जी टावर के पास बारिश के बाद प्लास्टर का बड़ा हिस्सा नीचे गिर पड़ा, वहीं ओ टावर की लॉबी में फॉल्स सीलिंग का एक विशाल हिस्सा अचानक नीचे आ गिरा। ये घटनाएं मात्र इत्तेफाक नहीं बल्कि रोजमर्रा का डर बनती जा रही हैं।

निवासियों के अनुसार, सिर्फ सात दिनों में यह पांचवीं बड़ी घटना है, जिससे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


रोज गिर रहा प्लास्टर, खतरे में हजारों लोगों की जान

दिनकर पांडेय, निवासी, बताते हैं:

“सोसायटी में हज़ारों परिवार रहते हैं। हर महीने भारी मेंटिनेंस चार्ज देने के बावजूद बिल्डिंग में सुरक्षा नाम की कोई चीज़ नहीं है। शुक्रवार को ओ टावर के लॉबी में जो फॉल्स सीलिंग गिरी, अगर वहां कोई खड़ा होता तो बड़ा हादसा तय था।”

वहीं, जी टावर के पास गिरा प्लास्टर एक खड़ी कार के करीब गिरा। इससे पहले भी एक अन्य टावर में बारिश के दौरान गिरा प्लास्टर स्कूटी को डैमेज कर चुका है।


हफ्ते भर में पांच हादसे: किस दिन कौनसी जगह टूटी?

तारीखघटना स्थानघटना का विवरण
शुक्रवारओ टावर लॉबी + जी टावर साइडफॉल्स सीलिंग और प्लास्टर गिरा
गुरुवारअनाम टावरदीवार का हिस्सा झड़कर गिरा
मंगलवारबी टावरऊपरी फ्लोर से प्लास्टर गिरा
बीते रविवारओ टावरपाइप व प्लास्टर गिरने से वाहन डैमेज
बीते शनिवारबी टावर पार्किंग एरियास्कूटी क्षतिग्रस्त, बुजुर्ग बाल-बाल बचे

“खंडहर बनती जा रही है सोसायटी” – चंदन सिन्हा

सोसायटी निवासी चंदन सिन्हा कहते हैं:

“हमने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग की थी। 20 मार्च को प्राधिकरण ने बिल्डर को 3 महीने में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब 5 महीने हो गए, कोई ऑडिट नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि प्लास्टर झड़ने की घटनाएं महज चेतावनी नहीं, मौत को बुलावा हैं। प्रशासन और बिल्डर को जवाब देना चाहिए।


महिला पर गिरा प्लास्टर, बाल-बाल बची जान

रक्षा अडेला सोसायटी के निवासी राहुल यादव ने बताया कि सुबह एक महिला परिसर में टहल रही थी, तभी एक टावर के ऊपरी हिस्से से प्लास्टर गिरा। टुकड़ा महिला के पैर पर लगा, लेकिन गनीमत रही कि बड़ा हिस्सा उनके पास नहीं गिरा। यह हादसा भी प्लास्टर गिरने की घटनाओं की गंभीरता को दर्शाता है।


मेंटिनेंस के नाम पर सिर्फ लूट?

सोसायटी के निवासियों का आरोप है कि बिल्डर और मेंटिनेंस टीम में तालमेल नहीं है।
मेंटिनेंस चार्ज लाखों में लिए जाते हैं
लेकिन न समय पर मरम्मत होती है,
न ही भवन की मजबूती की जांच

निवासियों का कहना है कि टावरों में लीकेज, जंग लगे पाइप, उखड़ता सीमेंट और दरकती छतें आम बात हो गई हैं।


प्राधिकरण और प्रशासन से गुहार

अजनारा होम्स ही नहीं, बल्कि कई सोसायटियों में ऐसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं।
निवासी चाहते हैं कि प्राधिकरण तत्काल हस्तक्षेप करे,
बिल्डर को जवाबदेह बनाए,
और स्ट्रक्चरल ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।


मूल समस्याएं क्या हैं?

  1. घटिया निर्माण सामग्री
  2. बिल्डिंग की नियमित जांच न होना
  3. बारिश में लीकेज और नमी के कारण प्लास्टर झड़ना
  4. बिल्डर और मेंटिनेंस टीम की उदासीनता
  5. प्राधिकरण द्वारा कोई सख्त कार्रवाई नहीं

निवासियों की मांगें

स्ट्रक्चरल ऑडिट की रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक हो
प्लास्टर गिरने की घटनाओं पर एफआईआर दर्ज की जाए
सभी टावरों की इमरजेंसी मरम्मत कराई जाए
बिल्डर से जवाबतलबी हो
प्राधिकरण सुरक्षा मानकों की जांच करे


प्राधिकरण की चुप्पी पर सवाल

यह आश्चर्यजनक है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण मौन है।
20 मार्च को दिए गए ऑर्डर को 5 महीने बीत चुके हैं, लेकिन
➡️ न कोई टीम आई,
➡️ न कोई नोटिस जारी हुआ,
➡️ न कोई ऑडिट रिपोर्ट सामने आई।


निष्कर्ष: कब जागेगा सिस्टम?

जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक बिल्डर, मेंटिनेंस एजेंसी और प्रशासन शायद आंखें मूंदे रहेंगे।
अब वक्त है कि लोग सिर्फ मेंटिनेंस चार्ज न दें, बल्कि अपने जीवन की सुरक्षा की गारंटी भी मांगें।

अगर समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं हुई, तो अजनारा होम्स जैसी और सोसायटियों में भी हादसे टलना मुश्किल हैं।


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Raftar Today
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