GBU University Breaking News : छात्रों की गाढ़ी कमाई पर डाका!”, जीबीयू में भर्ती और फीस घोटाले को लेकर समाजवादी छात्र सभा का बड़ा हमला, 5 जनवरी तक कार्रवाई नहीं तो घेराव और अनिश्चितकालीन धरना

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में कथित भर्ती घोटाले, फीस अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी छात्र सभा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रेस वार्ता के माध्यम से खुलकर मोर्चा खोल दिया है। छात्र सभा के जिला अध्यक्ष मोहित ने कहा कि विश्वविद्यालय में वर्षों से धांधली का खेल चल रहा है, लेकिन जिम्मेदारों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
फीस घोटाले में 25 करोड़ की रिकवरी, लेकिन छात्रों के पैसे का क्या?
प्रेस वार्ता में मोहित ने बताया कि विश्वविद्यालय में फीस घोटाले को लेकर रिकॉन्सिलिंग का नोटिस जारी हुआ है, जिसमें करीब 25 करोड़ रुपये की रिकवरी दर्शाई गई है, लेकिन सबसे अहम सवाल छात्रों की फीस का है।
उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 20 से 25 लाख रुपये छात्रों की फीस से जुड़े हैं, जिसकी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। छात्र सभा का दावा है कि इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड विश्वविद्यालय के कुलपति और एक वरिष्ठ अधिकारी विश्वास त्रिपाठी हैं, जिन्होंने छात्रों की मेहनत की कमाई का दुरुपयोग किया।
छात्र नेताओं ने मांग की कि छात्रों से दोबारा वसूली गई फीस तत्काल वापस कराई जाए और दोषियों पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
बिना मानकों के रजिस्ट्रार पद पर नियुक्ति का आरोप
मोहित ने आरोप लगाया कि विश्वास त्रिपाठी विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार पद पर नियमों और मानकों को दरकिनार कर तैनात हैं, जबकि उनके खिलाफ पहले से ही केस चल रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रजिस्ट्रार पद को अपने लिए आजीवन सुरक्षित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के जीओ (GO) में बदलाव कराया गया, ताकि पद पर स्थायी रूप से बने रहा जा सके।
भर्ती में भाई-भतीजावाद, अनुभवी शिक्षकों की अनदेखी
छात्र सभा का आरोप है कि फरवरी से अब तक कुलपति द्वारा करीब आधा दर्जन से अधिक रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों को बिना अनुभव और मानकों के विश्वविद्यालय में भर्ती किया गया है।
यहां तक कि एक महिला को डीन जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठा दिया गया, जबकि 15 वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों को नजरअंदाज कर दिया गया।
छात्र नेताओं ने इसे खुलेआम भाई-भतीजावाद और संस्थान की साख के साथ खिलवाड़ बताया।
2010-11 की भर्तियों की जांच अधूरी क्यों?
प्रेस वार्ता में यह सवाल भी उठाया गया कि वर्ष 2010-11 में हुई भर्तियों की जांच आज तक पूरी क्यों नहीं हुई।
छात्र सभा का कहना है कि उस समय भी कई नियुक्तियां बिना मानकों के हुई थीं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद जांच को अधर में लटकाए रखा गया है।
महिलाओं और छात्राओं के शोषण के आरोप, FIR के बाद भी चुप्पी
विश्वविद्यालय में महिलाओं और छात्राओं के साथ यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों का मुद्दा भी प्रेस वार्ता में जोरशोर से उठाया गया। मोहित ने कहा कि कई वरिष्ठ अधिकारियों पर ऐसे आरोप लग चुके हैं और पिछले वर्ष एफआईआर भी दर्ज हुई, लेकिन इसके बावजूद जांच को आगे नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किसके संरक्षण में ये मामले दबाए जा रहे हैं और कार्रवाई से बचाया जा रहा है।
बैलेंस शीट सार्वजनिक क्यों नहीं? करोड़ों के हिसाब पर सवाल
छात्र सभा ने विश्वविद्यालय की वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अब तक विश्वविद्यालय की बैलेंस शीट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
विश्वविद्यालय के रखरखाव और विकास के नाम पर आने वाले करोड़ों रुपये आखिर कहां जा रहे हैं, इसका हिसाब छात्रों और आम जनता के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा।
छात्र नेताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय की बदहाल व्यवस्था, खराब फूड क्वालिटी और अव्यवस्थाओं के पीछे भी यही भ्रष्टाचार जिम्मेदार है।
5 जनवरी तक कार्रवाई नहीं तो आंदोलन
समाजवादी छात्र सभा ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 5 जनवरी तक इन सभी मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन विश्वविद्यालय का घेराव करेगा।
जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। इस मौके पर प्रशांत भाटी, कृष्ण रावल, अंकित नागर, प्रिंस भाटी, प्रशांत वर्मा सहित समाजवादी छात्र सभा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।



