GD Goenka Public School : जी.डी. गोयंका पब्लिक स्कूल में गूंजा "गणपति बप्पा मोरया" – भक्ति, उल्लास और शिक्षा संग संस्कृति का अद्भुत संगम, आनंद और भक्ति से भरा दिन, प्रधानाचार्या रेनू सहगल का प्रेरणादायक संदेश

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
स्वर्ण नगरी स्थित जी.डी. गोयंका पब्लिक स्कूल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से भी गहराई से जुड़ी होती है। विद्यालय परिसर में इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर्व को बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया गया।
बच्चों से लेकर शिक्षकों तक सभी ने भगवान गणेश की भव्य आराधना में भाग लिया। “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से स्कूल का हर कोना गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
शोभायात्रा से शुरू हुआ आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान गणेश की प्रतिमा की शोभायात्रा से हुई। छोटे-छोटे बच्चे पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे भजन गाते और नृत्य करते हुए इस यात्रा का हिस्सा बने।
ढोल-नगाड़ों और संगीत की धुन ने शोभायात्रा को और भी भव्य बना दिया। जैसे-जैसे प्रतिमा विद्यालय परिसर से गुजरी, छात्र-छात्राएँ पुष्पवर्षा कर भक्ति और उत्साह का प्रदर्शन करते रहे।
बच्चों की प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया
पूरे कार्यक्रम में बच्चों ने गीत, नृत्य और कविताओं की सुंदर प्रस्तुतियाँ दीं।
नर्सरी और प्राइमरी के छोटे बच्चों ने रंग-बिरंगे परिधानों में गणेश वंदना पर नृत्य किया।
सीनियर कक्षाओं के छात्रों ने भगवान गणेश के जीवन और उनकी महत्ता पर कविताएँ और भाषण प्रस्तुत किए।
समूह गान में बच्चों ने “जय गणेश देवा” गाकर पूरे स्कूल का वातावरण और भी भक्ति में सराबोर कर दिया।
इन प्रस्तुतियों ने न केवल बच्चों की प्रतिभा को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि कैसे विद्यालय सांस्कृतिक गतिविधियों को शिक्षा का हिस्सा बनाता है।
यादगार और प्रेरणादायक आयोजन
गणेश चतुर्थी का यह पर्व जी.डी. गोयंका पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा के छात्रों और शिक्षकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
भक्ति, उल्लास, शिक्षा और संस्कृति का यह संगम आने वाले वर्षों में भी बच्चों को प्रेरित करता रहेगा।
आकर्षक सजावट ने बढ़ाया आकर्षण
विद्यालय को इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया।
रंगोली, फूलों की मालाएँ और झूमर सजावट का हिस्सा बने।
बच्चों द्वारा बनाई गई गणेश जी की पेंटिंग्स और क्राफ्ट वर्क दीवारों पर टंगे थे।
मंच पर भगवान गणेश की प्रतिमा विशेष पंडाल में स्थापित की गई थी, जो लाइट्स और पुष्पों से सुसज्जित थी। रंग-बिरंगी सजावट और छात्रों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।
प्रधानाचार्या रेनू सहगल का प्रेरणादायक संदेश
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. रेनू सेहगल ने अपने संदेश में कहा –
> “गणेश जी बुद्धि, समृद्धि और मंगल के देवता हैं। हमें उनके आदर्शों को अपनाकर जीवन में सदैव सकारात्मकता और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि सही दिशा में जीवन जीने की कला सिखाना भी है।”
प्रधानाचार्या के इस प्रेरक संदेश ने छात्रों और शिक्षकों को जीवन में अनुशासन और सत्य के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया।
आनंद और भक्ति से भरा दिन
कार्यक्रम के अंत में भगवान गणेश की आरती की गई। पूरे विद्यालय ने सामूहिक रूप से आरती गाई और प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह झलक रहा था। शिक्षकों ने भी बच्चों की प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें आत्मविश्वास और सामूहिकता सिखाते हैं।
शिक्षा और संस्कृति का परिपूर्ण मेल
गणेश चतुर्थी जैसे आयोजन इस बात का उदाहरण हैं कि जी.डी. गोयंका पब्लिक स्कूल केवल अकादमिक उत्कृष्टता पर ही नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास पर भी ध्यान देता है।
यह आयोजन बच्चों में –
सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान
धार्मिक परंपराओं की समझ
कला और रचनात्मकता का विकास
और सामाजिक एकता का संदेश
– जैसे गुणों का संचार करता है।
आधुनिक शिक्षा के बीच भारतीय परंपरा
आज के समय में जहाँ बच्चे डिजिटल दुनिया से जुड़े रहते हैं, वहीं विद्यालय का यह प्रयास उन्हें भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करता है।
बच्चों ने न केवल गणेश चतुर्थी का महत्व सीखा, बल्कि यह भी जाना कि भगवान गणेश को “विघ्नहर्ता” क्यों कहा जाता है और जीवन में सकारात्मक सोच कितनी आवश्यक है।



