Breaking News 130mt Road : पहली ही बारिश में DFCCIL की करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल!, 130 मीटर रोड का नया रेलवे ओवरब्रिज बना चर्चा का केंद्र, सड़क उखड़ने की तस्वीरें वायरल, नागरिक बोले—'अगर नई सड़क का यह हाल, तो जवाबदेह कौन?', जाम से राहत की उम्मीद, लेकिन गुणवत्ता पर शुरू हुई बहस

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा की सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में शामिल 130 मीटर रोड पर हाल ही में तैयार रेलवे ओवरब्रिज (ROB) पहली ही बारिश के बाद विवादों के घेरे में आ गया है। जिस ओवरब्रिज से हजारों लोगों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद थी, उसी परियोजना की गुणवत्ता को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों ने इस बहुचर्चित निर्माण कार्य को चर्चा का विषय बना दिया है। लोगों का आरोप है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (DFCCIL) द्वारा निर्मित पुल के कुछ हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत पहली ही बारिश के बाद उखड़ गई, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित एजेंसियों की ओर से भी अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
जाम से राहत की उम्मीद, लेकिन गुणवत्ता पर शुरू हुई बहस
130 मीटर रोड का यह रेलवे ओवरब्रिज ग्रेटर नोएडा, नोएडा वेस्ट, तिलपता, दादरी और आसपास के क्षेत्रों की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। लंबे समय से रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से परेशान लोगों के लिए यह परियोजना बड़ी राहत मानी जा रही थी। पुल के शुरू होने के बाद प्रतिदिन हजारों वाहन इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन पहली ही तेज बारिश के बाद सड़क के कुछ हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीरें सामने आने के बाद लोगों की उम्मीदों पर सवाल खड़े हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नई बनी सड़क इतनी जल्दी खराब हो रही है तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच आवश्यक है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें, जांच की उठी मांग
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) सहित विभिन्न माध्यमों पर नागरिकों ने क्षतिग्रस्त सड़क की तस्वीरें साझा करते हुए मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। कई लोगों ने प्रधानमंत्री, रेल मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), DFCCIL, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन को टैग करते हुए लिखा कि सार्वजनिक धन से बनने वाली परियोजनाओं में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
नागरिकों का कहना है कि यदि शिकायतें सही हैं तो स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा निर्माण सामग्री, सड़क की गुणवत्ता और कार्य निष्पादन की जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना में केवल निर्माण एजेंसी ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि समय रहते जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में भी इसी प्रकार की शिकायतें सामने आती रहेंगी। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली परियोजनाओं का उद्देश्य वर्षों तक सुरक्षित और टिकाऊ सुविधा उपलब्ध कराना होता है। यदि निर्माण के तुरंत बाद ही मरम्मत की आवश्यकता पड़ने लगे तो इसकी निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।
सुरक्षा भी बनी चिंता का विषय
130 मीटर रोड एनसीआर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। इस सड़क से प्रतिदिन बड़ी संख्या में निजी वाहन, स्कूल बसें, औद्योगिक क्षेत्र के भारी वाहन और सार्वजनिक परिवहन गुजरता है। ऐसे में यदि सड़क का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त होता है तो दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ सकती है। वाहन चालकों का कहना है कि यदि सड़क की सतह असमान हो जाए तो विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ सकता है। इसलिए क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत के साथ-साथ संपूर्ण पुल का तकनीकी निरीक्षण कराया जाना चाहिए।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की निर्माण संबंधी कमी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त हिस्से की शीघ्र मरम्मत कर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाए।
लोगों का कहना है कि विकास परियोजनाओं पर खर्च होने वाला प्रत्येक रुपया जनता का है, इसलिए गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होना आवश्यक है।
अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में DFCCIL, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अथवा जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह मामला सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर सकता है। वहीं यदि शिकायतें निराधार साबित होती हैं तो संबंधित एजेंसियों की ओर से भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद रहेगी।



