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GIMS College News : मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल, वेदिका फाउंडेशन और GIMS कॉलेज ने किया MHA 2017 के तहत MOU साइन, छात्रों की सेहत को मिलेगा संबल

GIMS कॉलेज के CEO श्री स्वदेश कुमार ने कहा कि, “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों की शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक सेहत का ख्याल रखें। यह साझेदारी उसी दिशा में उठाया गया एक साहसिक कदम है।”

ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।। मानसिक स्वास्थ्य, जो अब तक शिक्षा व्यवस्था में उपेक्षित रहा, अब धीरे-धीरे केंद्र में आ रहा है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए वेदिका फाउंडेशन और ग्रेटर नोएडा स्थित GIMS कॉलेज ने आपसी सहमति से मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता विशेष रूप से “मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 (MHA-2017)” के तहत छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण और जागरूकता को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।


जब शिक्षा बनी मन की बात: MOU की औपचारिकता और उद्देश्य

इस एमओयू पर हस्ताक्षर वेदिका फाउंडेशन की सचिव डॉ. सपना आर्या और GIMS के डायरेक्टर डॉ. भूपेंद्र कुमार सोम द्वारा किए गए। इस पहल का उद्देश्य PGDM कोर्स में अध्ययनरत छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें जरूरी सहायता प्रदान करना है। इस साझेदारी के तहत कॉलेज में नियमित रूप से परामर्श सत्र, सेमिनार, कार्यशालाएं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न अभियान चलाए जाएंगे।


विशेषज्ञों की राय: क्या कहा जिम्मेदारों ने?

वेदिका फाउंडेशन की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पारुल गोयल ने कहा, “MHA 2017 ने मानसिक बीमारियों को केवल एक असहज स्थिति नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक विकार के रूप में परिभाषित किया है, जो व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता, यथार्थ बोध और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करता है।”

वहीं GIMS कॉलेज के CEO श्री स्वदेश कुमार ने कहा कि, “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों की शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक सेहत का ख्याल रखें। यह साझेदारी उसी दिशा में उठाया गया एक साहसिक कदम है।”


MHA 2017 क्या है और यह क्यों ज़रूरी?

मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 भारत सरकार द्वारा लागू किया गया एक महत्वपूर्ण अधिनियम है, जिसका मकसद मानसिक रूप से पीड़ित लोगों को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देना है। यह अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को बिना भेदभाव के इलाज, जानकारी, गोपनीयता और परामर्श जैसी सुविधाएं मिलें।

GIMS और वेदिका फाउंडेशन की साझेदारी इसी कानून को जमीनी स्तर पर लागू करने का प्रयास है।


कैसे मिलेंगी सेवाएं?

इस साझेदारी के तहत छात्रों को उपलब्ध कराई जाएंगी:

  • 24×7 काउंसलिंग सेवाएं (फोन, ऑनलाइन, वीडियो माध्यम से)
  • इमोशनल इंटेलिजेंस कार्यशालाएं
  • ग्रुप काउंसलिंग सेशन
  • डिप्रेशन और एंग्जायटी स्क्रीनिंग टूल्स
  • क्राइसिस मैनेजमेंट सपोर्ट
  • जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक, केस स्टडी आधारित व्याख्यान

छात्र होंगे सशक्त, समाज होगा सजग

इस समझौते के माध्यम से कॉलेज में न सिर्फ मानसिक रोगों के निदान और उपचार की सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि “प्रिवेंटिव मेंटल हेल्थ” पर भी ज़ोर रहेगा। छात्रों को यह समझाया जाएगा कि मानसिक स्वास्थ्य कोई शर्म का विषय नहीं, बल्कि उतना ही सामान्य और जरूरी है जितना शरीर का स्वास्थ्य।


अभिभावक, शिक्षक और संस्थान की संयुक्त भूमिका

डॉ. सपना आर्या ने इस मौके पर स्पष्ट रूप से कहा कि अब केवल सरकार पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। “अभिभावकों, शिक्षकों और स्वयं संस्थानों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनना होगा। यही सामाजिक बदलाव की नींव बनेगी।”


कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद?

कार्यक्रम में वेदिका फाउंडेशन और GIMS के कई प्रमुख अधिकारी एवं अध्यापक उपस्थित रहे। एडमिशन आउटरीच हेड श्री रूपेश राव ने बताया कि आने वाले दिनों में इस साझेदारी को और विस्तारित किया जाएगा, ताकि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना पनपे।


📢 निष्कर्ष: यह सिर्फ समझौता नहीं, एक आंदोलन है

यह MOU कोई सामान्य समझौता नहीं, बल्कि युवाओं के मनोबल, आत्मबल और मानसिक स्थिरता के लिए चलाया गया एक सामाजिक आंदोलन है। आज जब हर तीसरा छात्र किसी न किसी मानसिक दबाव में है, तो यह समझौता उन्हें संबल, सहयोग और समाधान की ओर ले जाने वाला मार्ग बनेगा।


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